सेवा संकल्प अभियान: छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की नई भोर, हुनर, शोध और स्वावलंबन से गढ़ा जा रहा युवाओं का भविष्य

'सेवा आपके द्वार' की भावना को चरितार्थ करते हुए राज्य के अंतिम छोर पर स्थित आदिवासी और दूरस्थ वनांचल अंचलों में नए महाविद्यालय खोले जा रहे हैं। अब बस्तर और सरगुजा जैसे दूरदराज क्षेत्रों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ रहा है, बल्कि आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा उनके अपने अंचल में ही उपलब्ध हो रही है।

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CM Vishnu Dev Sai
नक्सल बेल्ट के गांवों का होगा विकास | Image: Vishnu Dev Sai Facebook

छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा अब केवल किताबों और कक्षाओं के पारंपरिक दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के लाखों युवाओं के सपनों को नई उड़ान दे रही है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की मूल भावना को धरातल पर उतारते हुए राज्य सरकार युवाओं को केवल डिग्री देने के बजाय उन्हें आत्मनिर्भर, हुनरमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का अभूतपूर्व कार्य कर रही है।

सेवा का संकल्प: गुणवत्ता और समावेशी विकास का 'मिशन मोड'
 

राज्य सरकार ने 'सेवा का संकल्प' निभाते हुए शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 'छत्तीसगढ़ उच्च शिक्षा मिशन' की शुरुआत की है। इस मिशन के तहत महाविद्यालयों के ढांचागत और शैक्षणिक उन्नयन के लिए विशेष बजटीय संबल दिया जा रहा है। पारदर्शी और सख्त मॉनिटरिंग तंत्र यह सुनिश्चित कर रहा है कि सरकारी सहायता का सीधा लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचे।

शैक्षणिक गुणवत्ता को शीर्ष पर ले जाने के लिए 3,000 से अधिक छात्र संख्या वाले उत्कृष्ट कॉलेजों को चिन्हित कर 36 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही, अध्यापन व्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्राध्यापकों की सीधी भर्ती प्रक्रिया तेज कर दी गई है और उद्योग जगत के व्यावहारिक विशेषज्ञों को 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' के रूप में परिसरों से जोड़ा जा रहा है।

सेवा आपके द्वार: वनांचल से शहरों तक उच्च शिक्षा की आसान पहुँच

'सेवा आपके द्वार' की भावना को चरितार्थ करते हुए राज्य के अंतिम छोर पर स्थित आदिवासी और दूरस्थ वनांचल अंचलों में नए महाविद्यालय खोले जा रहे हैं। अब बस्तर और सरगुजा जैसे दूरदराज क्षेत्रों के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ रहा है, बल्कि आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा उनके अपने अंचल में ही उपलब्ध हो रही है। चार वर्षीय बी.एड. (ITEP) और बी.पी.एड. जैसे एकीकृत व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

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कहानी बदलाव की: आधुनिक तकनीक और स्वावलंबन से युवाओं का सशक्तीकरण

यह बदलाव केवल व्यवस्थागत नहीं, बल्कि हर उस युवा की 'कहानी बदलाव की' है जो कल तक केवल पारंपरिक विषयों तक सीमित था। स्वावित्तीय पाठ्यक्रम नीति के तहत अब स्थानीय और वैश्विक मांग के अनुसार युवाओं को तैयार किया जा रहा है। भविष्य में उपयोगी विभिन्न तकनीकों और कौशल को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सिक्योरिटी, वेब डिजाइनिंग जैसे विषयों को प्रमुखता से उपलब्ध कराया जा रहा है। 

इसी तरह स्थानीय व कृषि-आधारित उद्योग के तहत रेशम कीट पालन, टसर टेक्नोलॉजी, फिशरीज, फूड प्रोसेसिंग, मशरूम कल्टीवेशन, फ्लोरीकल्चर और हर्बल कल्टीवेशन की शिक्षा युवाओ को आर्थिक रूप से मजबूत करेंगे। इन व्यावहारिक विषयों के लिए राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित संस्थानों और उद्योग जगत के साथ MoU किए गए हैं, जिससे युवाओं को सीधी इंटर्नशिप, व्यावहारिक अनुभव और कैंपस प्लेसमेंट की सुविधा मिल रही है।
    
रिसर्च, कौशल विकास, उद्योग समन्वय और वनांचल तक शिक्षा के विस्तार के इस संगम से छत्तीसगढ़ तेजी से देश के अग्रणी 'एजुकेशन हब' के रूप में स्थापित हो रहा है।

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Published By:
 Sujeet Kumar
पब्लिश्ड