ITBP के जवानों ने किया पुलिस कमिश्नर के दफ्तर का घेराव? कमिश्नर ने बताई अंदर की पूरी कहानी; डीजी को पत्र लिखकर की कार्रवाई की मांग
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने कहा कि ऑफिस का घेराव नहीं हुआ था, बल्कि कमांडेंट और सीएमओ को बुलाया गया था। इसी बीच उनके साथ कुछ अतिरिक्त ITBP के जवान आ गए, जिन्हें पुलिस ऑफिस के बाहर गलत तरीके से तैनात किया गया था।
- भारत
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कानपुर से गौरव त्रिवेदी की रिपोर्ट
ITBP Jawan Mother's Amputated Hand Case: कानपुर में इलाज में कथित लापरवाही के चलते आईटीबीपी जवान की मां का हाथ काटने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। आईटीबीपी अधिकारियों की नाराजगी के बाद पुलिस मुकदमा दर्ज करने की तैयारी में है। यह कार्रवाई सीएमओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर की जा रही है। रिपोर्ट में ITBP जवान की मां के इलाज में देरी और मेडिकल लापरवाही की बात सामने आई है, जिसके कारण उनका हाथ काटना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, मामले में इलाज के दौरान हुई कथित लापरवाही को लेकर दोबारा जांच शुरू की गई है। इस दौरान जांच टीम ने इलाज करने वाले डॉक्टरों से विस्तृत पूछताछ की, जिसमें कई तथ्य निकलकर सामने आए हैं।
क्यों आई हाथ काटने की नौबत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि एसीएमओ सहित चार डॉक्टरों के पैनल ने माना है कि महिला की नसों में खून के थक्के बन रहे थे। इसके चलते दबाव बढ़ा और हाथ में सूजन के साथ संक्रमण फैलता चला गया। अधिकारियों के मुताबिक, अगर समय रहते वैस्कुलर सर्जन से परामर्श लेकर जरूरी प्रक्रिया की जाती, तो हाथ काटने की नौबत ही नहीं आती।
पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने में की देरी?
इस मामले में पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज करने में देरी को लेकर कमिश्नर रघुवीर लाल ने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय की स्पष्ट गाइडलाइन के अनुसार मेडिकल नेग्लिजेंस के मामलों में विशेषज्ञ मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर ही लापरवाही तय होने के बाद मुकदमा दर्ज किया जाता है। इसी वजह से प्रशासनिक और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था।
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कमिश्नर ने ITBP कमांडेंट के व्यवहार पर जताई नाराजगी
पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने इस दौरान आईटीबीपी कमांडेंट के व्यवहार पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में आईटीबीपी जवानों का पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचना और फॉर्मेशन बनाकर खड़े होना अनुशासनहीनता का संकेत देता है और इससे गलत संदेश गया।
ITBP के जवानों ने किया था कमिश्नर ऑफिस का घेराव?
उन्होंने पुलिस कमिश्नर के ऑफिस घेराव के मुद्दे पर कहा, 'घेराव नहीं हुआ था, हमने ही उनके कमांडेंट और CMO को बुलाया था। इसी बीच उनके साथ कुछ अतिरिक्त ITBP जवान आ गए। उन्हें पुलिस ऑफिस के बाहर गलत तरीके से तैनात किया गया था। उनके साथ कोई और मतभेद होने का सवाल ही पैदा नहीं होता, क्योंकि वो हमारा भी जवान है। ऐसे में उनके प्रति सभी की संवेदना थी कि इनकी मदद होनी चाहिए, लेकिन कानूनी तरीके से। जो पहली रिपोर्ट सीएमओ से मिली थी वो अनिर्णायक थी, उसमें कुछ भी ठीक तरीके से स्पष्ट नहीं था। अब दोबारा मिली रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि पारस अस्पताल और कृष्णा अस्पताल की लापरवाही पाई गई है। ये दोनों अस्पताल उपचार में देरी के लिए दोषी पाए गए हैं। अब उसी रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कराया जा रहा है।'
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डीजी को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग
ऑफिस घेराव को लेकर कमिश्नर ने बताया कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए उन्होंने आईटीबीपी के महानिदेशक को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। कमिश्नर के मुताबिक, जैसे ही उन्हें जानकारी मिली कि जवान कार्यालय परिसर में फॉर्मेशन बनाकर खड़े हैं, उन्होंने तत्काल आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद जवानों को मौके से हटाया गया और घटना पर खेद भी व्यक्त किया गया।