यूपी में 1800 से ज्यादा पाकिस्तानी नागरिकों की पहचान, वीजा रद्द होते ही एक्शन में योगी सरकार

उत्तर प्रदेश में 1800 से ज्यादा पाकिस्तानी नागरिकों की मौजूदगी का खुलासा हुआ है। केंद्र सरकार के निर्देश पर यूपी पुलिस हरकत में आ गई है।

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पाकिस्तानी नागरिक यूपी
पाकिस्तानी नागरिक यूपी | Image: Shutterstock

उत्तर प्रदेश में 1800 से ज्यादा पाकिस्तानी नागरिकों की मौजूदगी का खुलासा हुआ है। केंद्र सरकार के निर्देश पर यूपी पुलिस हरकत में आ गई है और इन लोगों के वीजा रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। बरेली, रामपुर, बुलंदशहर और वाराणसी जैसे जिलों में पाक नागरिकों की पहचान की जा चुकी है। डीजीपी प्रशांत कुमार ने बताया कि राज्य के सभी जिलों को निर्देश दे दिए गए हैं और जिला पुलिस प्रमुख इस मामले में सतर्कता से कार्रवाई कर रहे हैं।

बरेली में 35, रामपुर में 30, बुलंदशहर में 18 और वाराणसी में 10 पाकिस्तानी नागरिकों की पुष्टि हुई है। ये सभी लोग विभिन्न तरह के वीजा पर भारत में रह रहे थे, लेकिन अब इनकी गतिविधियों और दस्तावेजों की दोबारा जांच की जा रही है। वीजा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में इन पर कड़ी कार्रवाई होगी। 

पाकिस्तान की इकोनमी हो सकती है बदहाल

पाकिस्तान जब तक सीमा पार आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक यह समझौता रुका रहेगा। इस फैसले की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि पूर्व में दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति में भी भारत ने सिंधु जल समझौते को रद्द नहीं किया था।

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इस समझौत के तहत दोनों देशों के बीच साझा छह नदियों के जल के बंटवारे का प्रबंधन है। समझौता का रद्द होना पहले से ही खस्ताहाल पाकिस्तान की इकोनमी को और बदहाल कर सकता है। सीसीएस के फैसलों के बारे में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने जानकारी दी।

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सीसीएस का दूसरा अहम फैसला है पंजाब प्रांत की सीमा पर स्थित अटारी चेक पोस्ट को तत्काल प्रभाव से बंद करना। जिन पाकिस्तानी नागरिकों ने अटारी सीमा से भारत में प्रवेश किया है उन्हें एक मई, 2025 तक लौट जाने को कहा गया है।

तीसरा, फैसला यह है कि पाकिस्तान के ऐसे नागरिक जिन्हें सार्क वीजा एक्जेंपशन स्कीम (एसवीईएस) के तहत भारत आने की छूट खत्म कर दी गई है। पूर्व में इसके तहत जिन पाकिस्तानी नागरिकों को यह वीजा दिया गया है उसे रद्द कर दिया गया है।
वर्ष 1992 से यह स्कीम लागू थी जिसके तहत पाकिस्तान के विशिष्ठ नागरिकों (पत्रकारों, उद्योगपतियों, कलाकारों, राजनेताओं आदि) को विशेष सुविधा के तहत भारत आने की छूट होती है। भारत ने कहा है कि अगर कोई पाकिस्तान नागरिक उक्त वीजा स्कीम के तहत भारत में है तो उसे 48 घंटे के तहत भारत छोड़ना होगा।

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सीसीएस का चौथा फैसला यह है कि भारत ने पाकिस्तानी उच्चायोग में सैन्य, नौ सेना और वायु सेना सलाहकारों को अवांछित (पर्सन नान ग्राटा) घोषित कर दिया है। इन सलाहकारों को एक हफ्ते के भीतर भारत छोड़ने का आदेश दिया गया है।
साथ ही भारत ने इस्लामाबाद स्थित अपने दूतावास से भी इन पदों पर तैनात अधिकारियों को वापस बुला लिया है। दोनों उच्चायोगों से पाच सहायक कर्मचारियों को भी बुलाने का फैसला किया गया है।

सीएस का पांचवां फैसला यह है कि पाकिस्तान उच्चायोग के कर्मचारियों की संख्या 55 से घटा कर 30 कर दिया गया है। भारत ने एक तरह से पाकिस्तान के राजकीय स्तर को और घटा दिया है। वर्ष 2019 में जब भारत ने कश्मीर से धारा 370 समाप्त किया था, उसके बाद पाकिस्तान ने अपने उच्चायोग को वापस बुला लिया था। भारत ने भी ऐसा ही किया था।

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Published By:
 Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड