'पाकिस्तान से ज्यादा हिंदुस्तान में महफूज है मुसलमान, वहां रेप-हत्या-अत्याचार हो रहा है...', भारत के बलूचों का फूटा गुस्सा

पंचायत में पंचायत को संबोधित करने वाले वक्ताओं ने भारत सरकार से पाकिस्तान में रह रहे बलूचिस्तानियों की मदद की मांग की है।

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पाकिस्तान में बलूचों द्वारा ट्रेन हाजैकिंग का मुद्दा अब भारत में भी जमकर गूंज रहा है। भारत में उत्तर प्रदेश के बागपत जिले का एक गांव जिसका नाम बिलौचपुरा है, में आज बलूचिस्तानियों पर पाकिस्तान में हो रहे जुल्म को लेकर एक बड़ी पंचायत हुई। इस पंचायत में पंचायत को संबोधित करने वाले वक्ताओं ने भारत सरकार से पाकिस्तान में रह रहे बलूचिस्तानियों की मदद की मांग की है। इन लोगों का कहना था कि बलूचिस्तान वैसे भी पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है उन्होंने जबरन उस इलाके पर कब्जा करके रखा हुआ है। बलूचिस्तान का इस गांव से पुराना नाता रहा है यही वजह है कि यहां के लोग बलूचिस्तानियों के बचाव के लिए भारत सरकार से मांग करने की तैयारी कर रहे हैं।


बागपत के बिलौचपुरा गांव में हुई पंचायत में आए लोगों का मुख्य मुद्दा बलूचिस्तान की आजादी को लेकर था। बलूचिस्तान के समर्थन में इस पंचायत का आयोजन किया गया। इस पंचायत में ग्रामीणों ने बलूचिस्तान में हो रही पाकिस्तानी ऑर्मी के अत्याचारों को लेकर चर्चा की। पंचायत के बाद ग्रामीणों ने सड़कों पर निकलकर पाकिस्तान विरोधी नारे भी लगाए थे। बलूचिस्तान में रहने वाले नागरिकों को पाकिस्तान की अमानवीय अत्याचारों को झेलना पड़ रहा है। इस दौरान पंचायत को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पाकिस्तान में न सिर्फ बलूच बल्कि अन्य अल्पसंख्यक भी सुरक्षित नहीं हैं।


हम भारत में पाकिस्तान से ज्यादा महफूज

पंचायत में पहुंचे हाजी इसहाक नाम के शख्स ने बताया कि हमारे बलूचों के लिए गांव में पंचायत हुई हमने सुना कि पाकिस्तान में हमारे बलोचों के साथ अत्याचार हो रहा है तो हमें तकलीफ हुई इसलिए हमारी पंचायत हुई। हम अपनी सरकार से इस बात की अपील करते हैं कि उनको भी न्याय मिलना चाहिए उनके साथ गलत हो रहा है। हमें उनके ऊपर हो रहे अत्याचारों पर तकलीफ है हम सिर्फ अपील कर सकते हैं कि उनकी मदद की करें। हम बाहर से कुछ नहीं कर सकते हैं। हम अपनी सरकार से चाहते हैं कि वो पाकिस्तान से बलूचिस्तान को आजाद करवाए और हमारे लोगों पर हो रहे जुल्म को खत्म करवाए। बलूचिस्तान भी आखिर हिन्दुस्तान का एक हिस्सा ही था। पाकिस्तान इतना बड़ा नहीं है बड़ा तो हिन्दुस्तान है। आज पाकिस्तान से ज्यादा मुसलमान हिन्दुस्तान में हैं। हम यहां खुशहाल हैं और पाकिस्तान से ज्यादा महफूज हैं। हम अपनी सरकार से उन बलोचिस्तानियों की मदद की मांग कर रहे हैं और हमें इस बात की उम्मीद कि हमारी सरकार बलोचिस्तानियों को भी पाकिस्तान के आतंक से मुक्त करवाएगी।


पाकिस्तान बलूचिस्तान में अमानवीय अत्याचार बंद करे

बलोचपुरा में हुई पंचायत में शामिल हुए एक अन्य सदस्य ने बताया कि पाकिस्तान में बलोचिस्तानियों पर जो जुल्म हो रहे हैं उसको लेकर हम गंभीर हैं। हमने अपने गांव में एक मीटिंग की है। इस बैठक में हमने पाकिस्तानी ऑर्मी द्वारा बलूचिस्तानियों पर किए गए जुल्म की घोर निंदा की है। बलूचिस्तानियों के उस दुख को लेकर हमने ये पंचायत की है। इस पंचायत के माध्यम से भारत की ओर से हम एक संदेश भेजना चाहते हैं कि पाकिस्तान बीते कई वर्षों से जो बलोचिस्तान की हत्या, अपहरण, रेप और लूटमार जैसे  अत्याचार करता आ रहा है अब पाकिस्तान वो सब कुछ करना बंद कर दे। हम इन कृत्यों के लिए पाकिस्तान की घोर निंदा करते हैं। हम भारत सरकार से भी उम्मीद रखेंगे कि ऐसी परिस्थिति में वो बलूचिस्तान की मदद करे और वहां के निवासियों का साथ दे।

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जानिए बागपत के बिलौच गांव का इतिहास

आपको बता दें कि बागपत जिले के बिलौचपुरा गांव का बलूचिस्तान से पुराना नाता है। साल 2016 में बलूचिस्तान से एक नेताओं का डेलीगेशन बागपत के इस गांव आया था। तब उन्होंने भी भारत सरकार से अपील की थी कि वो पाकिस्तानी गुलामी से वो उन्हें मुक्ति दिलाने में मदद करे। इतना ही नहीं बलूचिस्तान के इन लोगों ने तब दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन भी किया था। बागपत के बिलौच गांव में बलूचिस्तानियों को लेकर हुई पंचायत में पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को लेकर जमकर सराहना की गई। पंचायत को संबोधित कर रहे प्रवक्ताओं  ने बताया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने बलूचिस्तानियों की मदद के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है। इस गांव में करीब 12 हजार लोगों की आबादी रहती है और इसकी स्थापना सन 1526 में हुई थी। 1526 में बलूचिस्तान से एक ही परिवार के तीन सदस्य अल्लाह, नींबबक्स और पीरबक्स बागपत पहुंचकर इस गांव की नींव रखी थी। इस गांव ने 1947 में देश की आजादी की लड़ाई में भी बेहतरीन योगदान दिया था।

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Published By:
 Ravindra Singh
पब्लिश्ड