हर रोज ये 'अभागन' मां मांग रही जवान बेटे की मौत की दुआ; रुला देगी गाजियाबाद के इस परिवार की कहानी
हरीश की ख्याल रखने वाली उसकी मां निर्मला का कहना है कि उनका बेटा बिस्तर पर पड़े-पड़े सड़ता रहे, कंकाल बन जाए तो ऐसी जिंदगी का क्या करना।
- भारत
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'आंखों की दहलीज पर आकर सपना बोला आंसू से
घर तो आखिर घर होता है, तुम रह लो या मैं रह लूं'
बहुत पुराना ये शेर दिल्ली से सटे गाजियाबाद में रह रही एक मां की जिंदगी पर हू-ब-हू फिट बैठता है। दुनिया में ऐसी कौन सी मां होगी, जो अपने जवान जिगर के टुकड़े की मौत की दुआ मांगे। लेकिन 55-56 साल की उम्र की निर्मला दिन रात यही दुआ मांग रही हैं। सुनकर लगेगा कि कितनी अभागन मां है जो बददुआ नहीं बल्कि सीधे मौत की दुआ मांग रही है।
लेकिन आपको बता दें कि ये उसकी बेरहमी नहीं, अपने बेटे के लिए बेपनाह मोहब्बत है जिसकी वजह से वो चाहती है कि वो जल्द से जल्द जिंदगी छोड़ दे। इसके लिए निर्मला ने देश की सबसे बड़ी अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
11 साल से बिस्तर पर है हरीश
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हरीश ना तो उठ सकता है। ना चल सकता है, ना करवट बदल सकता है, ना हंस सकता है ना रो सकता है ना बोल सकता है ना खुद से खा सकता है ना पी सकता है यहां तक कि वो अपने दर्द और तकलीफ का इजहार तक नहीं कर सकता। वो एक ऐसी जिंदगी जी रहा है, जिसकी धड़कन तो है पर जिंदगी नहीं।
हरीश की ख्याल रखने वाली उसकी मां निर्मला का कहना है कि उनका बेटा बिस्तर पर पड़े-पड़े सड़ता रहे, कंकाल बन जाए तो ऐसी जिंदगी का क्या करना। निर्मला का कहना है कि उन्हें बेटे की ऐसी हालत और तकलीफ अब नहीं देखी जाती। उनका कहना है कि अब भगवान इसे अपने-आप मुक्ति दे दे। हम नहीं बोल रहे कि भगवान इसे ठीक करें पर मुक्ति दे दें।
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11 साल पहले सबकुछ ठीक था फिर अचानक
हरीश की जिंदगी 11 साल पहले गुलजार थी। वो एक आम युवक की तरह जी रहा था, हंस रहा था और पढ़ रहा था। वो इंजीनियर बनना चाहता था। इसके लिए चंडीगढ़ के एक कॉलेज में उसने एडमिशन ली थी। पढ़ाई के दौरान वह यूनिवर्सिटी के नजदीक मोहाली में एक पीजी की चौथी मंजिल पर स्थित कमरे में रहता था। एक रोज़ हरीश अपने पीजी की बालकनी में खड़ा था और अचानक गिर पड़ा। हरीश को फौरन पीजीआई चंडीगढ़ ले जाया गया। उसके सिर में गंभीर चोटें आई थीं। सांसें चल रही थी, लेकिन वो होश में नहीं था।
चंडीगढ़ पीजीआई में हरीश की हालत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिया। लेकिन मां-बाप ने हार नहीं मानी। वो उसने लेकर दिल्ली के AIIMS आए। यहां भी उसका लंबा इलाज चला। पर हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसके बाद एम्स के डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया था। इसके बाद वो बड़े-बड़े अस्पताल में लेकर हरीश को पहुंचे लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इलाज के चलते घर की माली हालत भी खराब हो गई।
सुप्रीम कोर्ट से मांगी मौत की इजाजत
हरीश की हालत में तनिक भी कोई सुधार नहीं है। लिहाजा इस परिवार ने अब अपना मन मारकर हरीश को गरिमामय मौत देने का इरादा किया था। मगर लगता है हरीश के पिता अशोक कि किस्मत में अभी दुखों का अंत नहीं हुआ है तभी तो हाई कोर्ट में मांगी गई उनकी इच्छा मृत्यु की याचिका को ठुकरा दिया गया। अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।