BJP को वोट देता था मृतक इसलिए इमाम ने जनाजे में नमाज पढ़ने से किया इनकार, बताया- 'गुस्ताख ए रसूल'
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मौलाना ने एक शख्स की मौत पर जनाने की नमाज पढ़ने से साफ इंकार कर दिया।
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UP News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मौलाना ने एक शख्स की मौत पर जनाने की नमाज पढ़ने से साफ इंकार कर दिया। आरोप है कि मृतक के बीजेपी सपोर्टर होने की वजह से इमाम ने नमाज पढ़ने से मना किया है।
इसके बाद कुंदरकी के रहने वाले युवक ने मौलाना के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। मृतक के बेटे की तहरीर पर पुलिस ने इमाम और चार लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
'तुम्हारे पिता बीजेपी सपोर्टर, नहीं पढूंगा जनाजे में नमाज…'
दरअसल, मुरादाबाद के कुंदरकी थाना क्षेत्र के रहने वाले दिल नवाज खान ने मुरादाबाद के जिलाधिकारी को शिकायत की है। दिल नवाज का कहना है कि उनके पिता अलीदाद जो बीजेपी के वोटर सपोर्टर हैं,
उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। पिता की मौत के बाद मस्जिद के इमाम को नमाज पढ़ने के लिए कब्रिस्तान बुलाया गया। पहले तो इमाम ने कब्रिस्तान में आने की हामी भर दी, लेकिन फिर उसके बाद अचानक इनकार कर दिया। दिल नवाज खान के मुताबिक, मौलवी ने कहा कि तुम्हारे पिता बीजेपी के सपोर्ट करते हैं और यह मुसलमान के खिलाफ है, इसलिए मैं उनके जनाजे में नमाज नहीं पढूंगा।
पुलिस ने एफआईआर की दर्ज
मौलवी के जनाजे की नमाज पढ़ने से मना करने के बाद नवाज ने जिलाधिकारी को शिकायत की। इस तहरीर में इमाम समेत अन्य दो से तीन लोगों के नाम हैं। नवाज का आरोप है कि कुछ अन्य लोगों के बहकावे में आकर ही मौलवी ने इंकार कर दिया। कथिततौर पर बहकाने वालों में से एक कुंदरकी का पूर्व अध्यक्ष है। नवाज ने बताया कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर लिया है। वह मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई चाहता है।
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वहीं इसके बाद मुरादाबाद पुलिस ने आरोपी असलम पुत्र नवावजान (पूर्व चैयरमैन), शमीम खां पुत्र सलीम खां, सराफत खां पुत्र बाबू खां, मतीन खां पुत्र शादिक खां, जिला मुरादाबाद और इमाम राशिद पुत्र रईस निवासी-कुन्दरकी, स्टेशन वाली मस्जिद कस्बा व थाना कुन्दरकी जनपद मुरादाबाद के खिलाफ धारा 254/24 171/351(2)/(3) बीएनएस में मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस विवेचना के बाद कार्यवाही की बात कह रही है।
'इमाम बोले- मैं उन्हें जानता तक नहीं'
उधर पूरे मामले में इमाम राशिद की माने तो वह दिल नवाज को जानते तक नहीं है। उन्होंने नवाज से ऐसी किसी भी तरह की बात तक नहीं कही है। इमाम का कहना है कि वह उनके पिता के जनाजे में इसलिए शामिल नहीं हुए क्योंकि वह पैगंबर मोहम्मद के लिए उल्टा सीधा बोलते थे। इसके साथ ही इमाम ने खुद पर लगे सभी आरोपों को झूठा बताया है।