अपडेटेड 25 February 2026 at 08:30 IST
10 मिनट में अधिकारियों को 'माननीयों' के फोन का देना होगा जवाब, यूपी में 'संवाद सेतु' की शुरुआत, पहले गाजियाबाद समेत इन 3 जिलों में होगी शुरू
Samvad Setu: उत्तर प्रदेश में जनप्रतिनिधियों के फोन का अधिकारियों को 10 मिनट में जवाब देना अनिवार्य किया जाएगा। ‘संवाद सेतु’ की पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत हो रही है। सबसे पहले तीन जिलों हरदोई, गाजियाबाद और कन्नौज में कमांड सेंटर स्थापित होंगे।
- भारत
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UP News: जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए आज (25 फरवरी) से उत्तर प्रदेश में एक नई पहल की शुरुआत होने जा रही है। यूपी सरकार 'संवाद सेतु' की शुरुआत कर रही है, जो राज्य में लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करने का प्रयास है। अब अधिकारियों को विधायक, सांसद या अन्य जनप्रतिनिधि के फोन का 10 मिनट के अंदर जवाब नहीं देता है। ये व्यवस्था पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर फिलहाल तीन जिलों गाजियाबाद, हरदोई और कन्नौज में आज से शुरू हो रही है, जहां एक आधुनिक 'डिस्ट्रिक्ट कॉन्टैक्ट एंड कमांड सेंटर' (DCCC) स्थापित होगा। बाद में इसे अन्य जिलों में भी लागू किया जाएगा।
सेंटर से होगी ट्रैकिंग
इस सेंटर के माध्यम से जनप्रतिनिधियों के कॉल्स और मैसेजेस की ट्रैकिंग होगी, जिससे अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी। दरअसल, हाल के वर्षों में कई एमएलए ने शिकायत की थी कि जिला प्रशासन के अधिकारी उनके फोन कॉल्स को नजरअंदाज करते हैं या समय पर जवाब नहीं देते, जिससे विकास कार्यों में देरी होती है।
17 फरवरी को विधानसभा में भी यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया था। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने आरोप लगाया था कि कई अधिकारी विधायकों के फोन नहीं उठाते हैं। इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी की गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी
10 मिनट में कॉल बैक करना अनिवार्य
वहीं, समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा था कि 'संवाद सेतु' न केवल एक पुल का काम करेगा, बल्कि अधिकारियों की कार्यशैली की निगरानी भी करेगा। अगर कोई एमएलए या एमपी अधिकारी को कॉल करता है, तो संबंधित अधिकारी को 10 मिनट के अंदर कॉल बैक करना अनिवार्य होगा। कोई छुट्टी पर है, तो ऐसे में जनप्रतिनिधि को वैकल्पिक अधिकारी से संपर्क करने को कहा जाएगा।
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इसमें अधिकारियों के वर्क-लाइफ बैलेंस का भी ध्यान रखा गया है। यह व्यवस्था केवल कार्य दिवसों और कार्यालय समय के दौरान ही प्रभावी होगी। सेंटर में 3 प्रशिक्षित ऑपरेटर भी तैनात किए जाएंगे।
इस ऐप के जरिए सभी कम्युनिकेशन को रिकॉर्ड किया जाएगा, जिससे नेग्लिजेंस के मामलों को सरकार तक रिपोर्ट किया जा सके। त्वरित प्रतिक्रिया देने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि लापरवाही की स्थिति में रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। 'संवाद सेतु' का डिजाइन सरल और प्रभावी है। यह एक मोबाइल ऐप के रूप में काम करेगा, जहां जनप्रतिनिधि अपनी शिकायतें या सुझाव सीधे दर्ज कर सकेंगे। DCCC सेंटर में एक टीम होगी जो रियल-टाइम मॉनिटरिंग करेगी।
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बाद में पूरे राज्य में होगी लागू
पायलट जिलों में इस प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद इसे पूरे राज्य में विस्तारित करने की योजना है। मंत्री असीम अरुण ने खुद भी यह स्वीकार किया था कि वे भी अतीत में ऐसी समस्याओं से गुजरे हैं, इसलिए यह सिस्टम न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि विश्वास भी बहाल करेगा।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 25 February 2026 at 08:30 IST