अविमुक्तेश्वरानंद पर संतों के गंभीर आरोप, राम मंदिर के नाम पर जुटाए गए सोने का मांगा हिसाब

कई संतों ने उन पर राम मंदिर निर्माण के नाम पर चलाए गए सोना और चंदा संग्रह अभियान को लेकर सवाल उठाए हैं।

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swami avimukteshwaranand saraswati
swami avimukteshwaranand saraswati | Image: ANI

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और दान में कथित गड़बड़ियों को लेकर बहस के बीच अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक अलग विवाद को लेकर चर्चा में हैं। कई संतों ने उन पर राम मंदिर निर्माण के नाम पर चलाए गए सोना और चंदा संग्रह अभियान को लेकर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि अभियान के तहत जुटाए गए धन और सोने का उन्होंने कभी सार्वजनिक हिसाब नहीं दिया। कई संतों ने मांग की है कि राम मंदिर की तरह ही अविमुक्तेश्वरानंद के इस चंदा अभियान की भी जांच होनी चाहिए।

1008 किलो सोना जुटाने का किया था ऐलान

सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, फरवरी 2020 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रामालय ट्रस्ट की ओर से 'स्वर्ण संग्रह सपर्या' अभियान की घोषणा की थी। इस अभियान के तहत देश के सात लाख गांवों से 1008 किलो सोना एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया था।

घोषणा के मुताबिक, 108 किलो सोने से अस्थायी 'स्वर्णालय' बनाया जाना था, जबकि शेष 900 किलो सोना भविष्य में बनने वाले भव्य राम मंदिर को समर्पित किया जाना था। लेकिन इस अभियान के तहत वास्तव में कितना सोना एकत्र हुआ, वह कहां रखा गया, उसका ऑडिट हुआ या नहीं। इसको लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की गई। इसी पर अब संत समाज के कई लोग सवाल खड़ कर रहे हैं।

क्या था रामालय ट्रस्ट?

रामालय ट्रस्ट का गठन वर्ष 1994 में किया गया था। इसके प्रमुख ट्रस्टी द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती थे। ट्रस्ट में रामानंदाचार्य रामनरेशाचार्य समेत कुल 25 सदस्य शामिल थे। ट्रस्ट का उद्देश्य राम मंदिर निर्माण के लिए संसाधन जुटाना बताया गया था। बाद में श्रीराम जन्मभूमि न्यास और फिर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की व्यवस्था बनने के बाद रामालय ट्रस्ट निष्क्रिय हो गया। इसके बाद ट्रस्ट द्वारा जुटाए गए दान और संपत्ति को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

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स्वामी प्रज्ञानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाए गंभीर आरोप

स्वामी प्रज्ञानंद सरस्वती ने आरोप लगाया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद एक कार्यक्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने गुरु की अनुमति के बिना रामलला के लिए स्वर्ण जड़ित मंदिर बनाने और हजार गांवों से सोना और चंदा जुटाने की घोषणा की थी।

उन्होंने कहा कि लोगों ने इसे गुरुजी की इच्छा मानकर खुलकर दान दिया। महिलाओं ने अपने गहने तक दान किए और कई संतों ने भी आर्थिक सहयोग किया। उनका दावा है कि उन्होंने स्वयं पांच लाख रुपये दिए थे, लेकिन बाद में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वह धन और सोना कहां गया। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई या एसआईटी से जांच कराने की मांग की है।

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गोविंदानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद पर लगाए गबन के आरोप

स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि 5 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हो चुका था और उसके बाद राम मंदिर के लिए दान एकत्र करने का अधिकार केवल उसी ट्रस्ट के पास था।

उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद 7 फरवरी 2020 को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 'राम-राम ग्राम-ग्राम' अभियान शुरू कर देशभर से सोना और अन्य कीमती वस्तुएं एकत्र करनी शुरू कर दीं।

गोविंदानंद सरस्वती का दावा है कि उनके गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने राम मंदिर निर्माण के लिए करोड़ों रुपये, सोना और चांदी एकत्र किए थे, जिन्हें बाद में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपा जाना था। उनका आरोप है कि 2022 में स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद यह सोना, चांदी और अन्य कीमती वस्तुएं श्रीविद्या मठ में रख दी गईं। लेकिन यह सब गायब हो गई। अविमुक्तेश्वरानंद ने इसका गबन कर लिया। गोविंदानंद ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि राम नाम पर पहली चोरी  अविमुक्तेश्वरानंद ने की है।

उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए एसआईटी को पत्र भी भेजा गया है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि एक हजार से अधिक गांवों से सोना एकत्र किया गया और वाराणसी में दानकर्ताओं को पहले से तय दुकानों से सोना खरीदने के लिए कहा जाता था।

आरोपों पर क्या बोले अविमुक्तेश्वरानंद

इन आरोपों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं, वे पहले उसके प्रमाण प्रस्तुत करें। उनका कहना है कि उन्होंने कोई चंदा एकत्र नहीं किया और उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं।

हालांकि, उनके द्वारा घोषित 'स्वर्ण संग्रह सपर्या' अभियान और उस दौरान की गई सार्वजनिक घोषणाओं का हवाला देते हुए कई संत सवाल उठा रहे हैं कि यदि अभियान चलाया गया था तो उसके तहत जुटाए गए सोने और दान का पूरा हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया। इसी को लेकर अब जांच की मांग तेज हो गई है।

Published By:
 Priyanka Yadav
पब्लिश्ड