अपडेटेड 27 February 2026 at 10:15 IST

Rinku Singh's Father Dies: कौन थे रिंकू सिंह के पिता? बेटे को क्रिकेटर बनाने लिए कभी कंधों पर उठाकर घर-घर पहुंचाते थे सिलेंडर

रिंकू सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता के संघर्ष और त्याग की कहानी जुड़ी हुई है। खानचंद्र सिंह एक बेहद ही साधारण परिवार से आते थे,बावजूद उन्होंने अपने बेटे के सपनों का आसमान दिया।

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Rinku Singh father death
कौन थे रिंकू सिंह के पिता? | Image: X/Republic

भारतीय क्रिकेट टीम के बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह का निधन हो गया। उन्होंने ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में 27 फरवरी की सुबह अंतिम सांस ली। खानचंद्र सिंह लंबे समय से स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। हाल ही में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई दिनों तक वे मैकेनिकल वेंटिलेटर पर थे, लेकिन शुक्रवार तड़के उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। अपने बेटे को क्रिकेटर बनाने के लिए  खानचंद्र सिंह लंबा संघर्ष किया था। आईए जानते हैं रिंकू सिंह के पिता की संघर्ष की कहानी...
 

रिंकू सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता के संघर्ष और त्याग की कहानी जुड़ी हुई है। खानचंद्र सिंह एक बेहद ही साधारण परिवार से आते थे,बावजूद उन्होंने अपने बेटे के सपनों का आसमान दिया। खानचंद्र सिंह कभी गरीबी की मार झेलते हुए घर-घर गैस सिलेंडर पहुंचाने का काम करते थे। महीने में महज 7-8 हजार रुपये की कमाई से उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं और रिंकू के क्रिकेट सपने को पंख दिए।

बेटे को क्रिकेटर बनाने के लिए किया था संघर्ष

रिंकू सिंह का बचपन आर्थिक तंगी में बीता। दो कमरों के छोटे से घर में उनका पूरा परिवार रहता था। एक इंटरव्यू में रिंकू ने बताया था कि 2012 में क्रिकेट खेलने के कारण पिता से मार भी खानी पड़ी, क्योंकि शुरू में खानचंद्र सिंह इस करियर के खिलाफ थे। लेकिन रिंकू ने हार नहीं मानी। उसी साल क्रिकेट में बाइक इनाम जीतने के बाद पिता ने उनका पूरा साथ दिया। उसी इनाम की बाइक से खानचंद्र सिंह सिलेंडर डिलीवरी का काम शुरू किया। रिंकू के एक भाई ऑटो चलाने का काम करत थे, जबकि दूसरे भाई कोचिंग संस्थान में काम करते हैं।

घर-घर सिलेंडर पहुंचाने का करते थे काम

खानचंद्र सिंह का परिवार मूल रूप से बुलंदशहर जिले के गांव दानपुर का निवासी है। करीब 25 साल पहले रोजगार की तलाश में सब अलीगढ़ आकर बस गए थे, मगर बुलंदशहर में आज भी उनका पुश्तैनी मकान मौजूद है। रिंकू का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। परिवार आर्थिक तंगी से गुजता रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि एक समय रिंकू के भाई ने उन्हें साफ-सफाई की नौकरी लगवा दी, लेकिन रिंकू वहां सिर्फ एक दिन टिक पाए और क्रिकेट पर फोकस करने का फैसला किया।

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ऐसे बदली रातों रात किस्मत

रिंकू की किस्मत तब बदली जब कोलकाता नाइट राइडर्स ने उन्हें आईपीएल में 55 लाख में खरीदा। गुजरात टाइटंस के खिलाफ 5 गेंदों पर 5 छक्के लगाकर उन्होंने सुर्खियां बटोरीं। बाद में केकेआर ने उन्हें 13 करोड़ में रिटेन किया। एक दौर ऐसा भी आया जब खानचंद्र सिंह 5 लाख रुपये के कर्ज में डूब गए थे। रिंकू ने क्रिकेट से मिलने वाले डेली अलाउंस बचाकर पिता की मदद की। सफलता मिलने के बाद रिंकू ने पिता को साढ़े तीन करोड़ की शानदार कोठी गिफ्ट की और साढ़े तीन करोड़ की कावासाकी बाइक भी तोहफे में दी। मगर आज सबकुछ छोड़कर खानचंद्र सिंह परलोक सिधार गए। उनके जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 27 February 2026 at 10:15 IST