कभी रानियां करती थी इस कुएं में स्नान, रहती थी खूब रौनक; अब खत्म हो गया अस्तिव

स्थानीय लोग बताते है कि उन्होंने यहां कुआं देखा है। पुराने समय में सुरंग से होकर बादशाह यहां आते थे और उनकी रानियां इस कुएं में स्नान करती थीं।

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UP News: उत्तर प्रदेश के संभल में प्राचीन हरिहर मंदिर मिलने के बाद अलग-अलग जिलों में प्राचीन धरोहर सामने आ रही हैं। लेकिन मुश्किल ये है कि इनमें से कई का अस्तित्व खत्म हो चुका और की पूरी तरह से खंडहर हो चुकी हैं। ऐसी ही एक सदियों पुरानी धरोहर शामली में है। शामली के थानाभवन में ऐतिहासिक 'बाव वाला कुआं' का अस्तित्व ही मिट गया है। स्थानीय लोग बताते हैं कि पुरानी जमाने में यहां रानियां नहाया करती थीं।

शामली जिले की कई पुरानी धरोहरों का अस्तित्व खत्म हो गया है। जो बची भी हैं वो रख-रखाव के अभाव में धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही हैं। जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आने वाली पीढ़ी में ये धरोहरें पूरी तरह से मिट जाएगी। थानाभवन में एक ऐसा ही बाव वाला कुआं भी है। जो बेहद प्राचीन और ऐतिहासिक होने के बाद भी लोगों की नजरों से ओझल हो गया है। ये कुआं थानाभवन में स्थित ईदगाह के पास हुआ करता था।

ऐतिहासिक 'बाव वाला कुआं' का इसी जगह पर था

'रानियां करती थी स्नान'

बाव वाला कुआं का नाम अब सिर्फ बुर्जुगों की जुबान पर रह गया है। अब इस कुएं का कोई अस्तित्व नहीं है। स्थानीय लोगों ने कुएं में मिट्टी भराव कर बाउंड्री के अंदर कर लिया है। पड़ोस में ही रहने वाले 95 साल भज्जू ने रिपब्लिक भारत को बताया कि ‘मैंने छोटे रहते इस कुएं को देखा है। बुजुर्ग बताते हैं कि यह कुआं हजारों साल पुराना है। कुएं में नीचे उतरने के लिए सीढ़ियां बनी हुई थी। कुआं बड़े व्यास का था और अंदर एक और कुआं मौजूद था। पुराने समय में यहां रानियां स्नान करती थी।’ भज्जू ने बताया कि 

'कुएं के साथ यहां कई सुरंगे भी हैं। कुएं से कस्बे के अंदर और दूसरी जगहों पर जाने के लिए सुरंगों का इस्तेमाल होता था। करीब 50 साल पहले जब हमारे घर में पानी के लिए बोरिंग कराया था, तो उनके घर के नीचे सुरंग मिली थी। अब कुएं पर कुछ लोगों ने बाउंड्री करके मिट्टी भराव कर अपने कब्जे में ले लिया है।'

'जलालाबाद और दिल्ली जाती थी सुरंग'

पास ही रहने वाले अजीज ने रिपब्लिक को बताया कि पुराने समय में यहां पर कुआं होता था। इस कुएं में कई दरवाजे हैं और उन दरवाजों से सुरंग जलालाबाद, दिल्ली ओर कस्बे की ओर जाती थी। कुएं में भरे कीचड़ से मिट्टी निकालकर स्थानीय लोग अपने कच्चे घरों पर लगाते थे। अगर आज खुदाई हो, तो छोटी ईटों से बना कुआं सामने आ जाएगा।

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60 साल हमीद भी बताते हैं कि कुएं के अंदर कमरे भी बने हुए हैं। पुराने समय में सुरंग से होकर बादशाह यहां आते थे और उनकी रानियां इस कुएं में स्नान करती थीं। कुएं में सीढ़ियां थी, लेकिन अब इसका अस्तित्व खत्म हो चुका है।

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Published By:
 Sagar Singh
पब्लिश्ड