बिना 'ताहिया' के रथ पर क्यों पहुंचे भगवान जगन्नाथ? पुरी में परंपरा टूटने पर मचा भारी सियासी बवाल

पुरी रथ यात्रा के दौरान एक अभूतपूर्व विवाद सामने आया है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को रथों तक ले जाने की पारंपरिक 'पहांडी' रस्म के दौरान उन्हें पारंपरिक पुष्प मुकुट 'ताहिया' नहीं पहनाया गया। सदियों पुरानी इस परंपरा के टूटने से न केवल श्रद्धालु आहत हैं, बल्कि इस पर भारी राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
Why did Lord Jagannath reach the chariot without the 'Tahiya' Massive political uproar in Puri over the breach of tradition
Why did Lord Jagannath reach the chariot without the 'Tahiya' Massive political uproar in Puri over the breach of tradition | Image: Instagram

ओडिशा के पुरी में आयोजित विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान सदियों पुरानी परंपरा टूटने का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने अब राजनीतिक और धार्मिक तूल पकड़ लिया है। इस बार भगवान जगन्नाथ की 'पाहंडी' मंदिर से रथ तक ले जाने की शोभायात्रा के दौरान उन्हें उनके पारंपरिक पुष्प मुकुट 'ताहिया' के बिना ही रथ तक पहुंचाया गया।

आमतौर पर भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा तीनों को भारी फूलों वाले इस विशेष मुकुट के साथ बाहर लाया जाता है। लेकिन इस बार केवल बलभद्र जी और सुभद्रा जी ही ताहिया के साथ दिखे, जबकि भगवान जगन्नाथ का ताहिया बीच रास्ते में ही हटा दिया गया।

मंदिर प्रशासन और सेवायतों की सफाई

मामला बढ़ने पर श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन और सेवायतों ने अपनी सफाई पेश की। दैतापति निजोग के सचिव रामकृष्ण दासमहापात्र ने बताया कि तेज बारिश के कारण फूलों का यह मुकुट पूरी तरह भीगकर भारी हो गया था। 'बैसी पहाचा' 22 सीढ़ियों पर सेवायतों को लगा कि यदि इसे नहीं हटाया गया, तो भगवान को रथ तक पहुंचाने में काफी देर हो सकती है। वहीं, SJTA के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने साफ किया कि ताहिया हटाने का फैसला पूरी तरह सेवायतों का था, इसमें प्रशासन का कोई दखल नहीं था। कई सेवायतों का यह भी मानना है कि ताहिया न होने से रथ यात्रा की पवित्रता पर कोई असर नहीं पड़ता।

विपक्ष का तीखा हमला अस्मिता से खिलवाड़ का आरोप

विपक्षी दलों, बीजू जनता दल (BJD) और कांग्रेस ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि रथ यात्रा हमेशा मानसून में ही होती है, लेकिन इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि भगवान को बिना ताहिया के लाया गया हो।

Advertisement

BJD की वरिष्ठ नेता प्रमिला मलिक ने इसे ओडिशा की अस्मिता और करोड़ों ओड़िया लोगों की आस्था पर गहरी चोट बताया है। उन्होंने कहा, जब मौके पर मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राज्य के सभी बड़े अधिकारी मौजूद थे, तब इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? राज्य सरकार को इसके लिए तुरंत माफी मांगनी चाहिए। इसके अलावा, BJD ने भाजपा सरकार पर एक और परंपरा तोड़ने का आरोप लगाया कि इस बार सूर्यास्त के बाद भी रथों को खींचा गया, जो नियमों के खिलाफ है।

कांग्रेस ने भाजपा पर क्या हमला बोला?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने भी भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले भाजपा ने 'ओड़िया अस्मिता' की रक्षा का बड़ा वादा किया था, लेकिन सत्ता में आते ही वह धार्मिक संस्थाओं की मर्यादा और परंपराओं को बनाए रखने में नाकाम साबित हो रही है। बिना ताहिया के भगवान को देखना करोड़ों भक्तों के लिए बेहद पीड़ादायक है।

Advertisement

क्या केवल सुरक्षा के लिए लिया गया ये फैसला? 

इन तमाम आरोपों के बीच राज्य सरकार ने स्थिति को संभालते हुए कहा कि खराब मौसम और देश-विदेश से उमड़े लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बावजूद, रथ यात्रा का पूरा उत्सव बेहद शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है। हालांकि, परंपरा और राजनीति के इस टकराव ने इस बार की रथ यात्रा को विवादों में ला दिया है।

ये भी पढ़ें - Aaj Ka Rashifal 18 July 2026: आज शनिवार के दिन कुंभ समेत इन 5 राशियों को बरतनी होगी सतर्कता, वाद-विवाद से रहें दूर; पढ़ें दैनिक राशिफल 

Published By:
 Aarya Pandey
पब्लिश्ड