'बबुआ 12 बजे उठते थे, 5 बजे जिम जाते और फिर महफिल सजती थी...', CM योगी ने अखिलेश पर किया वार, बोले- कुछ लोग जीवनभर बच्चे बने रहते हैं
लखनऊ की सभा में सीएम योगी ने एक बार फिर अखिलेश यादव पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के पास लोगों के बीच पहुंचने की फुर्सत ही नहीं थी।
- भारत
- 3 min read
CM Yogi Targets Akhilesh Yadav: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ दौरे के दौरान समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले भी विकास हो सकता था, लेकिन इसमें उनकी रुचि नहीं थी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बबुआ दोपहर 12 बजे सोकर उठते थे, 5 बजे जिम के लिए निकल जाते थे और 7 बजे के बाद महफिल जम जाती थी। सीएम योगी ने दावा किया कि इसी कारण उत्तर प्रदेश में लंबे समय तक विकास नहीं हुआ।
दरअसल, सीएम योगी शुक्रवार, 7 अगस्त को राजधानी लखनऊ पहुंचे, जहां उन्होंने नेशनल हैंडलूम डे पर संत कबीर राज्य स्तरीय हैंडलूम पुरस्कार बांटे। इस दौरान उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए चुन-चुनकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा।
सीएम योगी का सपा पर निशाना
अपने संबोधन में CM योगी ने कहा, ‘MSME उत्पाद को हमने रजिस्ट्रेशन करने के साथ ही हर साल पांच लाख रुपये की सुरक्षा बीमा का कवर भी दिया है। अगर किसी के साथ कोई दुर्घटना हो जाती है, तो उसे पांच लाख रुपये मिल जाएंगे। यह चिंता पहले भी होनी चाहिए थी। वे दिन-रात काम करते हैं तो केवल दीया की रोशनी में नहीं, चिमनी में नहीं, केरोसिन के धुएं में नहीं, बल्कि जलते हुए LED का बल्ब उनकी आंख की रोशनी को और गति दे सके। क्योंकि गति सिर्फ उसकी आंख की रोशनी को नहीं, बल्कि उसके हथकरघे के माध्यम से बनने वाले उत्पाद में अपनी विरासत को सम्मान देने का भी एक माध्यम बनता है। यह काम 2017 से पहले भी हो सकता था। लेकिन भाई-भतीजेवाद में पड़ी और डूबी हुई उस समय की सरकारों के पास फुर्सत कहां थी? फुर्सत के लिए भी समय चाहिए।’
अखिलेश यादव पर किया तीखा प्रहार
उन्होंने आगे कहा, 'कुछ लोग उन शब्दों से पीछा नहीं छुड़ा सकते जो उनके साथ जुड़ जाता है। कुछ लोग जीवन भर बच्चे ही बने रहते हैं। बबुआ भी यही करते थे, 12 बजे सोकर उठते थे, 2 बजे तक तैयार होते थे और 5 बजते-बजते जिम जाने का समय हो जाता था, 7 बजे के बाद तो महफिल जम जाती थी। तब तो फिर देश और दुनिया से उनका संपर्क ही समाप्त हो जाता था। तो उत्तर प्रदेश के बारे में कहां से सोच पाते? इसी कारण दंगे होते थे और महीनों-महीनों कर्फ्यू रहता था। इंसेफेलाइटिस और डेंगू से मौतें होती थी। गरीब का बच्चा जिन बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में पढ़ना, उन बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के बुरे हाल थे। न शिक्षक था, न भवन था, न ही बालक-बालिकाओं के लिए टॉयलेट था, न पेयजल के लिए व्यवस्था थी।'
Advertisement
सरकार की गिनाईं उपलब्धियां
सीएम योगी ने आगे अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि आज बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग टॉयलेट हैं। पेयजल की व्यवस्था है। हर बच्चे को दो यूनिफॉर्म दी जा रही है। बैग, किताबें दी जा रही हैं। जूते-मौजे, स्वेटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। आज बच्चे पढ़ाई में अच्छे निकल रहे हैं। किसी भी स्कूल में जाकर बच्चे से पाठ पढ़ने को कहिए, वे पढ़कर सुनाते हैं। यह देखकर खुशी होती है। यह तब होता है जब मुख्यमंत्री समय निकालकर जिले-जिले में जाए, मंत्रिगण जगह-जगह जाए। लेकिन इन लोगों की विकास में कोई रुचि ही नहीं थी। जो है उनमें खानदान में लूट-खसूट शुरू हो जाती थी, कौन कितना नोंच ले और कौन कितना लूट ले। ऐसे में उनसे क्या उम्मीद करते? महिलाओं की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा भी खुद ही बने हुए थे।