अपडेटेड 7 February 2026 at 20:07 IST
शरीर में बढ़े हुए वात दोष को कैसे संतुलित करें, बाबा स्वामी रामदेव ने बताया इलाज
Vata Disease: आयुर्वेद में हमारे शरीर के तीन दोषों का जिक्र किया गया है। इनके नाम वात, कफ और पित्त है। स्वामी रामदेव ने एक वीडियो में बताया है कि अगर वात रोग बढ़ जाए तो हमें इसे कम करने के लिए क्या करना चाहिए। चलिए आपको बताते हैं।
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Vata Disease: आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर पंचतत्वों से बना है और तीन मुख्य दोषों जैसे कि वात, पित्त और कफ द्वारा संचालित होता है। इनमें 'वात दोष' को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि यह शरीर में होने वाली हर प्रकार की गति का आधार है। जब यह संतुलन में रहता है, तो हम ऊर्जावान महसूस करते हैं, लेकिन इसका असंतुलन कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
योग गुरु स्वामी रामदेव के अनुसार, वात दोष को नियंत्रित करना न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक शांति के लिए भी अनिवार्य है। आइए जानते हैं वात दोष के बारे में विस्तार से।
वात दोष क्या है?
वात दोष वायु और आकाश तत्वों के मेल से बना है। शरीर में रक्त का संचार, सांसों की गति, हृदय की धड़कन और तंत्रिका तंत्र के सिग्नल, ये सभी वात द्वारा ही नियंत्रित होते हैं। स्वामी जी बताते हैं कि वात को 'दोषों का राजा' कहा जाता है क्योंकि इसके बिना पित्त और कफ भी गति नहीं कर सकते हैं।
वात बिगड़ने के मुख्य कारण
- अत्यधिक मानसिक तनाव और चिंता।
- रात में देर तक जागना या नींद पूरी न करना।
- बहुत अधिक कड़वे, तीखे और ठंडे खाद्य पदार्थों का सेवन।
- अनियमित दिनचर्या और उपवास।
वात दोष बढ़ने के मुख्य लक्षण
जब शरीर में वात की अधिकता होती है, तो इसके लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगते हैं
- जोड़ों में दर्द, घुटनों की समस्या और शरीर में अचानक होने वाली अकड़न।
- पेट में गैस बनना, पुरानी कब्ज और पेट फूलना।
- त्वचा और बालों का अत्यधिक रूखापन और फटना।
- घबराहट, बेचैनी, एकाग्रता की कमी और अनिद्रा
- हर समय थकान महसूस करना और वजन का अचानक गिरना।
स्वामी रामदेव के आयुर्वेदिक और योगिक उपाय
- स्वामी रामदेव के अनुसार, वात दोष को संतुलित करने के लिए "संयम" और "नियम" सबसे बड़े औषध हैं।
- हमेशा गर्म, ताजा और सुपाच्य भोजन करें। घी, तेल और प्राकृतिक चिकनाई वाले पदार्थों का सेवन बढ़ाएं। बासी भोजन और ठंडी ड्रिंक्स से पूरी तरह परहेज करें।
- वात को शांत करने के लिए अनुलोम-विलोम सबसे प्रभावी है। इसके साथ ही भ्रामरी और उद्गीथ प्राणायाम मानसिक तनाव को कम कर वात को नियंत्रित करते हैं।
- शरीर पर तिल के तेल या सरसों के तेल की मालिश वात को शांत करने का प्राचीन और अचूक तरीका है।
- पतंजलि की अश्वगंधा, गिलोय और पीड़ांतक जैसी औषधियां वात जनित रोगों में रामबाण का काम करती हैं।
पतंजलि और वात मुक्ति का संकल्प
पतंजलि योगपीठ और स्वामी रामदेव का मुख्य उद्देश्य भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर जन-जन तक पहुँचाना है। पतंजलि के उत्पाद शुद्ध जड़ी-बूटियों से निर्मित हैं, जो वात दोष को जड़ से खत्म करने में सहायक हैं। योग और आयुर्वेद के संगम से न केवल वात संतुलित होता है, बल्कि व्यक्ति दीर्घायु और निरोगी बनता है।
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Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 7 February 2026 at 20:07 IST