जब-जब भारत बटा, तब-तब भारत कटा... CM योगी के बाद स्वामी चिदानंद सरस्वती ने भी क्यों दोहराया?

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के भव्य 'महाकुंभ महासम्मेलन' में स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने महाकुंभ से लेकर बदलते भारत और नई पीढ़ी की सोच पर अपने विचार रखे।

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Swami Chidanand Saraswati
Swami Chidanand Saraswati | Image: Republic

रिपब्लिक भारत के 'महाकुंभ महासम्मेलन' का शानदार आगाज राजधानी लखनऊ में हुआ। कार्यक्रम में सीएम योगी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इसके अलावा भव्य महाकुंभ सम्मेलन में कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की। स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज भी रिपब्लिक के महासम्मेलन में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रयागराज में आयोजित होने जा रहे महाकुंभ और सनातन धर्म पर अपने विचार रखे।


रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के भव्य 'महाकुंभ महासम्मेलन' में स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने महाकुंभ को लेकर कहा कि इस भव्य आयोजन के लिए सबसे पहले पीएम मोदी और सीएम योगी को सबसे बड़ा आभार देना चाहूंगा। मैं 1975 के बाद से सारे कुंभ देख रहा हूं। मगर इस बार के महाकुंभ को लेकर जो तैयारियां है और लोगों के दिलों में भी जो तैयारियां चल रही है,ऐसा मैंने पहले कभी नहीं देखा था।

इस बार का महाकुंभ बेहत खास-चिदानंद सरस्वती

रिपब्लिक के मंच पर स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि मैं पिछले दिनों हिमालय गया था तो वहां मुझे लोग मिले जिन्होंने दुनिया की मोह माया को छोड़ दिया है। 90 से 95 साल की उम्र हो गई। मगर वो लोग भी इस बार महाकुंभ में आने के लिए बहुत उत्सुक हैं। स्वामी चिदानंद ने कहा कि इस बार के महाकुंभ वो भी आने चाहते हैं जिन्होंने दुनिया की सारी मोह माया छोड़ दी है।

जब-जब भारत बंटा, तब-तब देश कटा- चिदानंद सरस्वती 

स्वामी चिदानंद सरस्वती जी महाराज ने भी सीएम योगी की बातों को दोहराता हुए कहा कि इतिहास ने देखा है कि भारत जब-जब बटा है, तब-तब भारत कटा है। उन्होंने आगे कहा, भारत जब-जब बटा है तब-तब इस देश का नक्शा कटा है। अफगानिस्तान, पाकिस्तान और POK को देखिए। बांग्लादेश को देख लीजिए, जिसको जन्म दिया वो आंखे दिखा रहा है। तो भारत को एक जुट होने की जरूरत है।

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आज का भारत नया भारत है- चिदानंद सरस्वती 

आज का भारत एक नए भारत की ओर बढ़ रहा है, तो मैं कहना चाहता हूं कि एक महाभारत हुआ था, लोगों ने देखा और दूसरे महाभारत के लिए कुछ लोगों नए-नए निगेटिव नैरेटिव धड़ने की तैयारी में हैं। मगर मैं यह कहना चाहता हू कि ये देश निगेटिव नैरेटिव पर नहीं ये पॉजिटिव नैरेटिव के बल पर खड़ा हुआ है। ये देश नारों के बल पर नहीं बल्कि संस्कारों के बल पर खड़ा हुआ है और इस महाकुंभ में ये संस्कार देखने को मिलेगा। 

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Published By:
 Rupam Kumari
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