क्यों कपिला का ‘तैयारी का मौसम’ किसान उत्पादकता के लिए गेम-चेंजर बनकर उभर रहा है?

कपिला पशु आहार का चल रहा अभियान ‘तैयारी का मौसम’ इस सोच को बदलने की दिशा में काम कर रहा है और यह किसानों के मौसमी चुनौतियों से निपटने के तरीके में एक संभावित गेम-चेंजर के रूप में उभर रहा है।

Follow : Google News Icon  
Kapila Pashu Aahar’s Taiyari Ka Mausam campaign
Kapila Pashu Aahar’s Taiyari Ka Mausam campaign | Image: Republic

भारत के डेयरी इकोसिस्टम में मौसमी बदलाव हमेशा से ही फार्म की उत्पादकता तय करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। इनमें से गर्मी का मौसम सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है, जो अक्सर पशुओं में हीट स्ट्रेस, चारे के सेवन में कमी और दूध उत्पादन में गिरावट का कारण बनता है। हालांकि ये चुनौतियां अच्छी तरह समझी जाती हैं, लेकिन इन्हें संभालने का तरीका अब तक अधिकतर प्रतिक्रियात्मक ही रहा है, यानी समस्याओं का समाधान तब किया जाता है जब वे उत्पादन को प्रभावित करना शुरू कर देती हैं।

कपिला पशु आहार का चल रहा अभियान ‘तैयारी का मौसम’ इस सोच को बदलने की दिशा में काम कर रहा है और यह किसानों के मौसमी चुनौतियों से निपटने के तरीके में एक संभावित गेम-चेंजर के रूप में उभर रहा है। इस अभियान का मूल एक सरल लेकिन प्रभावशाली समझ पर आधारित है: गर्मी के प्रभाव अनुमानित होते हैं, लेकिन उनके प्रति प्रतिक्रिया अक्सर देर से होती है। किसान आमतौर पर तब हस्तक्षेप करते हैं जब पशुओं का स्वास्थ्य गिरने लगता है या दूध उत्पादन कम होने लगता है। तब तक असर साफ दिखाई देने लगता है और स्थिति को सुधारना ज्यादा मुश्किल हो जाता है।

कपिला पशु आहार का यह अभियान इस अंतर को दूर करने का प्रयास करता है, जिसमें किसानों को पहले से तैयारी करने के लिए प्रेरित किया जाता है—समस्याओं पर प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से कदम उठाने पर जोर दिया जाता है। प्रतिक्रियात्मक से निवारक सोच की ओर यह बदलाव ही इस अभियान को अलग बनाता है, खासकर उस श्रेणी में जहाँ पारंपरिक रूप से उत्पाद-केंद्रित संवाद पर अधिक ध्यान दिया जाता रहा है।

कपिला पशु आहार का अभियान

“हमने यह स्पष्ट अंतर देखा कि जागरूकता और कार्रवाई के बीच दूरी है। किसान जानते हैं कि गर्मी उत्पादकता को प्रभावित करती है, लेकिन तैयारी अक्सर बहुत देर से होती है, या कई बार होती ही नहीं। ‘तैयारी का मौसम’ इसी अंतर को पाटने के लिए बनाया गया है, ताकि समय रहते हस्तक्षेप किया जा सके और परिणामों में बड़ा बदलाव लाया जा सके,” कपिला पशु आहार की सीएमओ और डायरेक्टर तरु शिवहरे ने कहा।

Advertisement

इस दृष्टिकोण का प्रभाव तात्कालिक भी है और दीर्घकालिक भी। समय पर तैयारी पशुओं के स्वास्थ्य को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है, चारे के बेहतर सेवन को सुनिश्चित करती है और गर्मी के चरम समय में दूध उत्पादन में अचानक गिरावट को रोकती है। साथ ही, इससे प्रतिक्रियात्मक उपायों की आवश्यकता भी कम होती है, जो अक्सर कम प्रभावी और अधिक संसाधन-खपत वाले होते हैं।

मौसमी उतार-चढ़ाव को संभालने में मदद

उत्पादकता से आगे बढ़कर यह अभियान आर्थिक स्थिरता में भी योगदान देता है। लगातार उत्पादन का मतलब है अधिक स्थिर आय, जिससे किसानों को मौसमी उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलती है। ऐसे माहौल में जहाँ उत्पादकता में छोटी सी गिरावट भी बड़ा आर्थिक असर डाल सकती है, वहाँ तैयारी की यह सोच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

Advertisement

इस अभियान की प्रभावशीलता का एक और प्रमुख कारण इसकी सरलता है। जटिल या तकनीकी समाधान देने के बजाय, यह व्यावहारिक और आसानी से अपनाए जाने वाले व्यवहारों पर ध्यान देता है। इससे यह संदेश विभिन्न कृषि समुदायों तक आसानी से पहुँचता है और केवल एक विचार के रूप में नहीं, बल्कि ज़मीन पर लागू की जा सकने वाली प्रक्रिया के रूप में प्रभाव डालता है।

INDPNT (इंडिपेंडेंट) द्वारा परिकल्पित यह अभियान वास्तविक किसानों की समझ पर आधारित है, जो रोज़मर्रा की चुनौतियों को एक ऐसी कहानी में बदलता है जो जागरूकता, भागीदारी और कार्रवाई को बढ़ावा देती है। “असल समस्या गर्मी नहीं थी, बल्कि उसके प्रति सोच थी। जैसे ही हमने गर्मी को एक अनुमानित चरण के रूप में देखा, न कि एक अपरिहार्य समस्या के रूप में, ‘तैयारी का मौसम’ का विचार स्पष्ट हो गया। मौसम नहीं बदलता, लेकिन हमारा दृष्टिकोण बदल सकता है,” INDPNT के संस्थापक विपुल शास्त्री ने कहा।

तैयारी को उत्पादकता की नींव के रूप में स्थापित करते हुए, कपिला पशु आहार सिर्फ एक मौसमी समस्या का समाधान नहीं कर रहा, बल्कि यह भी बदल रहा है कि किसान उससे कैसे जुड़ते हैं। इस तरह, ‘तैयारी का मौसम’ सिर्फ एक अभियान से कहीं अधिक बनकर उभर रहा है। यह एक सोच में बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, जो किसानों को परिणामों पर नियंत्रण पाने, उत्पादकता की रक्षा करने और भविष्य के लिए मजबूती बनाने के लिए सशक्त बनाता है।

Published By :
Rupam Kumari
पब्लिश्ड