अपडेटेड 21 February 2026 at 18:09 IST

कोलेस्ट्रॉल, लिवर रोग और मधुमेह: योग और आयुर्वेद के समन्वित प्रबंधन की दिशा

उच्च कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस, मधुमेह और अन्य मेटाबॉलिक विकार आज विश्वभर में तेजी से बढ़ रहे हैं। अनियमित जीवनशैली, तनाव, असंतुलित आहार और शारीरिक निष्क्रियता इन रोगों के प्रमुख कारण हैं।

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Obesity Liver Disease and Diabetes Towards Integrated Management with Yoga and Ayurveda
कोलेस्ट्रॉल, लिवर रोग और मधुमेह: योग और आयुर्वेद के समन्वित प्रबंधन की दिशा | Image: Social Media

उच्च कोलेस्ट्रॉल, फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस, मधुमेह और अन्य मेटाबॉलिक विकार आज विश्वभर में तेजी से बढ़ रहे हैं। अनियमित जीवनशैली, तनाव, असंतुलित आहार और शारीरिक निष्क्रियता इन रोगों के प्रमुख कारण हैं। इस विस्तृत चर्चा में स्वामी रामदेव बताते हैं कि योग, प्राणायाम, सात्विक आहार और आयुर्वेदिक सिद्धांत किस प्रकार आधुनिक चिकित्सा के साथ समन्वय करते हुए इन रोगों के प्रबंधन में सहायक हो सकते हैं। पतंजलि का समग्र स्वास्थ्य दर्शन रोकथाम, अनुशासन और दीर्घकालिक संतुलन पर आधारित है।

स्वामी रामदेव के अनुसार अधिकांश जीवनशैली संबंधी रोग धीरे-धीरे विकसित होते हैं। शुरुआत में इनके लक्षण स्पष्ट नहीं होते, परंतु वर्षों तक गलत खान-पान और तनाव के कारण शरीर की आंतरिक प्रणाली प्रभावित होने लगती है। उच्च कोलेस्ट्रॉल धमनियों में वसा जमाव का कारण बन सकता है, जिससे हृदय रोग का खतरा बढ़ता है। इसी प्रकार फैटी लिवर और लिवर सिरोसिस गंभीर जटिलताओं का रूप ले सकते हैं यदि समय पर ध्यान न दिया जाए।

चर्चा में स्वामी रामदेव विशेष रूप से प्राणायाम की भूमिका पर प्रकाश डालते हैं। कपालभाति को पाचन तंत्र और चयापचय को सक्रिय करने वाला अभ्यास बताया गया है। नियमित अभ्यास से पेट के अंगों में रक्त संचार बढ़ता है और विषाक्त तत्वों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को समर्थन मिलता है। अनुलोम-विलोम नाड़ी शोधन की प्रक्रिया है, जो मानसिक तनाव कम करने और हार्मोन संतुलन बनाए रखने में सहायक मानी जाती है।

मधुमेह के संदर्भ में स्वामी रामदेव बताते हैं कि यह केवल शर्करा की समस्या नहीं, बल्कि जीवनशैली का परिणाम है। नियमित योगाभ्यास इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। साथ ही वे यह स्पष्ट करते हैं कि किसी भी रोगी को अपनी निर्धारित दवाएँ बिना चिकित्सकीय सलाह के बंद नहीं करनी चाहिए। पतंजलि का दृष्टिकोण आधुनिक चिकित्सा के विरोध में नहीं, बल्कि उसके पूरक रूप में है।

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आहार को उपचार का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। सात्विक भोजन — जिसमें ताजे फल, हरी सब्जियाँ, साबुत अनाज और कम तेल वाला भोजन शामिल हो — शरीर पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। अत्यधिक तला-भुना भोजन, रिफाइंड शर्करा और प्रोसेस्ड फूड से बचने की सलाह दी जाती है। स्वामी रामदेव के अनुसार भोजन केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि शरीर की ऊर्जा और संतुलन के लिए होना चाहिए।

लिवर स्वास्थ्य के संदर्भ में योगासन जैसे भुजंगासन, धनुरासन और मण्डूकासन को सहायक बताया गया है, क्योंकि ये पेट के क्षेत्र में रक्त प्रवाह को सक्रिय करते हैं। हालांकि, गंभीर अवस्था में विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श अनिवार्य है। आयुर्वेदिक औषधियों के उपयोग से पहले भी योग्य विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक बताया गया है।

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तनाव प्रबंधन भी इस चर्चा का महत्वपूर्ण भाग है। लगातार मानसिक दबाव हार्मोन असंतुलन का कारण बन सकता है, जिससे कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा स्तर प्रभावित होते हैं। ध्यान और श्वास अभ्यास मानसिक शांति प्रदान करते हैं, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।

पतंजलि के समग्र मॉडल में नियमित दिनचर्या, पर्याप्त नींद, शारीरिक सक्रियता और सकारात्मक सोच को समान महत्व दिया जाता है। स्वामी रामदेव बताते हैं कि रोग प्रबंधन एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसमें धैर्य और अनुशासन दोनों आवश्यक हैं। त्वरित परिणाम की अपेक्षा के बजाय निरंतर सुधार पर ध्यान देना चाहिए।

निष्कर्ष

कोलेस्ट्रॉल, लिवर रोग और मधुमेह जैसे विकारों का प्रबंधन बहुआयामी दृष्टिकोण की मांग करता है। स्वामी रामदेव के अनुसार योग, प्राणायाम और संतुलित आहार आधुनिक चिकित्सा के साथ मिलकर बेहतर परिणाम दे सकते हैं। पतंजलि का संदेश स्पष्ट है — रोकथाम, अनुशासन और जागरूकता ही स्थायी स्वास्थ्य की कुंजी हैं। समग्र दृष्टिकोण अपनाकर व्यक्ति न केवल रोग प्रबंधन कर सकता है, बल्कि दीर्घकालिक जीवन शक्ति भी प्राप्त कर सकता है।

Published By : Sahitya Maurya

पब्लिश्ड 21 February 2026 at 18:01 IST