प्रदेश में 63 हजार 296 करोड़ रूपये की लागत से बनेंगे 5 ग्रीन फील्ड कारीडोर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में ₹63,296 करोड़ की लागत से 5 ग्रीन फील्ड कॉरिडोर बनाने की घोषणा की, जिससे राज्य में सड़क नेटवर्क मजबूत होगा। उन्होंने मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम मंडल की बैठक में 'विकसित मध्यप्रदेश संकल्प पथ' निधि का नामकरण किया और कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
प्रदेश में 63 हजार 296 करोड़ रूपये की लागत से बनेंगे 5 ग्रीन फील्ड कारीडोर
प्रदेश में 63 हजार 296 करोड़ रूपये की लागत से बनेंगे 5 ग्रीन फील्ड कारीडोर | Image: X

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सड़कें विकास की वास्तविक जीवन रेखा होती हैं। मध्यप्रदेश का कोई गांव, कस्बा या शहर बेहतर सड़क संपर्क से वंचित न रहे। हर गांव-शहर को बारहमासी सड़कों से जोड़ना ही हमारा लक्ष्य है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में स्टेट हाईवे, फोर लेन, सिक्स लेन, 8 लेन और ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण के माध्यम से आधुनिक सड़क नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। इससे प्रदेश में कनेक्टिविटी का नेटवर्क और मजबूत होगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम मंडल के संचालक मंडल की 49वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि सड़कों के जो काम निर्माणाधीन हैं, उनमें कार्य की गति बढ़ाकर तेजी से पूरा कर लें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सड़कों का जाल बिछाना है। 

इसके लिए लोक निर्माण विभाग, नगरीय प्रशासन, ग्रामीण विकास, उद्योग और मप्र हाऊसिंग बोर्ड के साथ आपसी तालमेल से काम करें। सड़क निर्माण कार्यों की गति तेज करें, मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड पर भी काम करें तथा सभी संभावनाओं पर एक साथ काम करें। मुख्यमंत्री ने निगम द्वारा प्रस्तावित राजमार्ग निधि का नया नामकरण किया। अब यह निधि 'विकसित मध्यप्रदेश संकल्प पथ' के रूप में जानी जाएगी। बैठक में लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह भी उपस्थित थे।

प्रदेश में 5 ग्रीनफील्ड कॉरिडोर्स के निर्माण की चल रही ठोस तैयारी

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में करीब 63 हजार 296 करोड़ रुपए की लागत से कुल 1398 किमी लंबाई वाले पांच ग्रीनफील्ड कॉरिडोर्स तैयार करने के लिए सभी तैयारियां की जा रही हैं। यह फोर लेन ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर, पेव्हड शेल्डर सहित होंगे। इनमें भोपाल से मंदसौर 258 किमी, सागर से सतना 227 किमी, जबलपुर से आशापुर 358 किमी, भोपाल से ग्वालियर 320 किमी तथा कटनी से सिंगरौली 235 किमी शामिल हैं। बताया गया कि भोपाल-मंदसौर, सागर-सतना एवं जबलपुर- आशापुर में डीपीआर कंसलटेन्ट द्वारा फीजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। कंसलटेन्ट द्वारा विभिन्न अलाईनमेंट विकल्प दिए गए हैं। एमपीआरडीसी द्वारा श्रेष्ठ अलाईनमेंट का चयन करने की प्रक्रिया प्रगति में हैं। इसी तरह भोपाल-ग्वालियर एवं कटनी-सिंगरौली में डीपीआर कंसलटेन्ट का चयन करने के लिए निविदा प्रक्रिया प्रचलन में है। संचालक मंडल द्वारा इन पांचों ग्रीनफील्ड कॉरीडोर्स की फीजिबिलिटी रिपोर्ट तथा फीजिबल पाए जाने पर इनकी डीपीआर तैयार करने की अनुमति मप्र सड़क विकास निगम को दी गई।

Advertisement

बैठक में मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री संजय कुमार दुबे, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एवं लोक निर्माण विभाग श्री सुखवीर सिंह, प्रमुख सचिव वन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह, सचिव जनसम्पर्क एवं मप्र रोड डेव्हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक श्री भरत यादव, मप्र सड़क विकास निगम लिमिटेड के स्वतंत्र संचालक श्री वेंकटेश बालासुब्रमानियम, निगम के दूसरे स्वतंत्र संचालक श्री धर्मानंद सारंगी सहित अन्य सदस्यगण भी उपस्थित थे।

बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन प्रस्तावों को मंजूरी दी :-

बीओटी योजनातर्गत 4 लेन जावरा-नयागांव खंड की परियोजना में शतप्रतिशत इक्विटी के विनिवेश की अनुमति को मंजूरी दी।
निगम के सुचारू संचालन के लिए मुख्य अभियंता के दो, महाप्रबंधक के तीन तथा उप महाप्रबंधक के पांच नवीन पदों के सृजन को मंजूरी दी गई।
निगम में पदस्थ विधि सहायक का मानदेय बढ़ाए जाने के संबंध में मंजूरी दी गई।
लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन विभाग के स्वामित्वाधीन मप्र तिलहन संघ भवन, अर्थात पीएएम भवन, अरेरा हिल्स भोपाल के अधिग्रहण को मंजूरी दी गई।
निगम में स्वतंत्र संचालक की नियुक्ति को भी मंजूरी दी गई।
ऋण के माध्यम से उन्नयन की जाने वाली परियोजनाओं (राज्य राजमार्ग/अन्य मार्ग) एवं अन्य परियोजनाओं का स्वामित्व मप्र सड़क विकास निगम को सौंपे जाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
निगम द्वारा बीओटी (टोल), बीओटी (टोल एवं एन्यूटी), ओएमटी एवं यूजर फ्री योजनांतर्गत उपयोगकर्ता से शुल्क संग्रहण के लिए सभी टोल प्लाजाओं में कृषि प्रयोजन के लिए उपयोग की जाने वाली कंबाईन हार्वेस्टरों को छूट देने के प्रस्ताव का भी अनुमोदन किया गया।

Advertisement
Published By:
 Initiative Desk
पब्लिश्ड