3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में होगा 'महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य' का भव्य मंचन

भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्याय और न्यायप्रियता के वैश्विक प्रतीक, चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य का अदम्य साहस अब धर्मनगरी काशी की फिजाओं में महसूस किया जाएगा। मध्य प्रदेश सरकार की पहल पर 'विक्रमोत्सव-2026' के अंतर्गत वाराणसी के BLW मैदान में 3 से 5 अप्रैल 2026 तक भव्य महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' का मंचन होने जा रहा है।

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Samrat Vikramaditya play Varanasi
Samrat Vikramaditya play Varanasi | Image: Republic

मध्यप्रदेश की मोहन सरकार आज भारतीय ज्ञान परंपरा और गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर अंकित करने के अपने मिशन में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से शुरू हुआ 'विक्रमोत्सव-2026' का कारवां अब बाबा विश्वनाथ की नगरी, वाराणसी (काशी) पहुंच रहा है।

महाकाल से विश्वनाथ तक: एक सांस्कृतिक सेतु

आगामी 3 से 5 अप्रैल 2026 तक वाराणसी के भव्य मंच पर “महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य” का मंचन किया जाएगा। यह आयोजन केवल एक नाटक नहीं, बल्कि 'सांस्कृतिक राष्ट्रवाद' का एक ऐसा महाकुंभ है, जो उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का मानना है कि सम्राट विक्रमादित्य केवल एक ऐतिहासिक राजा नहीं, बल्कि भारतीय न्याय, शौर्य और सुशासन के जीवंत प्रतीक हैं।

विक्रम संवत: भारतीय विज्ञान का गौरव

लगभग 2100 वर्ष पूर्व, जब विदेशी आक्रांता शकों ने भारतीय भूमि को अस्थिर करने का प्रयास किया, तब सम्राट विक्रमादित्य ने उनका समूल नाश कर 'विक्रम संवत' का प्रवर्तन किया। वाराणसी में होने वाला यह महानाट्य जन-जन को उस कालखंड से परिचित कराएगा जब भारत खगोल शास्त्र और विज्ञान में विश्व का नेतृत्व कर रहा था।
‘सम्राट विक्रमादित्य का शासन एक ऐसे भारत का सपना था जहाँ न कोई दरिद्र था और न ही कोई दुखी।’

शौर्य, न्याय और नवरत्नों का संगम

तीन दिवसीय इस आयोजन में दर्शकों को सम्राट के 'शकारि' और 'साहसांक' बनने की गाथा देखने को मिलेगी। नाटक के प्रमुख आकर्षण होंगे। 
प्रजावत्सल राजा: कैसे विक्रमादित्य ने राजकोष से धन देकर अपनी पूरी प्रजा को ऋणमुक्त किया।
बौद्धिक संपदा: कालिदास, वराहमिहिर और धन्वंतरि जैसे 'नवरत्नों' की परंपरा, जिसने भारत को 'विश्वगुरु' बनाया।
ऐतिहासिक सफलता: दिल्ली के लाल किले पर सफल मंचन और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सराहना प्राप्त करने के बाद, अब काशी में यह आयोजन एक नया मील का पत्थर स्थापित करने को तैयार है।

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डिजिटल क्रांति और युवा पीढ़ी का जुड़ाव

महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ की रिपोर्ट के अनुसार, विक्रमोत्सव-2026 ने डिजिटल दुनिया में इतिहास रच दिया है। 7 फरवरी से 24 मार्च 2026 के बीच इस आयोजन की डिजिटल पहुंच 17.72 करोड़ से अधिक रही है। सोशल मीडिया पर #Vikramutsav2026 का ट्रेंड होना इस बात का प्रमाण है कि आज की युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास को जानने के लिए कितनी उत्सुक है।

Published By :
Aarya Pandey
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