EXCLUSIVE/ 'हम मुसलमानों को भी भाई मान लेंगे बशर्तें....', कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने क्यों कही ये बात?
अनिरुद्धाचार्य महाराज जी ने रिपब्लिक भारत के मंच से बताया ये भी कहा कि अगर मुसलमान उनकी कुछ शर्ते मान लें तो वो मुसलमानों को भी अपना भाई मान लेंगे।
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Aniruddhacharya: रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के समिट 'महाकुंभ महासम्मेलन' में हिस्सा लेने पहुंचे मथुरा के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने दुनिया में इस्लामिक, कैथोलिक देशों का उदाहरण देते हुए एक सनातनी देश की मांग भी रख दी है। उन्होंने कहा कि आखिर जब दुनिया में इस्लामिक और क्रिश्चियनों के लिए कई देश हो सकते हैं तो फिर सनातन के लिए क्यों नहीं। इस दौरान उन्होंने ये भी बताया कि आखिर सनातनी देश होना क्यों जरूरी है। 'वायरल बाबा' के नाम से मशहूर अनिरुद्धाचार्य महाराज जी ने रिपब्लिक भारत के मंच से बताया ये भी कहा कि अगर मुसलमान उनकी कुछ शर्ते मान लें तो वो मुसलमानों को भी अपना भाई मान सकते हैं।
अनिरुद्धाचार्य महाराज जी ने आगे कहा कि अभी राजनीतिक गलियारों में ये बात उठी थी कि जातीय जनगणना होनी चाहिए। मैं कहता हूं जातीय जनगणना नहीं ये पता लगाओ कि कितने सनातनी हिंदू हैं और कितने मुसलमान हैं। उन्होंने ये भी कहा कि अगर वो गाय को माता कहने के लिए तैयार हैं तो हम गले लगाकर उन्हें भाई मान लेंगे। वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि हम चार भाई हैं। पहला भाई है सनातनी हिंदू, दूसरा है सिख, तीसरा जैन और चौथे हमारे भाई हैं बौद्ध। क्योंकि इन चारों की विचारधारा कहीं-कहीं पर मिलती जुलती है। हम गाय को माता कहते हैं और आप उसे मारकर खाते हैं, तो आप हमारे भाई कैसे हुए? इसलिए आप हमारे भाई बनने के योग्य नहीं हैं। हां अगर आप गाय माता को माता गंगा माता को माता मानते हैं तो हम जरूर आपको अपना भाई मान लेंगे।
अगर देश मुस्लिम राष्ट्र हो गया तो क्या यहां पर हिन्दू, जैन, बौद्ध और सिख रह पाएंगे?
सनातन राष्ट्र क्यों होना चाहिए इसका भी मैं एक कारण आपको बताऊं कि बहुत सारे देश हैं जो मुस्लिम देश हैं क्रिश्चियन देश हैं। अगर बहुत सारे क्रिश्चियन और मुस्लिम देश हो सकते हैं तो फिर एक सनातनी देश क्यों नहीं हो सकता है। ये तो हुआ पहला और दूसरा कि थोड़ी देर के लिए सोच लीजिए कि अगर ये सनातन राष्ट्र नहीं बना और इस इस देश में मुसलमानों की संख्या अधिक हो गई और यदि ये हिन्दू राष्ट्र न होकर मुस्लिम राष्ट्र हो गया तो फिर मेरा सवाल खड़ा होगा कि क्या इस देश में हिन्दू, सिख, जैन और बौद्ध धर्म के लोग रह पाएंगे। इसलिए हमने कहा कि चार भाई हो चारों मिलकर खड़े हों।
महिलाओं को बताया समर्पण की प्रतिमूर्ति
समर्पण की प्रतिमूर्ति अगर किसी को कहा जाए तो समर्पण की प्रतिमूर्ति होती है स्त्री। स्त्री के भीतर जितना समर्पण होता है इतना किसी और के भीतर नहीं होता है। जब स्त्री का विवाह होता है तो वो अपना सबकुछ छोड़ देती है वो अपने नाम के साथ अपनी जाति और गोत्र भी छोड़ देती है और पति के नाम पति की जाति और पति के गोत्र के नाम से जानी जाती और पहचानी जाती है। ये समर्पण है कि अपनी जाति का विलय कर दिया, समाप्त कर दिया ये समर्पण है। उसी तरह से एक भक्त जब अपने आपको समर्पित करता है तो भगवान कहते हैं, 'सन्मुख होहिं जीव मोहिं जबहिं, जन्म कोटि अघनाशय तबहिं।... ' भगवान गीता के 18वें अध्याय के 66वें श्लोक में कहते हैं कि अर्जुन शरणागति जरूरी है। देखो जबतक समर्पण नहीं होगा... समर्पण किए ही नहीं शरणागति हुई ही नहीं तो फिर भगवान स्वीकार कैसे करेंगे?
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समर्पण के लिए दिया अर्जुन, सुग्रीव, विभीषण और द्रौपदी का उदाहरण
अर्जुन ने समर्पण किया, सुग्रीव ने समर्पण किया विभीषण ने जब तक समर्पण नहीं किया कहां काम बना उनका... तो भगवान के चरणों में समर्पण तो करना ही पड़ेगा। द्रौपदी ने चीर हरण के दौरान सबको बुलाया था अर्जुन आओ, भीम आओ, नकुल आओ... जब दुःशासन चीर खींच रहा था तब सबको तो बुलाया और आखिरी समर्पण कहां किया भगवान के सामने किया। समर्पण भगवान में ही हो और कहीं क्यों हो यदि आपने जगत में कहीं और समर्पण कर दिया है तो वो आपका फायदा उठा लेगा, लेकिन वो भगवान हैं जो सदा आपको फायदे में रखते हैं।