Republic Day 2025: गणतंत्र दिवस समारोह में कौन था पहला मुख्य अतिथि, कैसे और क्यों होता है राजकीय मेहमान का चयन

Republic Day 2025: भारत का पहला गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को मनाया गया था। 1950 से ही गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि की परंपरा की शुरुआत हुई।

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Republic Day Parade
Republic Day Parade | Image: PTI

Republic Day 2025: कर्तव्य पथ पर पूरी दुनिया आज भारत का वर्तमान और भविष्य देखेगी। यहां देश की समृद्ध संस्कृति, उपलब्धियों, सैन्य कौशल और एकता की झलक होगी। राजकीय मेहमान इस पूरे कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। इस बार इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो मुख्य अतिथि हैं और अक्टूबर 2024 में राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने के बाद से उनकी पहली भारत यात्रा है।

भारत की परंपरा रही है कि वो हर साल गणतंत्र दिवस का जश्न एक राजकीय मेहमान के साथ मनाता है। भारत ने अब तक कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है। भारत के पड़ोसी देशों को भी कई बार मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। मुख्य अतिथि कई औपचारिक गतिविधियों में सबसे आगे और केंद्र में होते हैं जो समय के साथ इस आयोजन और इसके आयोजन का एक हिस्सा बन गए हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन अतिथियों को क्यों बुलाया जाता है और इनका चयन कैसे किया जाता है?

मुख्य अतिथि का चयन क्यों होता है?

गणतंत्र दिवस पर किसी देश के प्रमुख को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के पीछे कई वजह होती हैं। उदाहरण के तौर पर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आर्थिक सहयोग इसका उद्देश्य होता है। उसके अलावा विश्व मंच पर भारत की छवि को मजबूत करना भी इसकी एक वजह होती है।

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कैसे होता है गणतंत्र दिवस के लिए मुख्य अतिथि का चयन?

गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि का चयन भारत की विदेश नीति के अनुरूप होता है। आसान शब्दों में कहें तो मुख्य अतिथि का चयन करने की जिम्मेदारी विदेश मंत्रालय की होती है। विदेश मंत्रालय इस चयन प्रक्रिया में राजनीतिक संबंध, आर्थिक संबंध, सांस्कृतिक संबंध जैसे अलग-अलग पहलुओं का विश्लेषण करता है। खासकर दोनों देशों के बीच संबंधों की मजबूती और महत्व को ध्यान में रखा जाता है। यह देखा जाता है कि दोनों देशों के बीच क्या साझा हित हैं और कैसे दोनों देश एक दूसरे के साथ सहयोग कर सकते हैं। इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद विदेश मंत्रालय मुख्य अतिथि के नाम का प्रस्ताव करता है, जिसे बाद में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाता है। मंजूरी मिलने के बाद आमंत्रित अतिथि को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया जाता है और गणतंत्र दिवस समारोह में उनकी उपस्थिति की व्यवस्था की जाती है।

कब शुरू हुई परंपरा और पहला मुख्य अतिथि कौन?

भारत का पहला गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को मनाया गया था। इस ऐतिहासिक दिन भारत ने खुद को एक गणतंत्र घोषित किया था। 1950 से ही गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि की परंपरा की शुरुआत हुई। वैसे तो दुनियाभर से कई गणमान्य व्यक्ति भारत आए थे, लेकिन मुख्य अतिथि के रूप में इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो को आमंत्रित किया गया था। फिलहाल ये ऐसा ऐतिहासिक मौका है, जब भारत के गणतंत्र दिवस को 75 साल हुए हैं और इंडोनेशिया के ही लीडर को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया है।

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Published By:
 Dalchand Kumar
पब्लिश्ड