अपडेटेड 15 December 2025 at 19:42 IST

ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत पतंजलि विश्वविद्यालय को क्लस्टर सेंटर का दर्जा

हरिद्वार में संस्कृति मंत्रालय के ज्ञान भारतम मिशन द्वारा पतंजलि विश्वविद्यालय को क्लस्टर सेंटर के रूप में मान्यता दी गई। योगगुरु स्वामी रामदेव, डॉ आचार्य बालकृष्ण और ज्ञान भारतम मिशन के डॉ अनिर्बान दाश की उपस्थिति में एक MoU साइन किया गया।

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cluster center | Image: Republic

संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत पतंजलि विश्वविद्यालय को औपचारिक रूप से क्लस्टर सेंटर के रूप में नामित किया गया। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा हरिद्वार में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में की गई, जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत एवं ज्ञान परंपरा के संरक्षण की दिशा में विश्वविद्यालय के निरंतर प्रयासों का प्रमाण है।

इस अवसर पर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। समारोह में पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगगुरु स्वामी रामदेव, कुलपति आचार्य बालकृष्ण, ज्ञान भारतम मिशन के परियोजना निदेशक डॉ. अनिरबान दाश, डॉ. श्रीधर बारिक (समन्वयक, एनएमएम) एवं श्री विश्वरंजन मलिक (समन्वयक, डिजिटाइजेशन, एनएमएम) उपस्थित रहे।

इस अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, माननीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी तथा माननीय संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत जी सहित ज्ञान भारतम मिशन की संपूर्ण टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान भारतम् मिशन भारतीय संस्कृति आधारित ज्ञान परंपरा के संरक्षण हेतु माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व का सजीव उदाहरण है।

आचार्य बालकृष्ण ने जानकारी दी कि अब तक ज्ञान भारतम् मिशन के अंतर्गत 33 समझौता ज्ञापन संपन्न हो चुके हैं, जिनमें से 20 क्लस्टर सेंटर हैं और इनमें 8 विश्वविद्यालय शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पतंजलि विश्वविद्यालय देश का पहला योग एवं आयुर्वेद आधारित विश्वविद्यालय है जिसे क्लस्टर सेंटर के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। उन्होंने आगे बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा अब तक 50,000 से अधिक प्राचीन ग्रंथों का संरक्षण, 42 लाख से अधिक पृष्ठों का डिजिटलीकरण तथा 40 से अधिक पांडुलिपियों का शोध एवं पुनर्प्रकाशन किया जा चुका है। 

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क्लस्टर सेंटर के रूप में, पतंजलि विश्वविद्यालय अब इस कार्य को और सशक्त करते हुए 20 केंद्रों को प्रशिक्षित एवं मार्गदर्शन प्रदान करेगा, जिससे भारतीय संस्कृति के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान सुनिश्चित होगा।

ज्ञान भारतम् मिशन के परियोजना निदेशक डॉ. अनिरबान दाश ने अपने संबोधन में कहा कि क्लस्टर सेंटर के रूप में पतंजलि विश्वविद्यालय न केवल योग एवं आयुर्वेद आधारित पांडुलिपियों पर शोध करेगा, बल्कि इस ज्ञान को एक शैक्षिक क्रांति से जोड़ते हुए देश और समाज तक प्रभावी रूप से प्रसारित करेगा।
इस अवसर पर डॉ. साध्वी देवप्रिया, डीन, मानविकी एवं प्राचीन अध्ययन संकाय, पतंजलि विश्वविद्यालय सहित डॉ. अनुराग वार्ष्णेय, डॉ. सतपाल, डॉ. करुणा, डॉ. स्वाति, डॉ. राजेश मिश्रा, डॉ. रश्मि मित्तल, तथा पतंजलि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक एवं विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।

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Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 15 December 2025 at 19:42 IST