यूपी में चुनाव से पहले योगी सरकार महिलाओं को दे सकती हैं बड़ा तोहफा, मिल सकते हैं 50 हजार; पहली किस्त में 20 हजार देने की तैयारी
विधानसभा चुनाव से सीएम योगी यूपी में महिलाओं के लिए बड़ी योजना की तैयारी में है। योजना के तहत महिलाओं को ₹50 हजार तक की आर्थिक मदद मिल सकती है।
- भारत
- 2 min read

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए योगी सरकार एक नई योजना की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, इस योजना के तहत महिलाओं को अधिकतम 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जा सकती है। यह राशि महिलाओं के खाते में सीधी ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
प्रस्ताव के मुताबिक, चुनाव से पहले महिलाओं के बैंक खातों में 20 हजार रुपये की पहली किस्त सीधे ट्रांसफर करने का प्रावधान है। वहीं, अगर प्रदेश में भाजपा सरकार फिर से बनती है तो इसके बाद 10-10 हजार रुपये की तीन और किस्तें दी जा सकती हैं। इस तरह कुल सहायता राशि 50 हजार रुपये तक हो जाएगी। विधानसभा चुनाव से पहले योजना को लागू करने पर विचार चल रहा है।
बिहार के तर्ज पर यूपी में महिलाओं को मिल सकती है मदद
योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक मदद देना, स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। बिहार की ‘महिला सहायता’ योजना की तर्ज पर यूपी में भी यह योजना लागू करने पर विचार किया जा रहा है। बता दें कि बिहार में चुनाव से पहले नीतीश सरकार ने महिलाओं के खातों में आर्थिक सहायता भेजने की पहल की थी,जिसके चुनाव में लाभ भी देखने को मिला था।
योजना में किन-किन महिलाओं को शामिल करने पर विचार
मिली जानकारी के मुताबिक, योजना में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को प्राथमिकता दी जा सकती है। वहीं, SC, ST, BPL और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की महिलाओं को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा ऐसे परिवारों की महिलाओं को भी योजना में शामिल करने पर विचार हो रहा है, जिनकी सालाना आय 12 लाख लाख तक है।
Advertisement
CM योगी की महिला वोट बैंक को साधने की तैयारी
सरकार योजना को केवल बेहद गरीब परिवारों तक सीमित रखने के बजाय व्यापक आर्थिक दायरे में लाने पर मंथर कर रही है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि फिलहाल योजना पर सरकार में मंथन चल रहा है। अंतिम फैसला, पात्रता की शर्तें और अन्य दिशानिर्देश अभी तय नहीं हुए हैं। राजनीतिक विश्लेषक इसे महिला वोट बैंक को साधने की दिशा में एक बड़ी कवायद के रूप में देख रहे हैं।