अपडेटेड 27 February 2026 at 11:24 IST

क्या भारत फिर से आयुर्वेद की ओर लौट रहा है? क्यों शहरी युवा फिर चुन रहे हैं प्राचीन वेलनेस

बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियां, तनाव, और महामारी के बाद इम्यूनिटी को लेकर जागरूकता ने उपभोक्ताओं का व्यवहार बदला है। ऐसे में पिछले एक दशक में आयुर्वेद ने मुख्यधारा की बातचीत में मज़बूत वापसी की है।

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Is India returning to Ayurveda Why urban youth are choosing ancient wellness again
Is India returning to Ayurveda Why urban youth are choosing ancient wellness again | Image: Patanjali

आज अगर आप मुंबई, बेंगलुरु या दिल्ली के किसी प्रीमियम सुपरमार्केट में जाएं तो एक दिलचस्प बदलाव साफ दिखाई देता है। हल्दी के कैप्सूल मल्टीविटामिन के साथ रखे हैं, हर्बल टूथपेस्ट केमिकल-आधारित ब्रांड्स से मुकाबला कर रहे हैं, और आयुर्वेदिक स्किनकेयर अब सिर्फ अलग शेल्फ तक सीमित नहीं है।
ऐसा लगता है कि भारत अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है।


पिछले एक दशक में आयुर्वेद ने मुख्यधारा की बातचीत में मजबूत वापसी की है। सिर्फ बुज़ुर्ग ही नहीं, बल्कि शहरी मिलेनियल्स और जेन-जेड भी इसे अपना रहे हैं। जो कभी “दादी-नानी के नुस्खे” माने जाते थे, वे आज प्रिवेंटिव हेल्थकेयर के रूप में दोबारा खोजे जा रहे हैं।

प्राकृतिक जीवनशैली की ओर झुकाव

बढ़ती लाइफस्टाइल बीमारियां, तनाव, और महामारी के बाद इम्यूनिटी को लेकर जागरूकता ने उपभोक्ताओं का व्यवहार बदला है। लोग अब उत्पादों के लेबल ध्यान से पढ़ रहे हैं। “केमिकल-फ्री”, “प्लांट-बेस्ड”, और “होलिस्टिक” जैसे शब्द असर डाल रहे हैं।

5,000 साल पुराना आयुर्वेद केवल बीमारी के इलाज की बात नहीं करता, बल्कि शरीर, मन और जीवनशैली के संतुलन की बात करता है।

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पतंजलि जैसे ब्रांड्स ने आयुर्वेदिक उत्पादों को बड़े स्तर पर आम जनता तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। किफायती हर्बल विकल्पों के माध्यम से आयुर्वेद को किराना दुकानों से लेकर बड़े रिटेल स्टोर्स तक पहुंचाया गया।

स्वामी रामदेव की भूमिका

आधुनिक दौर में आयुर्वेद और योग के पुनरुत्थान की बात बिना स्वामी रामदेव के अधूरी है। उन्होंने टेलीविजन और सार्वजनिक योग शिविरों के माध्यम से योग को घर-घर तक पहुँचाया।

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उनके दैनिक योग कार्यक्रमों ने प्राणायाम और पारंपरिक उपायों को लाखों लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बना दिया।

आज आयुर्वेद का पुनरुत्थान केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्संतुलन का संकेत है।

Published By : Samridhi Breja

पब्लिश्ड 27 February 2026 at 11:24 IST