जाति के नाम पर समाज को बांटना राष्ट्र के प्रति अपराध, हमें एक भारत-श्रेष्ठ भारत चाहिए: CM योगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि संयुक्त परिवार भारत की ताकत रहे हैं। परिवार सीमित होने के साथ बिखराव और तनाव बढ़ा है। गायत्री परिवार को समाज के साथ परिवारों को जोड़ने का दायित्व भी निभाना होगा।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमें बिखरा हुआ और जातीय खेमों में आपस में लड़ता भारत नहीं, बल्कि एक भारत-श्रेष्ठ भारत चाहिए। जाति, क्षेत्र और भाषा के नाम पर समाज को बांटना राष्ट्र और भारत माता के प्रति अपराध है। गुलामी के दौर में भी एक वर्ग समाज को बांटता था, जबकि दूसरा समाज को जोड़कर स्वाधीनता की हुंकार भरता था। आज भी वही प्रवृत्ति अलग-अलग रूपों में दिखाई दे रही है। ऐसे में शिक्षक समाज की जिम्मेदारी है कि विभाजनकारी ताकतों को सफल न होने दे।
मुख्यमंत्री रविवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव आंबेडकर सभागार में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। गायत्री मंत्र के साथ कार्यक्रम शुरू हुआ। मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया।
व्यक्ति नहीं, विचार करता है लंबी यात्रा
मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा और माता भगवती देवी को नमन करते हुए कहा कि गायत्री परिवार ने यज्ञ के माध्यम से समाज को जोड़कर सामाजिक एकता का आदर्श प्रस्तुत किया। पंडित श्रीराम शर्मा संगठन को अपना नाम दे सकते थे, लेकिन उन्होंने विचार को प्रधानता दी। व्यक्ति के नाम पर चलने वाले संगठन धराशायी हो जाते हैं, जबकि विचार लंबी यात्रा करता है। गायत्री परिवार की 100 वर्षों की साधना इसका प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि 1923 में गीता प्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई। रास्ते अलग थे, लेकिन तीनों ने जनचेतना जगाने और समाज को सनातन मूल्यों, भारत और भारतीयता से जोड़ने का काम किया।
शिक्षक जागृत हुआ तो भारत बनेगा विश्व गुरु
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को समाज की चेतना और युग निर्माता बताते हुए कहा कि शिक्षक जागृत होकर ईमानदारी से दायित्व निभाए तो भारत को विश्व गुरु बनने में देर नहीं लगेगी। भारत की आचार्य और गुरुकुल परंपरा ने तक्षशिला और नालंदा जैसे विश्वविद्यालय दिए। इसी परंपरा ने चाणक्य-चंद्रगुप्त, महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम और महर्षि सांदीपनि-कृष्ण दिए। इस परंपरा को फिर जीवंत करना होगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा से 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं का जुड़ना महत्वपूर्ण है। युवा पीढ़ी का सही मार्गदर्शन कर उसे प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाएंगे तो आज का युवा ही भारत का भाग्य विधाता बनेगा।
समाज के साथ परिवारों को भी जोड़ें
मुख्यमंत्री ने कहा कि संयुक्त परिवार भारत की ताकत रहे हैं। परिवार सीमित होने के साथ बिखराव और तनाव बढ़ा है। गायत्री परिवार को समाज के साथ परिवारों को जोड़ने का दायित्व भी निभाना होगा। प्रकृति किसी से भेदभाव नहीं करती, इसलिए समाज में भी भेदभाव का स्थान नहीं होना चाहिए।
नदियों को अविरल-निर्मल बनाना होगा
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मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में 2017 से 2026 तक 275 करोड़ पौधे लगाए गए हैं। इस वर्ष 35 करोड़ पौधरोपण हुआ। पौधों के संरक्षण और निगरानी की भी व्यवस्था की गई है। उन्होंने नदियों को मानव शरीर की धमनियों जैसा बताते हुए कहा कि जीवनदायिनी नदियों को बचाकर उन्हें अविरल और निर्मल बनाना होगा।
2047 के भारत के लिए कर्तव्य को दें प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के शताब्दी वर्ष के लिए गुलामी की मानसिकता त्यागने, विरासत पर गौरव करने, सामाजिक समता और विकसित भारत के लिए काम करने का संकल्प लेना होगा। हर व्यक्ति अधिकार से अधिक कर्तव्य को महत्व दे तो भारत को दुनिया की कोई ताकत आंख नहीं दिखा सकती। उन्होंने गायत्री परिवार से अगले 100 वर्षों का लक्ष्य तय करने और शिक्षकों से 2047 के विकसित भारत के लिए युवा पीढ़ी को सही दिशा देने का आह्वान किया।