कीर्ति मंदिर: वृन्दावन के पास मुझे मिला राधा रानी का एक अनोखा मंदिर

कीर्ति मंदिर के गर्भ गृह की पहली झलक मिलते ही मैं प्रफुल्ल्ति हो उठा। क्या सुन्दर छवि थी!

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Kirti Mandir
Kirti Mandir | Image: Kirti Mandir

Kirti Mandir: वैसे तो मैं पूरे भारत के तीर्थों, मंदिरों और पौराणिक स्थलों पर घूमा हूं पर जो मन की शांति मुझे वृन्दावन आकर मिलती है, वो और कहीं नहीं। इसीलिए मैं महीने में एक बार वृन्दावन का चक्कर जरूर लगा लेता हूं। जब भी भक्त और भगवान की इस नगरी में आना होता है, तो तीन ऐसे मंदिर हैं जहां मैं जरूर जाता हूं। एक बांके बिहारी मंदिर, दूसरा प्रेम मंदिर और तीसरा राधा रमण मंदिर।

कुछ महीनों से इस लिस्ट में एक नाम और जुड़ गया है और वो है श्री बरसाना धाम का श्रीजी मंदिर। अभी कुछ दिनों पहले मैं श्रीजी मंदिर के दर्शन करके निकला ही था जब मुझे बरसाना के कीर्ति मंदिर के बारे में पता चला। मैंने पढ़ रखा था कि राधा रानी की माता का नाम कीर्ति मैया और पिता का नाम राजा वृषभानु था। मन में एक उत्कंठा सी जागी - श्री राधा के तो कई मंदिरों के बारे में मैंने सुना था और वहाँ जाकर माथा टेका था, पर राधा रानी की माता के मंदिर के बारे में मैं पहली बार सुन रहा था।

बरसाना की विशेष अनुभूति

शाम का समय हो चला था। अपनी गाड़ी दिल्ली की ओर मोड़ने का ख्याल आया, अगली सुबह ऑफिस में हाजिरी जो देनी थी। फिर लगा चलो दो घंटे और सही। वैसे भी बरसाना में मैं एक विशेष सुख की अनुभूति कर रहा था। वृन्दावन का तो अपना सौरस्य है ही पर शहर में, खास तौर से शनिवार-रविवार और छुट्टियों के समय वहां की भीड़ से मन कभी-कभी थोड़ा विचलित सा हो उठता है। इसके इतर, यहां बरसाना में खेत खलिहानों के बीच, कम आबादी वाली जगह पे मेरा मन एक खास ठहराव महसूस कर रह था। संभव है यह श्री राधा की ही कृपा हो जिन्हें हमारे धर्म ग्रंथों में चितचोर नटवर नागर श्री कृष्ण की भी स्वामिनी कहा गया है।

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शाम के लगभग 5 बज रहे थे जब मेरी कार कीर्ति मंदिर पहुंची। सूरज देवता दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद अपने घर को लौट रहे थे। मंद-मंद पवन बह रही थी। हर ओर से राधे-राधे की मधुर ध्वनि कानों में जा रही थी। मंदिर के प्रवेश द्वार पर पहुंचते ही 'श्री राधे बरसाने वारी' कीर्तन सुनाई दिया जिससे मन में दर्शन की व्याकुलता और तीव्र हो उठी।

बाल रूप में राधा रानी के अद्भुत दर्शन

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कीर्ति मंदिर के गर्भ गृह की पहली झलक मिलते ही मैं प्रफुल्ल्ति हो उठा। क्या सुन्दर छवि थी! लगभग 5 वर्ष की अवस्था की नन्हीं सी श्री राधा अपनी माता कीर्ति मैया की गोद में विराजमान होकर मुझे दर्शन दे रही थीं। अहा! क्या चित्ताकर्षक दृश्य था - मनभावन मुखमंडल पर छोटा सा स्वर्ण का मुकुट, जिस पर चन्द्रिका सुशोभित थी, तिस पर गुलाबी रंग की ओढ़नी, लाल अधर, मृदु मुस्कान। बाल रूप में श्री राधा अपने भक्तों को नन्हे अरुण चरणों के दर्शन का भी सुख प्रदान कर रही थीं, मानो पीपल की गहरे लाल रंग की कोमल कोपल अभी फूटी हो।

उनके एक ओर श्री राधा-कृष्ण की मनोहर छवि थी, और दूसरी ओर श्री सीता-राम का मर्यादा पुरुषोत्तम स्वरूप। मैं श्री राधा के बाल स्वरूप के सामने कुछ देर के लिए बैठ गया। मन ने मुझे टोका, कहा चलो भाई, कल ऑफिस नहीं जाना क्या। मैंने मन की मनुहार को अनसुना कर दिया।

कुछ देर बाद मंदिर में श्री राधा रानी की सायंकालीन आरती प्रारम्भ हो गयी, जिसके शुरूआती बोल थे - 

"आरती भानुदुलारी की, कि श्री बरसाने वारी की।

 विराजै सिंहासन श्यामा, दिव्य श्री वृन्दावन धामा। 

ढुरावैं चँवर सुघर बामा, पलोटैं पग पूरन कामा।" 

पता ही नहीं चला कब आंखों से एक-दो आंसू अनायास ही निकलकर जमीन पर जा गिरे।

फिर श्री राधा-कृष्ण, श्री सीता-राम, और मंदिर के संथापक, पांचवें मूल जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज की आरती हुई।

कीर्ति मंदिर की खास बातें

कुछ देर बाद मैं मंदिर के मंडप से निकलकर मंदिर परिसर में आ गया जहां मैं चारों ओर लगी श्री राधा-कृष्ण की सरस झांकियों को 10 मिनट तक निहारता रहा। परिसर में लगा हुआ एक बोर्ड पढ़कर पता चला कि इस मंदिर का शिलान्यास जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज द्वारा 2006 में हुआ था जबकि इसका उद्घाटन बसंत पंचमी 2019 को संपन्न हुआ। इटेलियन मार्बल से बनकर तैयार हुए इस मंदिर के गुंबद में 22 स्वर्ण कलश लगाए गए हैं। आपको बताता चलूं कि यह कीर्ति मंदिर विश्व का इकलौता मंदिर हैं जहां राधा रानी अपने बाल स्वरूप में अपनी माता कीर्ती मैया की गोद में आसीन हैं।

कुछ और देर मंदिर में घूमने के बाद मैं इस पवित्र भूमि को प्रणाम करके अपनी गाड़ी की तरफ चल दिया। जब मैं मंदिर से बाहर आया तो अंधेरा हो चुका था, पर मन में एक तीव्र उजाला साफ महसूस हो रह था। अब हर महीने होने वाले मेरे वृन्दावन दर्शन के कार्यक्रम में श्री बरसाना धाम का कीर्ति मंदिर भी स्थायी रूप से जुड़ चुका था।

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Published By:
 Deepak Gupta
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