कसमंडी किला विवादः 31 जिलों में जनजागरण यात्रा निकालेगी लाखन आर्मी, 9 जून से शुरू होगी यात्रा

मलिहाबाद के चर्चित कसमंडी किले विवाद को लेकर अब सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो चुकी है। लाखन आर्मी ने राजपासी राजा कंसा के ऐतिहासिक किले और भगवान शिव मंदिर की मुक्ति के मुद्दे को प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप देने का ऐलान किया है।

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Kasamandi Fort Dispute
कसमंडी किला विवादः 31 जिलों में जनजागरण यात्रा निकालेगी लाखन आर्मी, 9 जून से शुरू होगी यात्रा | Image: Social media

मलिहाबाद के चर्चित कसमंडी किले विवाद को लेकर अब सियासी और सामाजिक हलचल तेज हो चुकी है। लाखन आर्मी ने राजपासी राजा कंसा के ऐतिहासिक किले और भगवान शिव मंदिर की मुक्ति के मुद्दे को प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप देने का ऐलान किया है। संगठन 9 जून से 9 जुलाई तक उत्तर प्रदेश के 31 जिलों में जनजागरण यात्रा निकालेगा और इस मुद्दे पर व्यापक जनसमर्थन जुटाएगा,साथ ही जेन-जीको जोड़ने पर विशेष फोकस किया जाएगा।

लखनऊ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी ने कहा कि राजा कंसा का किला और उससे जुड़ा शिव मंदिर केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि पासी समाज की अस्मिता, विरासत और आस्था का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि समाज की लगातार बढ़ती मांग और समर्थन को देखते हुए अब इस मुद्दे को गांव-गांव तक ले जाने का फैसला किया गया है।

सांसदों की चुप्पी पर सवाल

सूरज पासी ने उन जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधा जिन्हें पासी समाज का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने कहा कि जिन नेताओं को समाज ने अपना वोट देकर संसद और विधानसभा तक पहुंचाया, वे आज इस मुद्दे पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं। ऐसे में लाखन आर्मी ने स्वयं आगे आकर इस लड़ाई को जनआंदोलन का रूप देने का निर्णय लिया है।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में लाखन आर्मी ने इस मुद्दे पर पासी समाज के कई सांसदों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की थी। हालांकि संगठन को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। मोहनलाल गंज सांसद आर के चौधरी के साथ हुई तीखी बहस और अयोध्या सांसद अवधेश पासी द्वारा मदद से इनकार करने के बाद संगठन ने आंदोलन का रास्ता चुना है।

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हरदोई से शुरू होगी यात्रा, लखनऊ में होगा समापन

सूरज पासी ने बताया कि 9 जून को हरदोई से यात्रा की शुरुआत होगी। यह यात्रा प्रदेश के 31 जिलों से गुजरते हुए 9 जुलाई को लखनऊ पहुंचेगी। यात्रा के दौरान नुक्कड़ सभाएं, समाज संवाद कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान चलाए जाएंगे।

उनका दावा है कि पिछले कुछ दिनों में विभिन्न जिलों में आयोजित बैठकों में न केवल पासी समाज बल्कि बड़ी संख्या में सनातन धर्म से जुड़े लोगों ने भी इस मांग का समर्थन किया है।

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'यह किसी के खिलाफ नहीं, विरासत बचाने की लड़ाई'

सूरज पासी ने कहा कि यह आंदोलन किसी समुदाय या व्यक्ति के विरोध में नहीं है। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक आस्था के संरक्षण की मांग को लोकतांत्रिक तरीकेसे उठाना है। उन्होंने कहा कि लाखन आर्मी इस अभियान में पासी समाज के साथ-साथ सभी सनातनी हिंदुओं को जोड़ने का प्रयास करेगी।

युवाओं पर रहेगा खास फोकस

उन्होंने कहा कि आज की जेन-जीपीढ़ी अपने इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक है। इसलिए अभियान में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चितकी जाएगी। उनका कहना था कि युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों के संघर्ष से जोड़ना समय की जरूरत है।

हर गांव से जुटाई जाएगी एक चुटकी मिट्टी

अभियानके लिए एक विशेष रथ तैयार किया गया है, जिस पर राजा कंसा, भगवान शिव और पासी समाज के गौरवशाली इतिहास से जुड़े चित्र लगाए गए हैं। यात्रा के दौरान प्रत्येक गांव से एक चुटकी मिट्टी एकत्र की जाएगी। संगठन का कहना है कि यह मिट्टी सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जुड़ाव और सामूहिक भागीदारी का प्रतीक बनेगी।

कानूनी मोर्चे पर भी जारी रहेगी लड़ाई

सूरज पासी ने कहा कि जनजागरण अभियान के साथ-साथ कानूनी स्तर पर भी संघर्ष जारी रहेगा। ऐतिहासिक दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया के जरिए भी संगठन अपनी बात रखेगा। उन्होंने कहा कि लाखन आर्मी संविधान और कानून के दायरे में रहकर राजा कंसा की विरासत तथा किले और मंदिर के सम्मान की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।

क्या है कसमंडी किला विवाद?

मलिहाबाद स्थित कसमंडी किला पिछले कुछ समय से विवाद का केंद्र बना हुआ है। पासी समाज का दावा है कि यह राजा कंसा पासी का ऐतिहासिक किला है और परिसर में स्थित शिव मंदिर उनकी आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। समाज का आरोप है कि किले पर अवैध कब्जा कर धार्मिक गतिविधियां संचालितकी जा रही हैं।

वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना है कि उस स्थल से उनका पुराना धार्मिक संबंध है और वहां लंबे समय से नमाज अदा की जाती रही है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पहले ही दोनों पक्षों को किले परिसर में किसी भी प्रकार की धार्मिक गतिविधि करने से रोक चुका है।

Published By:
 Sahitya Maurya
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