Cyber Crime: ऑनलाइन ठगी गैंग का भंडाफोड़, हाथरस साइबर पुलिस ने 4 शातिरों को पकड़ा; म्यूल खातों के जरिए किया करोड़ों का फ्रॉड
हाथरस साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी गैंग का भंडाफोड़ किया है। मास्टरमाइंड मनीष समेत 4 आरोपियों को मौके से गिरफ्तार भी किया गया, इन लोगों ने 7.40 करोड़ रुपये की ठगी की थी, जानें कैसे ठगी को अंजाम देते थे पढ़ें पूरी खबर
- भारत
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Mule Bank Accounts Scam: हाथरस की साइबर क्राइम पुलिस ने एक ठगी गैंग का पर्दाफाश किया है। इस गैंग ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये ठगे। सोशल मीडिया के जरिए लालच देकर म्यूल बैंक खाते खुलवाए जाते थे। फिर अलग-अलग राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम इन खातों में ट्रांसफर कर मनी लॉन्ड्रिंग करते थे। पुलिस ने गैंग के चार शातिर सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि, गैंग का मास्टरमाइंड मनीष था। मनीष लोगों को लालच देकर फर्जी फर्म और बैंक खाते खुलवाता था। हर चालू खाता खुलवाने पर मनीष को 2 लाख रुपये और खाताधारक को बीस हजार रुपये दिए जाते थे। इस तरह गैंग ने कई फर्जी खाते तैयार किए।
कैसे करते थे ठगी?
गैंग सोशल मीडिया पर ट्रेडिंग में तेजी से पैसा कमाने के झांसे देता था। लोगों को फर्जी जीएसटी नंबर, ईमेल और मोबाइल नंबरों के जरिए संपर्क किया जाता था। ठगी की रकम को इन म्यूल खातों में ट्रांसफर कर छिपाया जाता था। जांच में NCRP पोर्टल की सात शिकायतों में करीब सात करोड़ चालीस लाख रुपये की साइबर ठगी के सबूत मिले हैं। एक बैंक ऑफ महाराष्ट्र के म्यूल खाते में 80 लाख रुपये ट्रांसफर होने के भी सबूत पुलिस के पास हैं।
पुलिस ने डिजिटल ट्रेल और बैंकिंग दस्तावेजों के आधार पर यह कार्रवाई की। अब गैंग के बाकी सदस्यों की तलाश जारी है। एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने कहा- 'पूरे नेटवर्क और इसके सरगनाओं तक पहुंचने के लिए जांच और कानूनी कार्रवाई जारी है।'
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बढ़ते साइबर अपराधों से रहे सावधान
ये मामला दिखाता है कि साइबर ठग कितने चालाक तरीके से काम कर रहे हैं। ऑनलाइन ट्रेडिंग या आसान कमाई के लालच भरे ऑफर से बचना बहुत जरूरी है। लोग अपने बैंक खाते किसी अजनबी को न खोलें और न ही किराए पर दें। संदिग्ध मैसेज या कॉल आने पर तुरंत साइबर पुलिस को सूचना दें। एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराना सबसे आसान और प्रभावी तरीका है। हाथरस पुलिस की ये सफल कार्रवाई साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अच्छा कदम है।