अपडेटेड 15 December 2025 at 14:47 IST

पतंजलि के जैव उर्वरक- मिट्टी, फसल और पर्यावरण का संरक्षण

जैव उर्वरक ऐसे प्राकृतिक उत्पाद होते हैं जिनमें लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं। ये सूक्ष्मजीव मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाकर पौधों की वृद्धि में सहायता करते हैं।

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Patanjali | Image: Republic

Patanjali: पिछले कुछ दशकों में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से कृषि और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट, जल प्रदूषण और फसल उत्पादन में असंतुलन जैसी समस्याएँ सामने आई हैं। 

इन चुनौतियों के समाधान के रूप में जैव उर्वरक एक प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में उभरे हैं। इस क्षेत्र में पतंजलि ने प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए उल्लेखनीय कार्य किया है।

जैव उर्वरक क्या हैं?

जैव उर्वरक ऐसे प्राकृतिक उत्पाद होते हैं जिनमें लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं। ये सूक्ष्मजीव मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाकर पौधों की वृद्धि में सहायता करते हैं। रासायनिक उर्वरकों के विपरीत, जैव उर्वरक मिट्टी के जैविक संतुलन को बनाए रखते हैं।

पतंजलि के जैव उर्वरक नाइट्रोजन स्थिरीकरण, फास्फोरस घुलनशीलता और जैविक पदार्थों के अपघटन में सहायक सूक्ष्मजीवों पर आधारित होते हैं।

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पतंजलि का दृष्टिकोण

पतंजलि मिट्टी को एक जीवंत तंत्र मानता है। स्वस्थ मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव पौधों के पोषण और दीर्घकालिक उत्पादकता के लिए आवश्यक होते हैं। जैव उर्वरकों के माध्यम से पतंजलि मिट्टी के प्राकृतिक जीवन को पुनर्जीवित करने का कार्य कर रहा है।

पतंजलि जैव उर्वरकों के लाभ

पतंजलि के जैव उर्वरक मिट्टी की संरचना और उर्वरता में सुधार करते हैं। ये जड़ों के विकास को प्रोत्साहित करते हैं और पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाते हैं।

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इसके साथ ही, ये उर्वरक किसानों की लागत को कम करते हैं, क्योंकि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटती है। फसलों की गुणवत्ता और पोषण स्तर में भी सुधार देखा जाता है।

पर्यावरण संरक्षण में योगदान

जैव उर्वरकों के उपयोग से जल स्रोतों में रासायनिक अपशिष्ट का प्रवाह कम होता है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी आती है। ये उत्पाद मिट्टी में कार्बन संचयन को बढ़ावा देते हैं और जैव विविधता को संरक्षित रखते हैं।

किसानों के लिए प्रशिक्षण और मार्गदर्शन

पतंजलि किसानों को जैव उर्वरकों के सही उपयोग के लिए प्रशिक्षित करता है। प्रशिक्षण शिविरों, प्रदर्शन खेतों और तकनीकी सहायता के माध्यम से किसानों को इन उत्पादों को अपनाने में सहयोग प्रदान किया जाता है।

सतत कृषि की ओर एक ठोस कदम

पतंजलि के जैव उर्वरक केवल कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि सतत और पुनर्योजी खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ये मिट्टी की सेहत, फसल की उत्पादकता और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखते हुए किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहे हैं।

Published By : Priyanka Yadav

पब्लिश्ड 15 December 2025 at 14:47 IST