Noida Engineer Death: वाह रे सिस्टम... 80 लोगों की टीम के सामने डूबकर मर गया युवराज, कार निकालने में लगा दिए 72 घंटे; कुछ न कर सका बेबस पिता

नोएडा इंजीनियर मौत मामले में NDRF की टीम ने मृतक युवराज मेहता की कार को पानी से निकाल लिया है। युवराज की मौत 16-17 जनवरी की दरमियानी रात को सेक्टर 150 में कंस्ट्रक्शन साइट पर पानी से भरे गड्ढे में उनकी कार गिरने से हुई थी।

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Engineer Yuvraj Mehta death case : नोएडा के सेक्टर 150 में नोएडा प्राधिकरण और बिल्डरों की लापरवाही से हुई इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के करीब 4 दिन बाद उनकी कार को गहरे पानी से बाहर निकाल लिया गया है। प्रशासन के लापरवाह रवैये का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरा मामला इतना हाइलाइट होने और सीएम योगी के संज्ञान लेने के बाद भी कार को निकालने में करीब 4 दिन लग गए।

16-17 जनवरी 2026 की दरमियानी रात, घने कोहरे में गुरुग्राम से घर लौटते समय युवराज की मारुति ग्रैंड विटारा कार सेक्टर-150 के एक निर्माणाधीन साइट पर अनियंत्रित होकर टूटी बाउंड्री वॉल से टकराई और करीब 30-70 फीट गहरे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। युवराज ने किसी तरह कार से बाहर निकलकर अपने पिता को फोन किया और मदद की गुहार लगाई, लेकिन रेस्क्यू में देरी और संसाधनों की कमी के कारण उनकी जान चली गई। वे करीब 2 घंटे तक जिंदगी-मौत की जंग लड़ते रहे, मोबाइल की टॉर्च जलाकर सिग्नल देते रहे, लेकिन मदद नहीं पहुंच सकी।

कार निकालने में 4 दिन क्यों लगे?

हादसे के बाद कार पानी में डूबी रही। NDRF, SDRF और फायर ब्रिगेड की टीमों ने रेस्क्यू किया, लेकिन गहराई, ठंडा पानी, लोहे की रॉड्स, कोहरा और उपकरणों की कमी ने काम मुश्किल बना दिया। आखिरकार 20 जनवरी को NDRF की टीम ने क्रेन की मदद से कार को बाहर निकाला और उसे ट्रक में लोड किया। यह तस्वीर देखकर सवाल उठता है kf एक इंसान की जान बचाने में तो सिस्टम फेल हो गया, लेकिन कार निकालने में भी 4 दिन क्यों लगे?

मौत के बाद एक्शन

यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की मिसाल है। गड्ढा महीनों से बिना बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर या लाइटिंग के खुला पड़ा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि 10-15 दिन पहले भी एक ट्रक इसी गड्ढे में गिरा था, लेकिन तब भी कोई सुधार नहीं किया गया। बिल्डर के खिलाफ FIR दर्ज हुई, एक को गिरफ्तार किया गया, नोएडा अथॉरिटी के CEO हटाए गए, जूनियर इंजीनियर की नौकरी गई, SIT जांच शुरू हुई, लेकिन ये सब मौत के बाद हुआ।

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यह घटना NCR के "स्मार्ट सिटी" नोएडा की असलियत दिखाती है, जहां विकास के नाम पर मौत के गड्ढे खुले छोड़ दिए जाते हैं। युवराज जैसा होनहार युवा सिर्फ कोहरे या हादसे की वजह से नहीं, बल्कि लापरवाही की वजह से मरा।

एक दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में बिल्डर  

इस मामले में पुलिस ने नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार किया है। कोर्ट ने अभय को 1 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेजा है। पुलिस ने हरियाणा के पलवल से अभय को गिरफ्तार किया था। इससे पहले वह मध्य प्रदेश के दतिया गया था। 

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Published By:
 Sagar Singh
पब्लिश्ड