'बेटियां बेटों से कम नहीं होती...', मुजफ्फरनगर में दूसरी बेटी के जन्म पर मना ऐसा जश्न, देखता रह गया पूरा शहर, ढोल-नगाड़ों के साथ गृह प्रवेश - VIDEO
Muzaffarnagar News: यह खबर समाज के उन लोगों के लिए एक बड़ी सीख है जो आज भी बेटियों को कमतर आंकते हैं। मुजफ्फरनगर के इस यादव परिवार ने दूसरी जन्मी बेटी का स्वागत बड़े ही धूम-धाम से किया।
- भारत
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Uttar Pradesh News: मुजफ्फरनगर में आज के दौर में जहां लोग बेटा-बेटी में फर्क करते नहीं थकते, वहीं उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से एक ऐसी खबर आई है जो समाज की संकीर्ण सोच पर करारा प्रहार करती है। यहाँ एक परिवार ने अपनी दूसरी बेटी के जन्म को किसी बड़े त्योहार की तरह मनाकर एक नई मिसाल पेश की है।
अस्पताल से घर तक जश्न का माहौल
जानकारी के अनुसार, 8 अप्रैल को कुसुम हॉस्पिटल में सुनील यादव के घर एक प्यारी सी बिटिया ने जन्म लिया। जैसे ही परिवार को पता चला कि घर में दूसरी बेटी आई है, खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। नाना-नानी और मामा-मामी समेत पूरे परिवार ने तय किया कि इस खुशी को यादगार बनाया जाएगा।
जब बिटिया को अस्पताल से छुट्टी मिली, तो उसे लेने के लिए खास फूलों से सजी गाड़ी पहुंची। अस्पताल से लेकर घर तक नन्ही परी का स्वागत ढोल-नगाड़ों और नाच-गाने के साथ किया गया। आलम यह था कि रास्ते में जो भी देख रहा था, वह इस परिवार की सोच को सलाम कर रहा था।
दिवाली की तरह सजा घर, मोहल्ले में बंटी मिठाइयां
बेटी के गृह प्रवेश के लिए पूरे घर को लाइटों और फूलों से ऐसे सजाया गया था, जैसे होली या दिवाली हो। पूरे मोहल्ले के लोग इस खुशी में शामिल हुए। परिवार ने न सिर्फ खुद खुशियां मनाईं, बल्कि पूरे मोहल्ले में मिठाइयां बांटकर यह संदेश दिया कि बेटी का आना दुख नहीं, बल्कि गर्व की बात है।
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“बेटियां बनेंगी अफसर” : पिता का संकल्प
नवजात के पिता सुनील यादव भावुक होकर कहते हैं, "आज मेरे घर साक्षात लक्ष्मी आई है। मेरी दो बेटियां हो गई हैं और मैं बहुत खुश हूं। मेरा सपना है कि मैं अपनी बिटिया को पढ़ा-लिखाकर IAS या IPS अफसर बनाऊं। लोग कहते हैं बेटियां बोझ हैं, लेकिन मैं कहता हूं बेटियां आसमान छू रही हैं।"
नाना ने बढ़ाया मान
वहीं बच्ची के नाना भुवन सिंह ने भी समाज को आईना दिखाते हुए कहा, "हमारी बिटिया बेटों से कहीं आगे हैं। आज सेना हो, बैंकिंग हो या प्रशासन, हर जगह लड़कियां अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। हमें गर्व है कि हमारे घर दूसरी 'देवी' ने कदम रखा है। इसकी पढ़ाई और सपनों के लिए पूरा परिवार ढाल बनकर खड़ा रहेगा।"
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सोसाइटी के लिए मैसेज
मुजफ्फरनगर के इस परिवार की यह पहल न केवल काबिले तारीफ है, बल्कि 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' के नारे को धरातल पर सच साबित करती है। यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर सोच बदल जाए, तो हर घर में खुशियां दस्तक दे सकती हैं।