अपडेटेड 18 February 2026 at 19:12 IST
क्रिएटिनिन 5.8 से 0.8 तक: योग, निरामयम् और समग्र स्वास्थ्य का मार्ग
Swami Ramdev: क्रिएटिनिन स्तर में उल्लेखनीय सुधार की यह कहानी केवल एक उदाहरण है। स्वामी रामदेव के अनुसार निरामयम् का मार्ग संतुलित जीवनशैली, योग, प्राणायाम और चिकित्सकीय मार्गदर्शन के समन्वय से प्रशस्त होता है।
- इनिशिएटिव
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Swami Ramdev: किडनी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ आज तेजी से बढ़ रही हैं। इस संदर्भ में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सर्वेंद्र के अनुभव को साझा करते हुए स्वामी रामदेव बताते हैं कि किस प्रकार क्रिएटिनिन स्तर 5.8 से घटकर 0.8 तक लाया गया। यह केवल एक चिकित्सीय घटना नहीं बल्कि “निरामयम्” की अवधारणा का उदाहरण है, जिसे पतंजलि के समग्र स्वास्थ्य दर्शन में प्रमुख स्थान दिया गया है। यह चर्चा योग, अनुशासित जीवनशैली और आयुर्वेद के संतुलित प्रयोग की ओर संकेत करती है।
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क्रिएटिनिन का बढ़ा हुआ स्तर सामान्यतः किडनी की कार्यक्षमता में कमी का संकेत देता है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति में ऐसे मामलों में नियमित दवाइयाँ और कभी-कभी डायलिसिस तक की आवश्यकता पड़ती है। स्वामी रामदेव इस चर्चा में स्पष्ट करते हैं कि गंभीर स्वास्थ्य स्थिति में चिकित्सकीय निगरानी अनिवार्य है, परंतु साथ ही जीवनशैली में परिवर्तन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
डॉ. सर्वेंद्र के अनुभव के माध्यम से यह बताया गया कि नियमित प्राणायाम, विशेषकर कपालभाति और अनुलोम-विलोम, शरीर के आंतरिक अंगों को सक्रिय करते हैं। प्राणायाम से रक्त संचार में सुधार होता है और ऑक्सीजन की आपूर्ति बेहतर होती है। स्वामी रामदेव का मत है कि जब शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन और संतुलित पोषण मिलता है, तो उसकी स्वाभाविक पुनरुद्धार क्षमता मजबूत होती है।
'निरामयम्' का अर्थ है- रोग से मुक्त स्थिति। पतंजलि के स्वास्थ्य मॉडल में निरामयम् केवल दवा से नहीं, बल्कि समग्र संतुलन से प्राप्त होता है। इसमें आहार, व्यवहार, विचार और अभ्यास चारों का महत्व है। सात्विक भोजन, पर्याप्त जल सेवन और नियमित योगाभ्यास शरीर की विषाक्तता कम करने में सहायक माने जाते हैं।
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चर्चा में यह भी बताया गया कि आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ सहायक भूमिका निभा सकती हैं, परंतु इन्हें विशेषज्ञ की सलाह से ही लेना चाहिए। स्वामी रामदेव बार-बार यह स्पष्ट करते हैं कि किसी भी गंभीर रोग में स्व-चिकित्सा से बचना चाहिए।
इस अनुभव का मूल संदेश यह है कि अनुशासित दिनचर्या, सकारात्मक मानसिकता और निरंतर अभ्यास से शरीर में सुधार संभव है। पतंजलि का समग्र दृष्टिकोण आधुनिक चिकित्सा के साथ समन्वय पर आधारित है, विरोध पर नहीं।
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निष्कर्ष
क्रिएटिनिन स्तर में उल्लेखनीय सुधार की यह कहानी केवल एक उदाहरण है। स्वामी रामदेव के अनुसार निरामयम् का मार्ग संतुलित जीवनशैली, योग, प्राणायाम और चिकित्सकीय मार्गदर्शन के समन्वय से प्रशस्त होता है। पतंजलि का दर्शन हमें याद दिलाता है कि स्वास्थ्य एक निरंतर साधना है, जो अनुशासन और जागरूकता से संभव होती है।
Published By : Shashank Kumar
पब्लिश्ड 18 February 2026 at 19:12 IST