Hausla On, Scam Gone: साइबर ठग कैसे खेलते हैं लोगों की भावनाओं से? विशेषज्ञों ने खोले धोखाधड़ी के नए तरीके

डर, लालच, उत्सुकता या सहानुभूति जैसी भावनाएं कई बार लोगों को बिना सोचे-समझे कदम उठाने के लिए मजबूर कर देती हैं। यही कारण है कि ठग अक्सर अकाउंट ब्लॉक होने, लॉटरी जीतने या किसी आपात स्थिति का बहाना बनाकर लोगों पर दबाव बनाते हैं।

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Hausla On, Scam Gone
Hausla On, Scam Gone | Image: Republic

आज के दौर में साइबर ठगी सिर्फ तकनीक का खेल नहीं रह गई है। ठग अब लोगों की भावनाओं, आदतों और व्यवहार को समझकर उन्हें निशाना बना रहे हैं। कभी बैंक अधिकारी बनकर, कभी निवेश सलाहकार बनकर तो कभी किसी परिचित के नाम पर मैसेज भेजकर लोगों को जाल में फंसाया जा रहा है। ऐसे ही बढ़ते साइबर खतरों और उनसे बचाव के उपायों पर केंद्रित रहा ‘Hausla On, Scam Gone’ का पांचवां एपिसोड।

Kotak Mahindra Bank के सहयोग से प्रसारित इस विशेष श्रृंखला का उद्देश्य लोगों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक बनाना है। एपिसोड का संचालन Republic Bharat के वरिष्ठ एंकर एवं न्यूज़ एडिटर विवेक आनंद ने किया, जिन्होंने चर्चा को आम दर्शकों के लिए सरल और प्रासंगिक बनाए रखा।

इस एपिसोड में साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और नीति निर्माण से जुड़े तीन प्रतिष्ठित विशेषज्ञ शामिल हुए मुकेश चौधरी, साइबर क्राइम एवं साइबर सिक्योरिटी कंसल्टेंट और Cyber Veer एवं CyberOps के संस्थापक; डॉ. नेहा अग्रवाल, फोर्टिस हेल्थकेयर, मानेसर में मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहार विज्ञान विशेषज्ञ; और श्री निशांत कुमार, निदेशक, Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C), गृह मंत्रालय, भारत सरकार।

ठग तकनीक से पहले इंसान को समझते हैं

चर्चा के दौरान मुकेश चौधरी ने बताया कि आज के साइबर अपराधी केवल हैकिंग टूल्स पर निर्भर नहीं हैं। वे पहले यह समझने की कोशिश करते हैं कि लोग किस स्थिति में जल्दबाजी में निर्णय लेते हैं और फिर उसी कमजोरी का फायदा उठाते हैं। उन्होंने कई ऐसे उदाहरण साझा किए जिनमें फर्जी कस्टमर केयर कॉल, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी और सोशल मीडिया आधारित फ्रॉड के जरिए लोगों को निशाना बनाया गया।

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उन्होंने कहा कि किसी भी कॉल, लिंक या वित्तीय अनुरोध पर तुरंत भरोसा करने के बजाय उसकी पुष्टि करना आज की सबसे बड़ी डिजिटल आवश्यकता है।

भावनाओं को हथियार बना रहे हैं साइबर अपराधी

एपिसोड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा साइबर अपराध के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर केंद्रित रहा। डॉ. नेहा अग्रवाल ने बताया कि अधिकतर ऑनलाइन ठगी के मामलों में अपराधी व्यक्ति की भावनात्मक प्रतिक्रिया को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं।

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उन्होंने समझाया कि डर, लालच, उत्सुकता या सहानुभूति जैसी भावनाएं कई बार लोगों को बिना सोचे-समझे कदम उठाने के लिए मजबूर कर देती हैं। यही कारण है कि ठग अक्सर अकाउंट ब्लॉक होने, लॉटरी जीतने या किसी आपात स्थिति का बहाना बनाकर लोगों पर दबाव बनाते हैं।

डॉ. अग्रवाल ने सलाह दी कि किसी भी संदिग्ध संदेश या कॉल के दौरान कुछ सेकंड का विराम लेना और जानकारी की पुष्टि करना कई बड़े नुकसान से बचा सकता है।

साइबर अपराध के खिलाफ सरकार की रणनीति

कार्यक्रम में शामिल I4C के निदेशक श्री निशांत कुमार ने देश में साइबर अपराध से निपटने के लिए चल रही विभिन्न पहलों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ-साथ साइबर अपराध की प्रकृति भी तेजी से बदल रही है और इसी चुनौती से निपटने के लिए कई संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत रिपोर्ट करें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 का उपयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि समय पर शिकायत दर्ज कराने से धन की रिकवरी और अपराधियों तक पहुंचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

पूरी चर्चा का सार यही रहा कि साइबर सुरक्षा केवल मजबूत पासवर्ड या तकनीकी सुरक्षा तक सीमित नहीं है। असली सुरक्षा जागरूकता, सतर्कता और सही समय पर सही निर्णय लेने में है।

‘Hausla On, Scam Gone’ का पांचवां एपिसोड दर्शकों को यह समझाने में सफल रहा कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं, लेकिन यदि व्यक्ति सतर्क रहे और डिजिटल व्यवहार में सावधानी बरते, तो अधिकांश धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुभव, व्यावहारिक सुझावों और वास्तविक उदाहरणों से भरपूर यह एपिसोड एक बार फिर साबित करता है कि डिजिटल युग में जानकारी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। और यही संदेश लेकर ‘Hausla On, Scam Gone’ लगातार देशभर के दर्शकों तक पहुंच रहा है।

Published By:
 Ruchi Mehra
पब्लिश्ड