अपडेटेड 7 January 2026 at 15:48 IST

क्लासरूम के बाहर की सीख: एक्सएलआरआई के ग्रामीण इमर्शन कार्यक्रम से मिले चंद अनुभव

प्रबंधन शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य क्या है? क्या इसका उद्देश्य केवल एमबीए डिग्री और प्रबंधन से जुड़े प्रमाणपत्र प्रदान करना भर है? या इसका कोई और या बड़ा सामाजिक उद्देश्य भी है?

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xlri rural immersion program
xlri rural immersion program | Image: Republic

प्रबंधन शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य क्या है?


क्या इसका उद्देश्य केवल एमबीए डिग्री और प्रबंधन से जुड़े प्रमाणपत्र प्रदान करना भर है? या इसका कोई और या बड़ा सामाजिक उद्देश्य भी है? ये प्रश्न सौ साल पहले औपचारिक प्रबंधन शिक्षा की शुरुआत के समय से ही चर्चा का विषय रहे हैं। आज भी इनका कोई एक सर्वमान्य उत्तर नहीं है।

यदि आज के समय में किसी एआई टूल से यह प्रश्न पूछा जाए, तो उत्तर मिलेगा कि प्रबंधन शिक्षा का उद्देश्य प्रबंधन के सिद्धांतों का ज्ञान देना और कुछ प्रमुख कौशल (स्किल्स) विकसित करना है। ये उत्तर गलत नहीं है पर ये पूर्ण भी नहीं है। वास्तविक उद्देश्य इससे कहीं अधिक व्यापक होना चाहिए—जिसमें इंसान के सोच के दायरे का विस्तार, निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर करना निखार और अंततः व्यक्तित्व का ऐसा निखार शामिल हो, जिससे न केवल व्यक्ति स्वयं लाभान्वित हो, बल्कि समाज, देश और दुनिया को भी लाभ मिले।

इन उद्देश्यों को प्राप्त करने का कोई एकमात्र तरीका नहीं है। “सार्वजनिक हित और सतत भविष्य के लिए जिम्मेदार वैश्विक नेतृत्व” विकसित करने की अपनी दृष्टि से प्रेरित होकर, भारत के सबसे पुराने प्रबंधन संस्थान एक्सएलआरआई जमशेदपुर ने प्रबंधन शिक्षा में ग्रामीण इमर्शन को एक अनिवार्य हिस्से के रूप में अपनाया है। पिछले दो दशकों से अधिक समय से, संस्थान के एक वर्षीय और दो वर्षीय एमबीए कार्यक्रमों के प्रत्येक छात्र के लिए ग्रामीण इमर्शन कार्यक्रम अनिवार्य है।

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2005 में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के स्वरूप और समय-सारणी में समय के साथ कई छोटे मोटे बदलाव हुए हैं, लेकिन इसका मूल स्वरुप आज भी वही है—हर वर्ष छात्रों को जमशेदपुर के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में तीन दिन और दो रात का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करना।

वर्तमान स्वरूप में, एक्सएलआरआई यह कार्यक्रम टाटा स्टील फाउंडेशन (TSF) के सहयोग से संचालित करता है। हर वर्ष मध्य जून से मध्य अगस्त के बीच, बिजनेस मैनेजमेंट (BM), ह्यूमन रिसोर्सेज मैनेजमेंट (HRM) और जनरल मैनेजमेंट प्रोग्राम (GMP) के 500 से अधिक छात्रों को लगभग 60-60 के समूहों में झारखंड के पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों के विभिन्न गांवों में तीन दिन और दो रात के लिए भेजा जाता है।

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प्रत्येक बैच के प्रस्थान से पहले एक्सएलआरआई के शिक्षकों और TSF के समन्वयकों द्वारा विस्तृत ब्रीफिंग सत्र आयोजित किए जाते हैं। छात्र शुक्रवार सुबह संस्थान से रवाना होकर दोपहर तक अपने मेजबान परिवारों के घर पहुंचते हैं। छह-छह छात्रों के समूह बनाकर उन्हें अलग-अलग गांवों और घरों में ठहराया जाता है। छात्रों से अपेक्षा की जाती है कि वे उस स्थान को अपना घर, और मेजबान परिवार को अपना परिवार मानें। वे वहां मेहमान की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह रहते हैं और खाना बनाने से लेकर सफाई जैसे दैनिक कार्यों में सहयोग करते हैं। साथ ही, उन्हें एक व्यक्तिगत और एक समूह असाइनमेंट भी पूरा करना होता है। इन तीन दिनों के दौरान एक्सएलआरआई से भी कई शिक्षक और कर्मचारी विद्यार्थीओं का मनोबल बढ़ाने गांवों का दौरा करते हैं।

एक्सएलआरआई के अधिकांश छात्र शहरी पृष्ठभूमि से आते हैं, और उनके लिए यह पहला ग्रामीण अनुभव होता है। उन्होंने भले ही पढ़ा हो कि भारत गांवों में बसता है, लेकिन प्रत्यक्ष अनुभव का अवसर बहुत कमों को मिला होता है। यह अनुभव उनके लिए कई पुराने धारणाओं को तोड़ने और स्वयं व ग्रामीण समाज को नए दृष्टिकोण से समझने का माध्यम बनता है। एक्सएलआरआई की भौगोलिक स्थिति के कारण कई गांव आदिवासी बहुल हैं, जिससे छात्रों को आदिवासी जीवनशैली की समानताओं, समस्याओं और विशिष्टताओं को नजदीक से समझने का भी अवसर मिलता है।

हालांकि, कुछ छात्रों के लिए यह अनुभव कभी कभी चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है—कभी जीवनशैली के अंतर के कारण, तो कभी गर्मी और मानसून के मौसम की कठिनाइयों के कारण या कभी किसी अन्य कारणों से—लेकिन अधिकांश छात्रों के लिए यह अनुभव अविस्मरणीय और जीवन-परिवर्तनकारी सिद्ध होता है। व्यक्तिगत स्तर पर, सहानुभूति का विकास, सामुदायिक भावना की गहरी समझ, भौतिक सुख सुविधाओं, संतोष और प्रसन्नता के बीच के संबंध को नए सिरे से देखना, विषमताओं और चुनोतियों के बावजूद बड़े सपने देखने की प्रेरणा और जीवन को देखने का नया दृष्टिकोण आदि—ये ऐसे अनुभव हैं जो जीवन के लिए अंत्यंत महत्वपूर्ण हैं और जिन्हें कक्षा में आसानी से पढ़ाया नहीं जा सकता।

अपने प्रवास के दौरान छात्र प्राथमिक विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, सार्वजनिक वितरण प्रणाली की राशन दुकानों, और ग्रामीण हाटों आदि का दौरा करते हैं और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों, ग्राम प्रमुखों (मुंडा-मानकी—पारंपरिक शासन प्रणाली), स्कूल प्रशासकों आदि से संवाद करते हैं। यह अनुभव उन्हें अर्थशास्त्र, विपणन, आपूर्ति श्रृंखला, संगठनात्मक व्यवहार, डिजिटल तकनीक, वित्तीय समावेशन और सतत विकास जैसे विषयों को व्यावहारिक रूप से समझने में मदद करता है। यह समझ आगे चलकर कक्षा की चर्चाओं, केस स्टडी, प्रतियोगिताओं, साक्षात्कारों आदि में भी सहायक होती है।

कोविड-19 के कारण दो वर्षों के अंतराल के बाद 2022 में जब ग्रामीण इमर्शन कार्यक्रम को नए स्वरूप में टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से पुनः शुरू किया गया, तब छात्रों की अपेक्षाएं सीमित थीं। लेकिन बाद के वर्षों में छात्रों ने ग्रामीण समुदायों पर इस कार्यक्रम के प्रभाव को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। इन प्रश्नों के परिणामस्वरूप कार्यक्रम के कुछ पहलुओं में निरंतर सुधार किए गए और 2024 से नवंबर-दिसंबर में एक समापन कार्यक्रम की शुरुआत की गई।

इस समापन कार्यक्रम में, सम्मान और कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में, उन ग्रामीण परिवारों को एक्सएलआरआई आमंत्रित किया जाता है जिन्होंने छात्रों को अपने घरों में स्थान दिया था। हाल के वर्षों में यह देखना अत्यंत प्रेरणादायक रहा है कि कई छात्रों और परिवारों के बीच गहरा संबंध विकसित हुआ है और ग्रामीण परिवारों में अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर नई चेतना जागृत हुई है—जो प्रबंधन शिक्षा के वास्तविक उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और जो हमें निरंतर आशान्वित और प्रेरित करता है ।

Published By : Sakshi Bansal

पब्लिश्ड 7 January 2026 at 15:48 IST