असम में CM कुर्सी पर रहते दोबारा चुनाव जीतना क्यों सबसे बड़ी चुनौती थी? हिमंता बिस्वा सरमा ने दिया जवाब
रिपब्लिक समिट 2026 में शिरकत करने पहुंचे असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अलग-अलग मुद्दों पर खुलकर अपनी नई रखी। इस दौरान उन्होंने यह भी बताया कि असम में CM कुर्सी पर रहते दोबारा चुनाव जीतना क्यों सबसे बड़ी चुनौती थी?
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देश के सबसे बड़े न्यूज इवेंट रिपब्लिक समिट 2026 (Republic Summit 2026) में विभिन्न क्षेत्रों की कई दिग्गज हस्तियां शिरकत कर रही हैं। कार्यक्रम में BJP के दिग्गज नेता और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा भी शामिल हुए। रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के सवाल का जवाब देते हुए हिमंत सरमा ने बताया कि असम में CM कुर्सी पर रहते दोबारा चुनाव जीतना कितनी बड़ी चुनौती थी।
रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी ने बताया कि असम विधानसभा चुनाव से करीब दो साल पहले उनकी मुलाकात हिमंत बिस्वा सरमा से एक शादी समारोह में हुई थी। उस समय उन्होंने सवाल किया था कि इस बार चुनाव में क्या होगा? इसके जवाब में हिमंत सरमा ने पूरे कॉन्फिडेंस में कहा था कि हम चुनाव में अपना बहुत अच्छा करेंगे। आम लोगों में भी यही राय बन गई थी कि हिमंत सरमा असम में बड़ी जीत हासिल करेंगे। मगर आम धारणा और वास्तविकता में कभी-कभी बड़ा अंदर होता है।
हिमंत बिस्वा ने बताया क्यों आसान नहीं था चुनाव जीतना?
अर्नब गोस्वामी ने हिमंत बिस्वा सरमा से सवाल पूछा, आपने ये क्यों कहा था कि असम में CM कुर्सी पर रहते दोबारा चुनाव जीतना बड़ी चुनौती है? इसके जवाब में असम सीएम ने कहा, असम एक ऐसा राज्य है, जहां 40 फीसदी आबादी मुस्लिम की है। जनगणना के ताजा आंकड़ों में यह संख्या दोहराई गई है। इसमें 30 से 36 फीसदी मुस्लिम ऐसे हैं जो बांग्लादेश से आए मुस्लिम हैं और इनके आधे रिश्तेदार अभी भी बांग्लादेश में हैं। ऐसे में असम चुनाव में क्लीन स्वीप करना बिल्कुल आसान नहीं था, जब आपको ये पता है कि 30 से 40 फीसदी की आबादी से आपको वोट मिल भी सकता और नहीं भी।
असम सीएम को कितनी सीट पर जीत की थी उम्मीद
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि असम विधानसभा में जीत दर्ज करना इतना आसान नहीं था। उन्होंने ने कहा कि 80 से कम सीटें जीतना जीत नहीं माना जाएगा। मैंन सफलता के लिए अपना एक निजी पैमाना तय किया। मैं 90 सीटों का टारगेट लेकर चला था। 126 सीटों में से अगर 90 सीट जीत जाते हैं तो भी बड़ी बात थी, मगर हमन शतक पार किया। ये असम की जनता और मां कामाख्या के आशीर्वाद से पूरा हुआ। मुझे भी इतनी बड़ी जीत की उम्मीद नहीं थी।
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