कॉलेज की फीस भरी, साइकिल दिलाया और...छात्रा ने बांधी राखी तो DM ने भी निभाया भाई का फर्ज, रक्षाबंधन पर कानपुर से आई भावुक करने वाली तस्वीर

रक्षाबंधन के मौके पर बेटी इशु यादव ने डीएम को राखी बांधने की इच्छा जताई। डीएम ने उसकी इच्छा का सम्मान किया और इशु ने उनकी कलाई पर राखी बांधी।

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कॉलेज की फीस भरी, साइकिल दिलाया और...छात्रा ने बांधी राखी तो DM ने भी निभाया भाई का फर्ज, रक्षाबंधन पर कानपुर से आई भावुक करने वाली तस्वीर | Image: Republic

गौरव त्रिवेदी की रिपोर्ट

रक्षाबंधन पर कानपुर कलेक्ट्रेट में एक भावुक करने वाला दृश्य देखने को मिला। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह रोज की तरह जनता दर्शन में लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। इसी दौरान एक मां अपनी बेटी के साथ कलेक्ट्रेट पहुंची। उसके हाथ में एक प्रार्थना पत्र था, जिसमें बेटी को पढ़ाने की उम्मीद और संघर्ष की कहानी लिखी थी। मां ने बताया कि आर्थिक तंगी के कारण कई महीनों से बेटी की स्कूल फीस जमा नहीं हो पाई है।

रक्षाबंधन के मौके पर बेटी इशु यादव ने डीएम को राखी बांधने की इच्छा जताई। डीएम ने उसकी इच्छा का सम्मान किया और इशु ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। इसके बाद डीएम ने भी बड़े भाई का फर्ज निभाया। उन्होंने इशु की फीस जमा कराई, स्कूल आने-जाने के लिए साइकिल दिलाई और अन्य उपहार भी दिए।

इशु को पढ़ाने के लिए मां करती है चौका बर्तन का काम

नौबस्ता के आवास विकास हंसपुरम निवासी ललिता यादव के पति प्रागी लाल यादव की वर्ष 2017 में मृत्यु हो गई थी। परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं। एक बेटी की शादी हो चुकी है, जबकि दोनों बेटे अलग रहते हैं। ललिता ने अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि बेटों से उन्हें कोई आर्थिक मदद नहीं मिलती। वह घरों में चौका-बर्तन कर घर का खर्च चलाने के साथ बेटी इशु की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं।

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29 हजार रुपये की फीस थी बकाया

पढ़ाई में मेधावी इशु नौबस्ता स्थित केपी वाईजन सहयोगी इंटर कॉलेज में कक्षा 12 की छात्रा है। आर्थिक तंगी के कारण उसकी फीस कई महीनों से जमा नहीं हो सकी थी और करीब 29 हजार रुपये बकाया हो गए थे। बेटी की पढ़ाई बीच में न छूट जाए, इसी चिंता में ललिता ने डीएम से मदद मांगी थी। मामला सामने आने पर डीएम ने विद्यालय के प्रधानाचार्य से बात की।

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डीएम ने आधी फीस जमा कराई, बाकी माफ कराई

डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने बकाया फीस की आधी राशि स्वयं जमा कराई, जबकि बाकी आधी फीस प्रधानाचार्य से बातचीत कर माफ करवा दी। इस तरह छात्रा की पढ़ाई पर आर्थिक संकट का असर पड़ने से बच गया।

स्कूल की दूरी के लिए दिलाई साइकिल

छात्रा से बातचीत के दौरान डीएम ने इशु से स्कूल आने-जाने के बारे में भी जानकारी ली। छात्रा ने बताया कि उसका घर स्कूल से करीब दो किलोमीटर दूर है। रोजाना आने-जाने में उसे परेशानी होती थी। इस पर डीएम ने छात्रा के लिए साइकिल की व्यवस्था कराई। 27 अगस्त को ही उसे साइकिल मिल गई और वह उसी से स्कूल से अपने घर लौटी।

छात्रा ने बताया IAS बनने का है सपना

डीएम को राखी बांधने के बाद इशु ने अपने भविष्य का सपना भी साझा किया। उसने बताया कि वह पढ़ाई में मेहनत कर आगे चलकर IAS अधिकारी बनना चाहती है। उसका सपना है कि अधिकारी बनने के बाद वह भी जरूरतमंद लोगों की समस्याएं सुने और उनकी मदद करे। डीएम ने छात्रा का हौसला बढ़ाते हुए उसे पूरी लगन से पढ़ाई करने और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया। 

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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