अपडेटेड 15 January 2026 at 16:16 IST

भारत में मर्चेंट फ्रॉड का बदलता चेहरा: हर बिजनेस के लिए क्या जानना जरूरी है

भारत में डिजिटल पेमेंट के बढ़ते चलन के साथ मर्चेंट फ्रॉड के मामले भी तेज़ी से सामने आ रहे हैं। खासतौर पर छोटे और मध्यम व्यवसाय (SMBs) इन स्कैम्स के सबसे आसान शिकार बन रहे हैं। UPI और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बीच धोखेबाज लगातार नए-नए तरीके अपनाकर मर्चेंट्स को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ऐसे में फ्रॉड के प्रकारों को समझना और उनसे बचाव के उपाय जानना बेहद जरूरी हो गया है।

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भारत में डिजिटल पेमेंट
भारत में डिजिटल पेमेंट | Image: डिजिटल पेमेंट

भारत में पिछले कुछ वर्षों में मर्चेंट फ्रॉड के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स बताती हैं कि छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMBs) को निशाना बनाने वाले डिजिटल पेमेंट स्कैम्स में तेज़ उछाल आया है। जैसे-जैसे UPI ट्रांजैक्शन नए रिकॉर्ड बना रहे हैं, धोखेबाज भी ऑनलाइन मार्केटप्लेस, सर्विस आउटलेट्स और रिटेल स्टोर्स पर मासूम मर्चेंट्स को ठगने के नए-नए तरीके निकाल रहे हैं। भारतीय छोटे और मध्यम व्यवसायों (SMBs) के लिए यह खतरा काफी अधिक है। फ्रॉड ट्रांजैक्शन का सिर्फ एक मामला न केवल ग्राहकों का भरोसा तोड़ सकता है, बल्कि वित्तीय नुकसान और कामकाज में रुकावट का कारण भी बन सकता है। इसके अलावा, मर्चेंट्स को चार्जबैक और अकाउंट फ्रीज होने जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। आइए इस आर्टिकल के माध्यम से जानते हैं कि भारत में आमतौर पर होने वाले मर्चेंट फ्रॉड के अलग-अलग प्रकार कौन से हैं और मर्चेंट्स इनसे स्वयं को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं। अपने बिजनेस को सुरक्षित बनाने की दिशा में यह आपका पहला कदम होगा।

1. UPI और QR कोड स्कैम्स:

भारत में छोटे व्यवसायों को निशाना बनाने के सबसे आम तरीकों में से एक है QR कोड स्कैम। धोखेबाज़ फ़र्ज़ी कॉल (विशिंग), असली QR कोड के ऊपर नकली QR स्टिकर चिपकाना या WhatsApp, SMS या ईमेल के माध्यम से फर्जी कोड भेजने जैसे तरीके अपनाते हैं। कई बार वे पेमेंट के फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर भी मर्चेंट्स को ठगते हैं। ये स्कैम अक्सर पीक ऑवर्स के दौरान होते हैं, जब दुकान पर काफी भीड़ होती है, ताकि मर्चेंट बिना पेमेंट चेक किए सामान दे दे। इस तरह के स्कैम के मुख्य संकेतों में पेमेंट को “वेरिफाई करने” या “रिवर्स करने” के अनुरोध, स्क्रीनशॉट पर भरोसा करना या मर्चेंट के ऑफिशियल स्टैंड से स्कैन करने के बजाय डिजिटल रूप से मिले QR कोड शामिल हैं।

खास टिप: मर्चेंट्स को हमेशा बैंक या पेमेंट ऐप में ट्रांजैक्शन को वेरिफाई करना चाहिए और सामान देने से पहले ऑफिशियल कन्फर्मेशन मैसेज का इंतजार करना चाहिए।

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2. नकली ऑर्डर, फ्रेंडली फ्रॉड और चार्जबैक:

जैसे-जैसे भारत में ई-कॉमर्स बढ़ रहा है, ये फ्रॉड ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के मर्चेंट्स को तेज़ी से प्रभावित कर रहे हैं। इसमें कस्टमर सामान मिलने के बाद जानबूझकर पेमेंट पर विवाद खड़ा कर देते हैं, जिसे फ्रेंडली फ्रॉड कहा जाता है। कई बार संगठित गिरोह भी बड़े पैमाने पर फर्जी ऑर्डर देकर मर्चेंट्स को निशाना बनाते हैं। ऐसे मामलों में मर्चेंट्स को न केवल अपने सामान का नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि रिफंड का खर्च और चार्जबैक फीस भी भरनी पड़ती है। साथ ही, पेमेंट गेटवे की ओर से पेनल्टी या कड़ी जांच का जोखिम भी बना रहता है।

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खास टिप: स्पष्ट रिफड पॉलिसी और मजबूत डॉक्यूमेंटेशन पारदर्शिता बढ़ाते हैं और फर्जी क्लेम व पेमेंट विवादों के खिलाफ मर्चेंट्स के पक्ष को मजबूती देते हैं।

3. पहचान और KYC फ्रॉड:

डिजिटल ट्रांजैक्शन बढ़ने के साथ पहचान और KYC का दुरुपयोग मर्चेंट फ्रॉड की एक बड़ी कैटेगरी बन गया है। इसमें धोखेबाज जाली दस्तावेजों या चोरी किए गए बिजनेस क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर नकली मर्चेंट अकाउंट बना लेते हैं। ये अकाउंट असली जैसे दिखते हैं, जिससे अनधिकृत निकासी और नकली रिफंड जैसे और भी फ्रॉड हो सकते हैं। पहचान के इस दुरुपयोग से असली बिजनेस को कानूनी परेशानियों, कामकाज में रुकावट और साख को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

खास टिप: मर्चेंट ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया में फिज़िकल वेरिफिकेशन, ओनर वेरिफ़िकेशन, डेटा डीडुप्लीकेशन चेक और सुरक्षित डिजिटल सिग्नेचर जैसे मानकों को अपनाना जरूरी है।

4. आधार कार्ड फ्रॉड:

डिजिटल आइडेंटिटी सिस्टम पर बढ़ती निर्भरता के साथ धोखेबाज फर्जी वेबसाइटों, विशिंग कॉल, फिशिंग लिंक और सिम-स्वैप अटैक के ज़रिए आधार से जुड़ी संवेदनशील जानकारी चुरा रहे हैं। एक बार जानकारी चोरी होने के बाद हमलावर अनधिकृत ट्रांजैक्शन, फर्जी बैंक अकाउंट खोलने या मनी लॉन्ड्रिंग के लिए शेल संस्थाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह मर्चेंट्स के लिए वित्तीय नुकसान के साथ-साथ गंभीर नियामक और कानूनी जोखिम भी पैदा करता है।

खास टिप: API आधारित KYC, आधिकारिक चैनलों से आइडेंटिटी वेरिफ़िकेशन और लाइव फोटो चेक आधार फ्रॉड के खिलाफ मजबूत सुरक्षा प्रदान करते हैं।

5. इनवॉइस स्कैम:

छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए इनवॉइस में हेराफेरी एक बड़ा खतरा बनती जा रही है। इसमें धोखेबाज भरोसेमंद वेंडर या कंपनी एग्जीक्यूटिव बनकर नकली इनवॉइस भेजते हैं या बैंक डिटेल्स अपडेट होने का दावा करते हैं। कुछ मामलों में ईमेल को बीच में इंटरसेप्ट कर पेमेंट निर्देश बदल दिए जाते हैं। इसके अलावा, अंदरूनी स्तर पर भी यह खतरा हो सकता है, जहां इनवॉइस एक्सेस रखने वाले कर्मचारी निजी लाभ के लिए हेरफेर करते हैं।

खास टिप: वेंडर से सीधे कन्फर्मेशन, सुरक्षित चैनल और ऑटोमेटेड रिकॉन्सिलिएशन टूल इनवॉइस फ्रॉड के जोखिम को कम करते हैं।

6. फिशिंग, स्मिशिंग और मैलवेयर अटैक:

ये सबसे आम ऑनलाइन खतरे हैं, जिनमें धोखेबाज बैंक या पेमेंट प्लेटफॉर्म बनकर नकली ईमेल, मैसेज या अलर्ट भेजते हैं। इनका मकसद UPI पिन, लॉग-इन डिटेल्स या डिवाइस एक्सेस चुराना होता है। ऐसे मैसेज अक्सर KYC अपडेट या रिवॉर्ड नोटिफिकेशन के नाम पर भेजे जाते हैं। लिंक पर क्लिक करने से मैलवेयर डिवाइस में चला जाता है और जरूरी बिजनेस जानकारी तक पहुंच बना लेता है।

खास टिप: अनजान मैसेज से सावधान रहें और कभी भी UPI पिन, OTP या CVV शेयर न करें।

PhonePe जैसे पेमेंट प्लेटफॉर्म कभी भी कॉल या मैसेज के जरिए गोपनीय जानकारी नहीं मांगते और मर्चेंट्स को इन-ऐप सिक्योरिटी अलर्ट के जरिए जागरूक करते हैं।

Published By : Kirti Soni

पब्लिश्ड 15 January 2026 at 16:13 IST