पंजाब निकाय चुनाव में चला आम आदमी पार्टी का जादू, 2027 से पहले सेमीफाइनल में जनता ने मान सरकार पर लगाई मुहर

नगर निगम, नगर कौंसिल और पंचायत चुनावों में आम आदमी पार्टी को मिल रहा जबरदस्त जनसमर्थन इस बात का संकेत है कि पंजाब की जनता ने एक बार फिर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और उनकी सरकार की नीतियों पर भरोसा जताया है।

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Chief Minister Bhagwant singh mann
भगवंत सिंह मान | Image: Social Media

पंजाब के निकाय चुनावों से जो तस्वीर निकलकर सामने आ रही है, उसने राज्य की राजनीति का माहौल पूरी तरह बदल दिया है। नगर निगम, नगर कौंसिल और पंचायत चुनावों में आम आदमी पार्टी को मिल रहा जबरदस्त जनसमर्थन इस बात का संकेत है कि पंजाब की जनता ने एक बार फिर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और उनकी सरकार की नीतियों पर भरोसा जताया है। ये चुनाव केवल स्थानीय निकायों के चुनाव नहीं हैं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल हैं, जिसमें आम आदमी पार्टी जबरदस्त बढ़त बनाती दिखाई दे रही है।

अब तक आए परिणामों में 480 वार्डों में से आम आदमी पार्टी 225 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी है। कांग्रेस 85, अकाली दल 71 और भाजपा केवल 15 सीटों तक सीमित दिखाई दे रही है। ये आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि पंजाब की राजनीति में विपक्ष लगातार कमजोर होता जा रहा है, जबकि आम आदमी पार्टी की पकड़ गांवों, कस्बों और शहरों तक मजबूत हुई है।

सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश गिद्दड़बाहा से आया है, जहां कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष राजावडिंग के गढ़ में आम आदमी पार्टी ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 19 में से अभी तक गिने गए 13 के 13 वार्डों में जीत हासिल कर ली। यह नतीजा कांग्रेस के लिए केवल चुनावी हार नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी माना जा रहा है कि जनता अब पुराने राजनीतिक ढांचे से आगे बढ़ना चाहती है।

धूरी में तो आम आदमी पार्टी ने लगभग क्लीन स्वीप कर दिया। 21 में से 20 सीटों पर जीत दर्ज कर पार्टी ने यह साबित कर दिया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह क्षेत्र में जनता का भरोसा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुआ है। इसी तरह हरियाना नगर काउंसिल में 11 में से 7 सीटें जीतकर पार्टी ने बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस और भाजपा पीछे रह गईं।

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नाभानगर कौंसिल के परिणाम भी आम आदमी पार्टी के बढ़ते जनाधार की कहानी कह रहे हैं। यहां पार्टी ने 12 में से 6 सीटें जीतकर सबसे बड़ी ताकत के रूप में अपनी स्थिति बनाई। भाजपा, अकाली दल और कांग्रेस मिलकर भी वह प्रभाव नहीं छोड़ सके जो आम आदमी पार्टी अकेले छोड़ती दिखाई दी।

पिछले चार वर्षों में बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई, रोजगार और जनकल्याण योजनाओं पर मान सरकार द्वारा किए गए काम का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। यही कारण है कि विपक्ष लगातार जनता के बीच अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा है। पंजाब की जनता ने इस चुनाव में यह संदेश दिया है कि वह केवल आरोप-प्रत्यारोप नहीं बल्कि काम की राजनीति चाहती है।

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कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा तीनों दलों के लिए ये नतीजे गंभीर चेतावनी माने जा रहे हैं। एक समय पंजाब की राजनीति पर राज करने वाले दल आज कई क्षेत्रों में तीसरे और चौथे स्थान के लिए संघर्ष करते दिखाई दे रहे हैं। जनता के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि इन दलों ने वर्षों तक पंजाब को वादों और परिवारवाद की राजनीति में उलझाए रखा, जबकि आम आदमी पार्टी ने व्यवस्था परिवर्तनऔर विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाया।

मालवा और सरहिंद क्षेत्र से आ रहे रुझान भी आम आदमी पार्टी के पक्ष में मजबूत माहौल का संकेत दे रहे हैं। बठिंडा में पार्टी 80 से अधिक वार्डों में बढ़त बनाए हुए है। यदि यही रुझान अंतिम परिणामों में बदलते हैं तो यह पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी के लिए एक और ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।

निकाय चुनावों के ये नतीजे साफ बता रहे हैं कि पंजाब की जनता ने 2027 की लड़ाई का शुरुआती संकेत दे दिया है। मुख्यमंत्री भगवंतमान के नेतृत्व और आम आदमी पार्टी की नीतियों को जनता का समर्थन लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। दूसरी तरफ कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर जनता उनसे लगातार दूरी क्यों बना रही है।

पंजाबके इस राजनीतिक सेमीफाइनल में फिलहाल एक ही नारा गूंजता दिखाई दे रहा है, काम बोलता है, और पंजाब में आम आदमी पार्टी का जादू लगातार बढ़ता जा रहा है।

Published By:
 Priyanka Yadav
पब्लिश्ड