जब अयोध्या के विवादित ढांचे पर भगवा झंडा थाम बैठ गया बंदर, फिर पुलिस ने क्या किया? जानें

कहानी 30 अक्टूबर, 1990 की है। अयोध्या में बड़ी संख्या में कार सेवक इकट्ठा हुए। इन कार सेवकों को रोकने के लिए यूपी सरकार ने बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए।

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अयोध्या में गुंबद पर बैठा बंदर | Image: x

Ayodhya Ram Mandir: भगवान श्री राम की जन्म भूमि अयोध्या अपने आप में एक बहुत बड़ी कहानी है। इस जगह से भारत का इतिहास जुड़ा है। पिछले 500 सालों से अयोध्या ने बहुत कुछ देखा है। कभी यहां राम का मंदिर हुआ करता था , फिर मुगल शासक बाबर ने इसे तोड़कर मस्जिद बनाया और फिर शुरू हुई हिंदुओं की वो तपस्या जिसमें ना जाने कितने शहीद हुए। उनका सिर्फ एक ही सपना था कि वो अयोध्या में राम लला को विराजमान होते देख सके।

22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पूरी हुई। मुख्य अतिथि पीएम नरेंद्र मोदी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की। इसके बाद देशवासियों ने राम लला की पहली झलक देखी और मानो रामभक्तों का जीवन धन्य हो गया। इसके बाद पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि सदियों की तपस्या पूरी हुई, भगवान राम अब आ गए हैं।

भगवा झंडा थाम बैठ गया बंदर

कहानी 30 अक्टूबर, 1990 की है। अयोध्या में बड़ी संख्या में कार सेवक इकट्ठा हुए। इन कार सेवकों को रोकने के लिए यूपी सरकार ने बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए। लेकिन इसके बावजूद हजारों कार सेवक नहीं मानें और उन्होंने बैरिकेड तोड़ दिए और बाबरी मस्जिद पर भगवा रंग फहरा दिया। हालांकि, कुछ देर बाद ही पुलिस ने कार सेवकों पर काबू पा लिया और उन्हें मस्जिद से बाहर निकाला। इस बीच एक तस्वीर सामने आई जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। बाबरी मस्जिद के गुंबद पर एक बंदर बैठ गया।

एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान विश्व हिंदू परिषद के संयुक्त महासचिव स्वामी विज्ञानानंद ने बताया कि बड़ी संख्या में कार सेवक अयोध्या पहुंचे और सुरक्षा घेरा तोड़कर बाबरी मस्जिद पर भगवा झंडा फहरा दिया। इसके बाद वहां अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने कुछ देर बाद इन कार सेवकों पर काबू पाया। पुलिस ने गुंबद के ऊपर से भगवा झंडा हटाने की कोशिश की लेकिन तभी एक अनोखा दृश्य देख सब हैरान हो गए। बाबरी मस्जिद के एक गुंबद पर बंदर भगवा झंडा थाम कर बैठा था। ऐसा लगा मानो राम भक्त हनुमान अपने भगवान की रक्षा करने पहुंचे हों। इसके बाद पुलिस ने बंदर को हनुमान का अवतार मानते हुए उसे परेशान ना करने का फैसला किया। 

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Published By:
 Ritesh Kumar
पब्लिश्ड