Yogi Cabinet Portfolios: योगी कैबिनेट में विभागों का बंटवारा, मनोज पांडेय और भूपेंद्र चौधरी को मिली बड़ी जिम्मेदारी
यूपी सरकार में 6 नए मंत्रियों के विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद मंत्रियों को अलग-अलग विभागों का जिम्मा दिया गया है।
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Yogi Cabinet Portfolios: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद आखिरकार वो दिन आ ही गया जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार था। कैबिनेट में शामिल नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा हो गया है।
कैबिनेट मंत्रियों की बात करें तो भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग और मनोज पांडे को खाद्य, रसद एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं अजीत पाल सिंह को खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रसाधन विभाग की जिम्मेदारी मिली है। सोमेंद्र तोमर को राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण और प्रांतीय रक्षक दल विभाग दिया गया है।
कृष्णा पासवान को मिला कौन सा विभाग?
कृष्णा पासवान को पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग दिया गया है। कैलाश सिंह राजपूत को ऊर्जा स्रोत विभाग का जिम्मा मिला है। जबकि सुरेंद्र दिलेर को राजस्व और हंसराज विश्वकर्मा को लघु सूक्ष्म एवं मध्यम उद्योग की जिम्मेदारी दी गई है। ये चारों अपने-अपने विभाग के राज्य मंत्री होंगे।
10 मई को हुआ था मंत्रिमंडल विस्तार
बीते रविवार यानी 10 मई को लखनऊ के जन भवन में योगी सरकार 2.0 का मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 6 नए चेहरों को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी। इनमें भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडे, कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर, कृष्णा पासवान और हंसराज विश्वकर्मा शामिल थे। इसके अलावा दो राज्य मंत्रियों सोमेंद्र तोमर और अजीत पाल का प्रमोशन किया गया था। ये दोनों पहले राज्य मंत्री थे।
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बीजेपी के इस मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे को सोशल इंजीनियरिंग के दांव के तौर पर देखा जा रहा है। इसे अगले साल की शुरुआत में होने वाले यूपी विधानसभा चुनाव के नजरिये से रणनीतिक माना जा रहा है। पार्टी ने इस विस्तार के जरिये सामाजिक, जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण को साधने का प्रयास किया है। इसे विशेषकर अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले की काट के तौर पर देखा जा रहा है।
6 नए मंत्रियों में से 5 दलित और ओबीसी…
बता दें कि योगी सरकार ने जिन 6 नए मंत्रियों को मंत्रिमंडल विस्तार में शामिल किया है उनमें 5 दलित और ओबीसी समुदाय से हैं। जबकि एक ब्राह्मण है। पार्टी ने दलित, जाट, ब्राह्मण, पासी, वाल्मीकि, लोध और अन्य पिछड़़ा वर्ग के विभिन्न समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने का संदेश देने का प्रयास किया है।