'जिन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान राम भक्तों पर अत्याचार की पराकाष्ठा की, वे भी आज राम-राम चिल्ला रहे हैं', गोरखपुर में गरजे CM योगी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में विपक्ष और अयोध्या पर दुष्प्रचार करने वालों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत को कमजोर करने वाले लोग अयोध्या के भव्य दीपोत्सव और समयसीमा से पहले राम मंदिर के निर्माण को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि जो लोग कभी रामलीला देखने तक नहीं गए और राम भक्तों पर अत्याचार करते थे, वे आज राजनीतिक स्वार्थ के लिए राम का नाम ले रहे हैं।
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधित करते हुए विरोधी ताकतों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जो लोग भारत को कमजोर करना चाहते हैं, वे देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रगति को कभी भी सहन नहीं कर सकते। मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अयोध्या और सनातन संस्कृति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है।
'त्रेता युग का स्मरण और भव्य दीपोत्सव से परेशानी'
मुख्यमंत्री योगी ने तंज कसते हुए कहा कि अयोध्या में त्रेता युग की तर्ज पर हो रहे भव्य दीपोत्सव और समयसीमा से पहले प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर के निर्माण से कुछ लोगों के पेट में दर्द हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग भारत की सांस्कृतिक पहचान को धूमिल करने के लिए लगातार दुष्प्रचार का सहारा ले रहे हैं। जो लोग आज अयोध्या के खिलाफ अनाप-शनाप बोल रहे हैं, उन्होंने अपने जीवन में कभी रामलीला के दर्शन तक नहीं किए।
कालनेमी रूपी बहरूपियों से सावधान रहने की अपील
अपने संबोधन में सीएम योगी ने राजनीतिक पाखंड पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान राम भक्तों पर अत्याचार की सारी हदें पार कर दी थीं, आज वे भी अचानक 'राम-राम' चिल्लाने लगे हैं। उन्होंने रामायण के पात्र का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार छल करने वाला 'कालनेमी' भी राम नाम का जाप करता था, उसी प्रकार आज के बहरूपिए भी मुखौटा पहनकर जनता को गुमराह कर रहे हैं।
बजरंग बली जैसा सामर्थ्य जरूरी
मुख्यमंत्री ने जनता से आह्वान किया कि उन्हें भगवान बजरंग बली की तरह विवेक और सामर्थ्य दिखाना चाहिए, ताकि वे सही और गलत में आसानी से भेद कर सकें। उन्होंने कहा कि सनातन आस्था और देश के विकास में रोड़ा अटकाने वाली ताकतों को पहचान कर उनका वैचारिक रूप से मुकाबला करने की आवश्यकता है। यह बयान राज्य में राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा का विषय बना हुआ है।