'यहां परीक्षा का प्रश्न-पत्र लीक होते होते SIT रिपोर्ट भी लीक हो गई, अब जांच का मतलब...',चंपत राय की चिट्ठी पर अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद का तंज
Ram Mandir Donation Theft: समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने बुधवार को राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी के मामले में चंपत राय द्वारा लिखे पत्र पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि SIT की जांच का अब कोई मतलब नहीं रह गया है, इसके नतीजे पहले ही लीक हो गए थे।
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Ram Mandir Donation Theft: मंगलवार, 7 जुलाई को अयोध्या में राम मंदिर के दानपात्रों से जुड़े कथित गबन मामले में ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद चंपत राय ने पहली बार एक पत्र जारी कर खुद पर लगे आरोपों, SIT जांच और अपनी चुप्पी की वजह पर विस्तार से बात की है।
अब आज यानी, 8 जुलाई को समाजवादी पार्टी के नेता और अयोध्या के सांसद अवधेश प्रसाद ने चंपत राय द्वारा लिखे पत्र पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि SIT की रिपोर्ट ही लीक हो गई है, तो किसी और बात का कोई मतलब नहीं रह जाता। सांसद अवधेश प्रसाद के इस बयान से यूपी की सियासी में हलचल और तेज हो गई है।
SIT की जांच का अब कोई मतलब नहीं-अवधेश प्रसाद
राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी के मामले में चंपत राय के पत्र पर SP सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा 'SIT की जांच का अब कोई मतलब नहीं रह गया है, इसके नतीजे पहले ही लीक हो गए थे। आमतौर पर परीक्षा के पेपर लीक होते थे। हमारे राज्य में छात्रों को ऐसी स्थितियों का सामना करना पड़ा है, जहां अलग-अलग परीक्षाओं के प्रश्न-पत्र लीक हो जाते थे। लेकिन अब जब SIT की रिपोर्ट ही लीक हो गई है, तो किसी और बात का कोई मतलब नहीं रह जाता।'
गोपनीय होनी चाहिए थी, पर मीडिया द्वारा प्रकाशित
SP सांसद अवधेश प्रसाद ने आगे कहा कि 'मैं यह खुद से नहीं कह रहा हूं, मैं SIT रिपोर्ट के आधार पर बोल रहा हूं, जो पूरी तरह गोपनीय होनी चाहिए थी, लेकिन अब मीडिया द्वारा प्रकाशित कर दी गई है इसलिए इस जांच का मकसद ही खत्म हो गया है।
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पूर्व महासचिव चंपत राय ने पत्र में क्या लिखा?
पूर्व महासचिव चंपत राय ने पत्र में लिखा ‘6 जून 2026 से मंदिर परिसर के दानपात्र की गिनती के दौरान हुई चोरी को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं, और निजी तौर पर उन पर भी कई अनुचित आरोप लगाए गए हैं। इन सबके बावजूद उन्होंने अब तक मौन धारण किए रखा, क्योंकि मंदिर ट्रस्ट की 6 जुलाई को हुई बैठक में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की जा चुकी थी और वह रिपोर्ट अब सार्वजनिक हो चुकी है।’
आगे उन्होंने लिखा 'मैं अक्टूबर 1991 से वे संगठन द्वारा अयोध्या भेजे गए थे और तब से उनका करीब 45 साल का प्रचारक जीवन रहा है। उनका कहना है कि जहां-जहां भी वे रहे, उनका आचरण "खुली किताब" के समान रहा है। सभी को आदर पूर्वक नमन।'