UP: लखनऊ की किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में फर्जी डॉक्टर रैकेट का खुलासा, ऐसे पकड़ा गया आरोपी
लखनऊ के KGMU में फर्जी डॉक्टर का रैकेट पकड़ा गया है। डॉ. केके सिंह ने आंतरिक टास्क फोर्स और छात्रों की मदद से इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा किया। जानें पुलिस ने कैसे कार्रवाई की।
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राघवेंद्र पांडे की रिपोर्ट
लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में फर्जी डॉक्टर का रैकेट पकड़ा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की सतर्कता और आंतरिक टास्क फोर्स की सक्रियता से यह मामला सामने आया। KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने इसकी पूरी जानकारी दी। डॉ. केके सिंह ने बताया कि कुछ दिनों पहले उन्हें सूचना मिली कि परिसर में एक व्यक्ति खुद को डॉक्टर बताकर छात्रों और मरीजों के परिजनों को गुमराह कर रहा है। उन्होंने आंतरिक टास्क फोर्स बनाई और छात्रों-छात्राओं की मदद से आरोपी को पकड़ा गया।
आरोपी की पहचान 26 वर्षीय हस्साम अहमद के रूप में हुई, जो 12वीं पास है लेकिन खुद को रेजिडेंट डॉक्टर बताता था। आरोपी ने 'कार्डियो सेवा संस्थान' नाम से एक फर्जी ट्रस्ट बनाया हुआ था। वह मरीजों के परिजनों से पैसे ऐंठने के लिए फर्जी दस्तावेज और नोटिस जारी करता था। उसने KGMU अधिकारियों के नाम से फर्जी लेटर पैड और डॉ. केके सिंह की फोटो और सिग्नेचर का गलत इस्तेमाल किया। आरोपी छात्रों को एम्स दिल्ली में होने वाले कथित कार्यक्रम के नाम पर बहकाता था, लेकिन एम्स से पुष्टि होने पर कोई ऐसा कार्यक्रम नहीं पाया गया।
बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा
आरोपी ने KGMU समेत अन्य अस्पतालों के कई डॉक्टरों और छात्रों को अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश की। परिसर में चौक क्षेत्र के पास घंटाघर के निकट कैंप भी लगाया गया था। डॉ. केके सिंह ने कहा कि, 'अगर जांच गंभीरता से हुई तो कई और फर्जी डॉक्टर पकड़ में आ सकते हैं। यह लोग लखनऊ से बाहर भी डॉक्टरों को अपने गिरोह में शामिल कर चुके होंगे, ऐसी आशंका जताई जा रही है। उन्होंने छात्रों और डॉक्टरों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें।
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अवैध मजारों पर कार्रवाई का ऐलान
इसी बीच डॉ. केके सिंह ने KGMU कैंपस पर अवैध मजारों के मामले में भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार कई बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं और सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। अब 15 दिनों के अंदर अगर संबंधित लोग खुद मजारें नहीं हटाते तो इन्हें गिराया जाएगा। कार्रवाई के दौरान पुलिस सुरक्षा ली जाएगी ताकि माहौल खराब न हो। KGMU प्रशासन का कहना है कि ये मजारें बिना अनुमति के कैंपस की जमीन पर बनी हैं। तीन मजारें पहले ही हटाई जा चुकी हैं।
यह घटना मेडिकल शिक्षा के पवित्र संस्थान में फर्जीवाड़े की गंभीर समस्या को उजागर करती है। KGMU प्रशासन की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद और खुलासे हो सकते हैं। आमजन को सलाह है कि किसी भी चिकित्सा संबंधी काम के लिए केवल अधिकृत डॉक्टरों और अस्पतालों से संपर्क करें।