Mahakumbh: महाकुंभ में जाति,वर्ण, उपासना का कोई भेद नहीं; यहां हिंदुत्व ही प्रधान है- जगद्गुरु रामभद्राचार्य
Mahakumbh: महाकुंभ में पहुंचे जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि इसी योग में अमृत का कलश प्रयागराज में उपस्थित हुआ है, यह शुद्ध अमृत योग बना है।
- भारत
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Mahakumbh 2025: सनातन आस्था की दुनिया के सबसे बड़े सांस्कृतिक महोत्सव महाकुंभ 2025 का आगाज 13 जनवरी से प्रयागराज में हो चुका है। 26 फरवरी तक चलने वाले इस महाआयोजन के लिए लाखों की संख्या में साधू-संत संगम नगरी में पवित्र स्नान के लिए पहुंचे हुए हैं। करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं। आंकड़ों की बात करें तो दोपहर 12 बजे तक करीब 7 करोड़ लोग कुंभ स्नान कर चुके हैं।
महाकुंभ में पहुंचे जगद्गुरु रामभद्राचार्य (Jagadguru Rambhadracharya) ने कहा कि इसी योग में अमृत का कलश प्रयागराज में उपस्थित हुआ है, यह शुद्ध अमृत योग बना है। यह हिंदुओं को जगाने के लिए आया है। सभी हिंदू जाग जाए, एक हो जाए। सह अस्तित्व का ध्यान रखें, अखंड भारत के लिए साथ आए। अमृत पीने का सबको मन करता है यही वजह है कि लोग महाकुंभ में खिंचे चले आ रहे हैं।
कुंभ वाली मौनी अमावस्या बेहद महत्वपूर्ण है- जगद्गुरु रामभद्राचार्य
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि जीवन भर व्यक्ति विष पीता है और यह वजह के लोग यहां करके अमृत पीकर के अपने विष को शांत करते हैं और राष्ट्र के लिए अमृत का संकल्प लेते हैं। कुंभ वाली मौनी अमावस्या बेहद महत्वपूर्ण है। हम राष्ट्र के उत्थान में लगेंगे और विकसित भारत बहुत जल्द बनेगा। सरकार ने इस बार जो व्यवस्था की है उसमें एक चींटी भी नहीं मरेगी और सभी लोग सकुशल स्नान करेंगे।
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महाकुंभ में जाति,वर्ण, उपासना का कोई भेद नहीं- जगद्गुरु रामभद्राचार्य
पुरानी सरकारों पर हमला बोलते हुए जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि पहले वाली सरकारों में धर्म के प्रति सहानुभूति नहीं थी। योगी जी को हिंदुत्व पर आत्मीयता है, उनकी व्यवस्था अच्छी है। PoK हमें मिल जाए यही लेकर के हम यज्ञ कर रहे हैं। पाक अधिकृत कश्मीर हमें मिल जाए इसलिए यज्ञ हो रहा है। सनातन धर्म का प्राण यज्ञ है। महाकुंभ में कोई जाति का भेद नहीं, कोई उपासना का भेद नहीं, कोई वर्ण का भेद नहीं, यहां हिंदुत्व ही प्रधान है।