Nikki Bhati Murder Case: सच दबा या समझौते ने छीन ली जुबान, जो बहन मांग रही थी इंसाफ कोर्ट में उसी ने पलट दिया बयान; सवाल- फिर कातिल कौन?
यूपी के ग्रेटर नोएडा के सिरसा कोतवाली के सिरसा गांव की वो दर्दनाक कहानी अब और भी उलझन भरी हो गई है। 21 अगस्त 2025 की रात जब 26 वर्षीय निक्की भाटी संदिग्ध परिस्थितियों में जलकर मरी, तो गांव में न्याय की एक आंच तो उठी पर सच्चाई का पारा उतरने के बजाय अब थम सा गया।
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यूपी के ग्रेटर नोएडा के सिरसा कोतवाली के सिरसा गांव की वो दर्दनाक कहानी अब और भी उलझन भरी हो गई है। 21 अगस्त 2025 की रात जब 26 वर्षीय निक्की भाटी संदिग्ध परिस्थितियों में जलकर मरी, तो गांव में न्याय की एक आंच तो उठी पर सच्चाई का पारा उतरने के बजाय अब थम सा गया। निक्की के परिवार ने शुरू से ही आरोप लगाए कि ससुराल पक्ष ने दहेज विवाद और पारिवारिक तनातनी के चलते उसकी हत्या की।
निक्की की बहन ने बाकायदा पुलिस के सामने स्टेटमेंट दिया। निक्की के बच्चों ने पुलिस को पापा द्वारा आग लगाने की पूरी बात बताई। हत्या की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने निक्की के पति का हाफ एनकाउंटर भी कर दिया लेकिन अब उसी परिवार पंचायत के सामने समझौता कर लिया है। इस समझौते ने सबको चौंका दिया है। हर तरफ सिर्फ यही सवाल है कि सच दब गया या समझौते ने उसकी जुबान छीन ली? अगर निक्की का ससुराल पक्ष कातिल नहीं तो फिर उसकी हत्या किसने की है?
निक्की की बहन भी कोर्ट में मुकर गई
निक्की की बहन कंचन ने शुरू में न्याय के लिए सबसे ज्यादा आवाजे उठाईं। उसने सरकार से न्याय की गुहार लगाई, कहा कि बहन को जिंदा जलाया गया। मगर जो सबसे ज्यादा रोती-चिल्लाती थी, वही अब कोर्ट में पक्षद्रोही (गवाह से मुकरने वाला) बनकर बैठी हुई मिली। कंचन दो बार कोर्ट में बयान दर्ज कराने नहीं गई। बुधवार को जब वह पहुंची तो उसका बयान ही पलट गया।
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जेल की दीवारों से समझौते तक
मुख्य आरोपी पति विपिन भाटी अभी भी लक्सर जेल में है। उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई जारी है। पर जमानत पर रिहा हुए ससुराल के कुछ प्रमुख सदस्यों जेठ रोहित, ससुर सतवीर और सास दयावती के बाहर आने के बाद मामला एक अलग रफ्तार पकड़ने लगा। गांव वालों की मानें तो रोहित ने रिहाई के बाद निक्की के माता-पिता और कंचन से संपर्क बढ़ाया। फिर क्या था रिश्तेदारों, दबाब और पंचायतों की आड़ में दोनों परिवारों के बीच पैंतरे चल पड़े।
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देवेंद्र जो विपिन का चचेरा भाई है ने करीब 20 दिन पहले ही ऐलान कर चुका था कि समझौता पूरा हो चुका है। निक्की की बहन कंचन के लिए ससुराल पक्ष के लोगों ने रूपवास गांव के पास आमका रोड पर बनी कॉलोनी में एक घर खरीदा है। चर्चा है कि ससुराल जाने के बजाय कंचन अपने पति व बच्चों के साथ इसी घर में रहेगी। तीन बीघा खेत में 1/3 हिस्सा निक्की व कंचन के बच्चों के नाम करने पर ससुराल पक्ष के लोगों ने सहमति दी है। दोनों पक्षों के बीच करीब एक महीने से पंचायतों का दौर चल रहा था।
कुछ दिनों पहले ग्रेटर नोएडा में पंचायत हुई थी। फैसले के तहत दोनों बच्चों के नाम संपत्ति करने, परिवार को आर्थिक सहयोग देने और निक्की की बहन कंचन को दोबारा उसकी ससुराल में रहने पर सहमति बनी थी साथ ही किराये से होने वाली आय में भी हिस्सा देने पर सहमति बनी। पंचायत में सगे संबंधी संग चुनिंदा लोग ही शामिल हुए थे। निक्की की ससुराल सिरसा व मायका रूपवास गांव के ग्रामीणों को भी इसकी भनक नहीं लगने दी।
कोर्ट में मुकदमा फिर पंचायत में समझौता कैसा?
निक्की की मौत का मुकदमा अदालत में अभी चल रहा है लेकिन दूसरी तरफ एफिडेविट देकर केस वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है। कुछ लोग इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं तो कई बच्चों के भविष्य को लेकर सहीं बता रहे है। अब सवाल यही है- अगर कोर्ट में मामला है, तो समझौता कैसे संभव हुआ? किसने दबाया, किसने मनाया? कंचन की अचानक चुप्पी और गवाह से मुकर जाना इस शब्द को और भी भयानक बना दिया और वो है आखिर 'कौन'? किसने ली निक्की की क्या अब रहस्य ही बनकर रह जाएगा?