UP: संभल में सनातन का एक और सबूत, शाही जामा मस्जिद के पास मिली पृथ्वीराज चौहान की बावड़ी

बावड़ी के ऊपर एक विशालकाय वृक्ष है उसे वृक्ष के नीचे से बावड़ी में जाने का रास्ता है अमूमन पिछले कई सालों से किसी को छुपाने के लिए ऐसी बावड़ी बनाई जाती थी।

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संभल में सनातन का एक और सबूत, शाही जामा मस्जिद के पास मिली पृथ्वीराज चौहान की बावड़ी | Image: R Bharat

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में शिव मंदिर मिलने के बाद से ही नई-नई जगहों पर खुदाई जारी है अब चंदौसी में बावड़ी की खुदाई के दौरान पृथ्वीराज चौहान की बावड़ी मिली है। ये जगह संभल की शाही मस्जिद से महज 3 किलोमीटर की दूरी पर है। रिपब्लिक भारत की टीम ने सबसे पहले इस बावड़ी की जानकारी हासिल की और अपने पाठकों के लिए लगातार इस पर अपडेट जारी कर रहा है। राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान की सेना को ठहरने के लिए यह बावड़ी बनाई गई थी। पहले हमें इस बात की जानकारी मिली कि ये महज 16 साल पुरानी बावड़ी है लेकिन बाद में जब हमारी टीम और नीचे गई और वहां पर बनी नक्कासी को देखकर इस बात का दावा किया गया कि ये पृथ्वीराज चौहान की बावड़ी है।


शुरुआत में जब रिपब्लिक भारत की टीम इस बावड़ी में पहुंची तो उसे पता चला कि ये सिर्फ 16 साल पुरानी है क्योंकि इसमें दो मंजिल ही नजर आ रही थी। जब हमारी टीम इस प्राचीन बावड़ी के अंदर पहुंची तो पता चला ये 16 मंजिला है। इसमें महज 2 मंजिल ही ऊपर नजर आ रही थी बाकी का हिस्सा जमीन में धंस गया था। बिल्कुल खेतों के बीचो-बीच बनी यह बावड़ी बेहद प्राचीन है। बावड़ी के अंदर जाने पर प्राचीन नक्कासी और गेट साफ तौर पर नजर आ रहे हैं।


संभल में सनातन का एक और सबूत

बावड़ी के ऊपर एक विशालकाय वृक्ष है उसे वृक्ष के नीचे से बावड़ी में जाने का रास्ता है अमूमन पिछले कई सालों में शादियों के दौरान किसी को छुपाने और लोगों की नजर से दूर रखने के लिए जमीन के नीचे इस तरीके की बावड़ी बनाई जाती थी। चंदौसी में बावड़ी की जब खुदाई शुरु हुई तो पता लगाओ वह तीन मंजिला है लेकिन संभल में पृथ्वीराज चौहान की जो बावड़ी है वह 16 मंजिला की है। बताया जाता है कि इस बावड़ी में सेवा के पानी पीने की व्यवस्था थी। संभल में जामा मस्जिद इलाके के पास पृथ्वीराज चौहान की बावड़ी का पाया जाना संभल के सनातन से रिश्ते पर एक और पुख्ता मुहर लगाता है।


पृथ्वीराज चौहान की बावड़ी में वॉच टावर

पृथ्वीराज चौहान की इस बावड़ी के बाहर कर वॉच टावर बनाए गए थे जहां पर सैनिक बावड़ी की निगरानी करती थी। यह खेतों के बीचोबीच बनी है जिसमें से अंदर जाने का रास्ता भी साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। संभल प्रशासन संभल के अस्तित्व उसकी विरासत को रिवाइव करने की बात कर रहा है तो वहीं पृथ्वीराज चौहान की बावड़ी अभी भी प्रशासन की नजरों से दूर है। अब यहां देखने वाली बात ये होगी कि आने वाले समय में संभल प्रशासन ऐसी ऐतिहासिक धरोहर के विकास के लिए क्या कदम उठाता है।

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Published By:
 Ravindra Singh
पब्लिश्ड