10 हजार में फेक डिग्री, सऊदी-कनाडा-UK तक नेटवर्क... कानपुर में फर्जी मार्कशीट गिरोह का पर्दाफाश, मास्टरमाइंड समेत 4 गिरफ्तार

Kanpur: छापेमारी के दौरान पुलिस के हाथ 62 जाली मार्कशीट, डिग्री, ट्रांसक्रिप्ट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और पीएचडी से जुड़े दस्तावेज लगे हैं। इसके अलावा दो लैपटॉप, एक डेस्कटॉप, प्रिंटर, हार्ड डिस्क, 141 फर्जी मोहरें, 80 थ्री-डी मोनोग्राम स्ट्रिप, 24 डाई, होलोग्राम और बड़ी मात्रा में कच्चा माल भी जब्त किया गया है।

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गौरव त्रिवेदी की रिपोर्ट

Kanpur News: कानपुर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय फर्जी डिग्री और मार्कशीट गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह पिछले 13 सालों से देश-विदेश में जाली शैक्षणिक दस्तावेज बेच रहा था। पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनका नेटवर्क देश ही नहीं विदेशों तक फैला हुआ था। गिरोह हाईस्कूल-इंटर से लेकर पीएचडी तक की डिग्रियां अपने प्रिटिंग प्रेस में छाप रहा था।

कानपुर के बेकनगंज थाना क्षेत्र में SIT और साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले बड़े संगठित गिरोह का खुलासा किया। पुलिस के मुताबिक गिरोह का सरगना जियाउल हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ है, जो लंदन के नंबरों का इस्तेमाल कर नेटवर्क संचालित करता था। जांच में सामने आया है कि गिरोह भारत के अलावा सऊदी अरब, कनाडा और ब्रिटेन तक फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट सप्लाई करता था।

पुलिस ने क्या-क्या बरामद किया?

छापेमारी के दौरान पुलिस के हाथ 62 जाली मार्कशीट, डिग्री, ट्रांसक्रिप्ट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और पीएचडी से जुड़े दस्तावेज लगे हैं। इसके अलावा दो लैपटॉप, एक डेस्कटॉप, प्रिंटर, हार्ड डिस्क, 141 फर्जी मोहरें, 80 थ्री-डी मोनोग्राम स्ट्रिप, 24 डाई, होलोग्राम और बड़ी मात्रा में कच्चा माल भी जब्त किया गया है।

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गिरोह के सरगना जियाउल हसन ने खुद अपना जुर्म कबूल किया। उसने बताया कि वह 2013 से फर्जी डिग्री बनाने का काम कर रहा था। वो अब तक 800 से ज्यादा डिग्री बना चुके है। वह 10 हजार रुपये में कोई भी डिग्री बना देते थे।

कई बड़े विश्वविद्यालयों के नाम पर तैयार होते थे फर्जी दस्तावेज

पुलिस के अनुसार गिरोह कई प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर मोटी रकम वसूलता था। कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि ये गिरोह कैसे काम करता था।

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उन्होंने बताया कि यह लोग फर्जी मार्कशीट बनाने का एक रैकेट चला रहे थे और देश के अलग-अलग शहरों में कूरियर के माध्यम से मार्कशीट, सर्टिफिकेट बेचने का काम कर रहे थे। यह गैंग ने 2017 से यहां पर काम कर रहा था। हमारी टीम ने छापा मारकर इनको पकड़ा और सारे उपकरण बरामद किए। इन लोगों के पास से 850 रेडीमेड प्रिटेंट पेपर इन लोगों के पास से मिले हैं।

UK- कनाडा और सऊदी तक फैला नेटवर्क

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि जियाउल हसन दो बार यूके जा चुका है और एक बार सऊदी गया है। हाल ही में ये लोग गोवा गए थे। जियाउल हसन के खाते से 49 लाख का ट्रांजेक्शन और उसके भाई हसन आसिफ के अकाउंट से 40 लाख का ट्रांजेक्शन एक बैंक खाते से हुआ है। आमिर के खाते से करीब एक करोड़ का ट्रांजेक्शन हुआ है। इस मामले में पहले हम 10 अभियुक्तों को जेल भेज चुके हैं। ये इसी कड़ी से जुड़े हुए लोग थे। अभी तक हम प्रिटिंग प्रेस तक नहीं पहुंच पाए थे। इस बार जो छापेमारी हुई है, जहां से छपाई हो रही थी उनको पकड़ा गया है। कनाडा और यूके में भी इनसे जुड़े हुए कुछ लोग हैं। अब पुलिस इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

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Published By:
 Ruchi Mehra
पब्लिश्ड