पुराने जख्मों का इलाज होगा, फोड़ा कितना बड़ा हो, सर्जरी तो करनी पड़ेगी- संभल के मुद्दे पर CM योगी की दो टूक

CM योगी ने कहा कि सर्वे का आदेश न्यायालय ने दिया। 19 को सर्वे हुआ, 21 को सर्वे हुआ। 24 को सर्वे होने जा रहा था, तब वहां जो शरारत की गई और माहौल खराब किया गया।

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Yogi Adityanath
Yogi Adityanath | Image: Republic

CM Yogi Adityanath on Sambhal Controversy: रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के 'महाकुंभ महासम्मेलन' में CM योगी आदित्यनाथ ने संभल विवाद, जाति की राजनीति समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। इस दौरान देश में उठ रहे मंदिर-मस्जिद विवाद पर उन्होंने कहा कि पुराने जख्म का इलाज होना जरूरी है।

सीएम योगी ने कहा कि आप देख रहे हैं कैसे एक एक करके संभल का इस्लामीकरण हुआ। कैसे वहां पर पूरी तरह एक-एक चिन्ह नष्ट किए गए, सनातन धर्म की विरासत से जुड़े स्थलों को ताला बंद कर दिया गया, कुएं पाट दिए गए, बावड़ी पाटकर घर बना दिए गए।

'पुराना जख्म कैंसर बन जाता है’

CM योगी ने मंदिर-मस्जिद के विवादों और वर्कशिप एक्ट पर कहा कि पुराना जख्म का उपचार होना बहुत आवश्यक है। नहीं तो कैंसर बन जाता है। फिर कितनी भी कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी आप देते रहेंगे, उसका उपचार नहीं होगा। सर्जरी एक बार होनी है। उस सर्जरी के लिए हमें तैयार रहना होगा। फोड़ा कितना भी बड़ा क्यों न हों, एक बार सर्जरी हो जाएगी तो नए सिरे से वो आगे बढ़ेगा।

संभल में हुई हिंसा पर CM योगी ने कहा कि वहां सर्वे का आदेश न्यायालय ने दिया। 19 को सर्वे हुआ, 21 को सर्वे हुआ। 24 को सर्वे होने जा रहा था, तब वहां जो शरारत की गई और  माहौल खराब किया गया।

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‘किसी के उपासना स्थल को तोड़कर जबरन’

सीएम योगी ने कहा कि 5 हजार वर्ष पहले पुराण में इस बात का उल्लेख करता है कि संभल में श्रीहरि विष्णु का दसवां अवतार कल्कि के रूप में अवतरित होगा। तिथि पहले से तय है। सबकुछ पहले से तय है। मैं किसी मत और मजहब के खिलाफ नहीं हूं। अगर किसी का पहले से चला आ रहा उपासना स्थल है तो उसका सम्मान करता हूं, लेकिन मैं इसका विरोधी हूं कि किसी के भी उपासना स्थल को तोड़कर जबरन अपना स्थल बनाने का प्रयास करेगा तो इसकी निंदा होनी चाहिए और उसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए।

‘संभल में दंगे होते थे, लेकिन सरकारें चुप थीं’

उन्होंने कहा कि संभल में लगातार दंगे होते थे और कोई सरकारें नहीं बोलती थीं। 1947 से 2017 के पहले तक 209 हिंदुओं की हत्या हुआ। 1976 में 8 हिंदू निर्मम रूप से मारे गए, 1978 में 184 हिंदुओं की सामूहिक हत्या हुई। एक भी दरिंदे के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। उसके बाद यह लोग शांति के पैगाम लेकर घूमते हैं।

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Published By :
Ruchi Mehra
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