'आज का राजा गाय को मां नहीं मानता...',स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना नाम लिए सरकार पर किया तीखा प्रहार; बोले- अब ललकारना जरूरी
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रदेश की सरकार पर सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि सत्ता में बैठे लोग गाय को माता नहीं बल्कि संपत्ति मान बैठे हैं। ऐसे में उन्हें चुनौती देने के लिए संत समाज बाध्य है।
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Swami Avimukteshwaranand: जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासन के बीच चल रहा तनाव और विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। अब संत ने एक बार फिर सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने कहा है कि आज देश पर शासन करने वाले लोग गाय को 'मां नहीं बल्कि संपत्ति' मानते हैं। ऐसे में उन्हें चुनौती देना जरूरी हो गया है।
दरअसल, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शनिवार को जौनपुर में गौमती नदी के किनारे मौजूद ऋषि जमदग्नि के आश्रम में दर्शन करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने यूपी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, 'आज का राजा गाय को माता नहीं मान रहा है। बल्कि उसे संपत्ति के रूप में देखने लगा है। ऐसे में उसे ललकारना जरूरी हो गया है।'
गौ-रक्षा के मुद्दे को लेकर यात्रा शुरू
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ-रक्षा के मुद्दे को लेकर गोप्रतिष्ठा धर्मयुद्ध यात्रा शुरू की है। जो कि 7 मार्च से वाराणसी से शुरू हो चुकी है और लखनऊ तक जाएगी। वह 11 मार्च को लखनऊ में जनसभा करेंगे।
'अल्टीमेटम खत्म होने के बाद बड़ा अभियान'
उन्होंने कहा कि गाय को 'राष्ट्र माता' घोषित करने और गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए 40 दिन की मोहलत दी गई थी। ऐसे में समय सीमा समाप्त होने पर 11 मार्च को लखनऊ में गौ संरक्षण के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया जाएगा। इतना ही नहीं, उन्होंने 11 मार्च के आंदोलन में सीएम योगी को भी शामिल होने का निमंत्रण दिया।
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'संत समाज आवाज उठाने को मजबूर'
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में माता के समान मानी जाती है। ऐसे में अगर शासन करने वाले उसे सिर्फ संपत्ति मानकर देखेंगे तो यह परंपरा और आस्था का अपमान है। इसलिए संत समाज इस मुद्दे पर आवाज उठाने को मजबूर हो गया है।
'अन्याय का विरोध, संत समाज का दायित्व'
वह कहते हैं कि महर्षि यमदग्नि का आशीर्वाद लेकर वो अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करने का संकल्प लेकर निकल पड़े हैं। संत समाज का दायित्व बनता है कि वह समाज और धर्म की रक्षा के लिए समय-समय पर अन्याय का पुरजोर विरोध करें।