Azamgarh: पत्नी, बेटे और दो पंडितों के हत्यारोपी का एनकाउंटर, पुलिस ने मुठभेड़ में किया ढेर; आखिर क्या है पूरा मामला?
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक दिल दहला देने वाली वारदात में पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान सनकी हत्यारे को मार गिराया है। आरोपी अरविंद सिंह ने अपने घर में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विवाद होने पर अपनी पत्नी और पूजा करा रहे दो पुजारी की गोली मारकर बेरहमी से हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने अपने बच्चों को एक कमरे में बंधक बना लिया। करीब 8 घंटे चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच पुलिस फायरिंग में आरोपी को ढेर कर दिया गया।
- भारत
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Azamgarh Murder: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में पत्नी सहित दो पंडितों की निर्मम हत्या के आरोपी अरविंद सिंह को पुलिस ने देर रात हुई मुठभेड़ में ढेर कर दिया है। इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपी खुद को बचाने के लिए बच्चों को ढाल बनाकर कमरे में छिपा रहा। जब पुलिस ने उसे घेरने की कोशिश की, तो आरोपी ने पुलिस बल पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके तुरंत बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए घर में धावा बोला, जहां दोनों तरफ से हुई फायरिंग में आरोपी को ढेर कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, SOG और ATS की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई देर रात करीब 1 बजे की। एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने रात करीब 3.30 बजे आरोपी की मौत की पुष्टि की।
बच्चों को छोड़ने को तैयार नहीं आरोपी
एसएसपी डॉक्टर अनिल कुमार ने बताया कि आजमगढ़ जिले के अहिरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार की शाम को आरोपी अरविंद ने अपनी पत्नी और दो पंडितों की गोली मारकर हत्या कर दी। मौके पर पुलिस के पहुंचते ही आरोपी ने खुद को बच्चों समेत कमरे में बंद कर लिया। इस दौरान पुलिस ने आरोपी को सरेंडर करने और बच्चों को सही सलामत छोड़ देने की बात कही।
आरोपी ने बेटे पर चला दी गोली
SSP के मुताबिक, इस घटनाक्रम के दौरान आरोपी परिजनों और बच्चों को मार देने की धमकी देने लगा। इतना ही नहीं, उसने अपने बेटे को गोली भी मार दी। गोली की आवाज सुनते ही पुलिस कमरे में दाखिल हो गई। आरोपी ने पुलिस को देखते ही उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षा और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गोली चलाई, जिसमें आरोपी घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर आरोपी अरविंद और उसके बेटे दोनों को मृत घोषित कर दिया गया।
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क्या है पूरा मामला?
मंगलवार शाम करीब 6 बजे जब अरविंद सिंह अपने घर पहुंचा, तो वहां उसकी पत्नी बबीता सिंह, मां समला देवी, 6 साल का बेटा लक्खा, 5 साल की बेटी परी और एक सात महीने की बेटी मौजूद थीं। इसके साथ ही घर में धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था, जिसे पटखौली गांव के पंडित महेंद्र पाठक, छितौना भटौली गांव के अखिलेश मिश्रा, उनके बेटे हिमांशु मिश्रा और एक अन्य पंडित मिलकर संपन्न करा रहे थे।
विवाद के बाद पिस्टल से फायरिंग
घर में पूजा होते देख आरोपी अरविंद ने पंडितों से इस बारे में जानकारी ली। इसके तुरंत बाद उसने पंडितों से उनका आधार कांड मांगा। इसी बात को लेकर उसके और पंडितों के बीच बहस हो गई। जानकारी के मुताबिक, इसी दौरान सिरफिरे ने घर में रखी अपनी पिस्टल निकाली और फायरिंग शुरू कर दी। उसने पहले पत्नी बबीता को और फिर दोनों पंडितों को गोली मार दी।
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आरोपी ने बच्चों समेत खुद को कमरे में किया बंद
गोली की आवाज सुनकर मौके पर घर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। भीड़ को देख अरविंद ने खुद को तीन बच्चों समेत कमरे में कैद कर लिया। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची। करीब 7 घंटे तक लगातार मान-मनौवल करने के बावजूद आरोपी बच्चों को छोड़ने को तैयार नहीं हुआ। पुलिस की अनगिनत कोशिशों को बावजूद जब आरोपी नहीं माना, तो अचानक घर के भीतर से गोली की आवाज सुनाई दी। आरोपी ने अपने 10 साल के बेटे को गोली मार दी थी। आवाज सुनते ही पुलिस घर में घुसी और अरविंद पर जवाबी कार्रवाई की, जिसमें वो बुरी तरह घायल हो गया और बाद में उसकी मौत हो गई।