Natural Gas: रसोई से लेकर गाड़ियों तक...आखिर क्यों चर्चा में हैं ये 4 गैसें और भारत में कहां से होती है इनकी सप्लाई?

Natural Gas: ईरान के साथ बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को डरा दिया है, और इसका सीधा असर अब भारत में PNG, CNG, LPG और LNG की कीमतों और सप्लाई पर पड़ता दिख रहा है। युद्ध की आहट के बीच इन गैसों की किल्लत की खबरें आम हो रही हैं।

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NaturalGas
NaturalGas | Image: Freepik

Natural Gas:  ईरान युद्ध और वैश्विक तनाव के बीच आज भारत की रसोई से लेकर फैक्ट्रियों तक एक ही चर्चा है और वो गैस की किल्लत है।   ईंधन की कमी के कारण कई होटल और कारखाने बंद होने की कगार पर हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये चारों गैसें LPG, CNG, PNG, LNG एक-दूसरे से कैसे अलग हैं? और क्या हम इनके लिए पूरी तरह विदेशों पर निर्भर हैं? आइए जानते हैं।

LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस)

यह वही गैस है जो आपके घर के लाल सिलेंडर में होती है। यह मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण है। जब कच्चे तेल को रिफाइन किया जाता है, तब यह उप-उत्पाद के रूप में निकलती है।
यह मुख्य रूप से खाना पकाने के लिए किया जाता है।  मार्च 2026 तक भारत में 33 करोड़ उपभोक्ता हैं। हम अपनी जरूरत का लगभग 60% हिस्सा मध्य-पूर्व यानी कि खाड़ी देशों से आयात करते हैं।

CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस)

यह मीथेन गैस है जिसे बहुत ऊंचे दबाव पर दबाया जाता है। यह हवा से हल्की होती है और पेट्रोल-डीजल के मुकाबले कम प्रदूषण फैलाती है।
इसका उपयोग बस, कार और ऑटो जैसे वाहनों में ईंधन के रूप में किया जाता है। यह प्राकृतिक गैस के कुओं से मिलती है या LNG को दोबारा गैस में बदलकर बनाई जाती है।

PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस)

PNG असल में रसोई तक पहुंचने वाली वह गैस है जो सिलेंडर के बजाय पाइप के जरिए सीधे आपके चूल्हे तक आती है।  यह LPG से सुरक्षित और सस्ती मानी जाती है क्योंकि इसमें सिलेंडर फटने का डर नहीं होता।
वर्तमान में 1.5 करोड़ घरों में इसका कनेक्शन है, जिसे सरकार 2032 तक 12.5 करोड़ घरों तक पहुंचाना चाहती है।

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LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस)

यह पूरी सप्लाई चेन की "मदर गैस" है। जब प्राकृतिक गैस को -162°C तक ठंडा किया जाता है, तो यह तरल बन जाती है। तरल रूप में इसका आयतन 600 गुना कम हो जाता है, जिससे इसे बड़े जहाजों के जरिए एक देश से दूसरे देश भेजना आसान होता है। 
भारत में इसी LNG को आयात करता है और फिर उसे दोबारा गैस बनाकर CNG और PNG के रूप में सप्लाई करता है।

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संकट की असली वजह क्या है? 

भारत अपनी गैस की कुल जरूरत का लगभग 50% हिस्सा आयात करता है। हमारी LNG का 40% हिस्सा अकेले कतर से आता है। ईरान युद्ध और खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे सप्लाई चेन टूट गई है।
जिससे ग्लोबल मार्केट में दाम बढ़ने से देश में सीएनजी और पीएनजी महंगी हो सकती है।  एलएनजी की कमी से बिजली और खाद बनाने वाली कंपनियां बंद होने की कगार पर हैं। इतना ही नहीं एलपीजी की कमी से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत हो गई है, जिससे कई छोटे रेस्तरां बंद हो रहे हैं। 

Published By:
 Aarya Pandey
पब्लिश्ड